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METRO में बेटी संग नीचे बैठी मां, नहीं मिली सीट:ज्यादातर पैसेंजर महिलाएं, फिर भी फर्श पर बैठना पड़ा, यूजर्स बोले-किस काम की पढ़ाई

2 महीने पहले
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सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें मेट्रो के महिला कोच में एक मां दुधमुंही बच्ची को गोद में लेकर फर्श पर बैठी नजर आ रही है। फिर भी किसी महिला पैसेंजर ने सीट पर बैठने के लिए नहीं कहा। वीडियो पर यूजर्स का गुस्सा फूटा और लिखा- ‘किस काम की पढ़ाई।’

आईएएस अधिकारी अवनीश शरन ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से यह वीडियो शेयर किया है। अधिकारी ने लिखा-'आपकी डिग्री सिर्फ एक कागज का टुकड़ा है, अगर वो आपके व्यवहार में न दिखे।' वीडियो पर यूजर्स ने पक्ष और विपक्ष में कमेंट किए।

यूजर ने लिखा- ‘मानवीयता मर चुकी है’

मलिका नाम की यूजर ने लिखा- ‘आज की पीढ़ी से अच्छे व्यवहार, परोपकार और अनुशासन की अपेक्षा न करें तो अच्छा रहेगा। इस पीढ़ी में मानवीयता मर चुकी है।’

@annafox_uk नाम के यूजर ने आईएएस अधिकारी को टैग करते हुए लिखा- ‘आपकी बात सोलह आने सच है लेकिन कई बार मांओं को छोटे बच्चे को जमीन पर लेकर बैठना अच्छा लगता है, क्योंकि वे सहज महसूस करती हैं। शायद हम सिक्के के दूसरे पहलू को देख नहीं पा रहे हैं।’

यूजर्स के मिले-जुले कमेंट

अन्य यूजर ने लिखा कि हो सकता है इस मां को गोद में बच्चे को लिटाने के लिए नीचे बैठाना ठीक लगा हो। बिना हकीकत जाने आस-पास के लोगों की डिग्री पर सवाल उठाना ठीक नहीं।

@_nimitgupta_ के यूजर सवारियों के पक्ष में और आईएएस अधिकारी को लताड़ा- 9 घंटे ऑफिस में काम करके, 2 घंटे घर पहुंचने में लगते हैं, तो आदमी सिर्फ अपने बारे में सोचता है। आपके पास सरकारी कार है, तभी इतना सोच पाते हैं।

एक और यूजर ने वीडियो बनाने वाले को भी लताड़ा और लिखा ओह हो, बड़ा दुख हुआ जी देखकर, वाकई बेशर्मी की हद है। वीडियो बनाकर ट्विटर-ट्विटर खेलना जरूरी है। खुद की जगह देता पहले, वीडियो बनाएगा। कमेंट का जवाब देते हुए @Vickypramodji नाम के यूजर ने लिखा-वीडियो देखने के हिसाब से वीडियो बनाने वाला खड़ा हुआ है।

IAS अधिकारी को ही सुनाने लगे लोग

@iamneerajpatel ने लिखा-श्रीमान! ऐसे बहुत से उदाहरण आपके विभाग में ही मिल जाएंगे। कृपया, इसे अपने यहां ही ढूंढने की कोशिश कीजिए। छोटे से छोटा अफसर भी आम आदमी से ऐसे व्यवहार करता है, जैसे वह खुद अवतार ले कर आया हो। बड़े साहब लोग तो फरियादी की तरह देखते भी नहीं कि कहीं कुछ फरियाद न कर दे।