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दिल्ली में पैदा हुए मुशर्रफ रहे भारत के दुश्मन नंबर-1:मां अलीगढ़ में पढ़ती थीं, पिता थे अफसर, पाकिस्तान जाकर बने तानाशाह, बलोच महिलाओं पर सितम किए

नई दिल्ली2 महीने पहले
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पाकिस्तान के पूर्व सैन्य तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ इन दिनों अपनी आखिरी सांसें गिन रहे हैं। दुबई के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। मुशर्रफ गंभीर बीमारी एमाइलॉयडोसिस से जूझ रहे हैं। उनके परिवार की ओर से कहा गया है कि अब उनका रिकवर करना मुश्किल है। परिवार ने लोगों से दुआ करने की अपील की है।

दिल्ली में बचपन गुजारने वाले परवेज मुशर्रफ का पाकिस्तान जाकर ताकतवर तानाशाह बनना और फिर अपने ही देश से भागकर दुबई में शरण लेना किसी फिल्मी कहानी की तरह है। लेकिन मुशर्रफ की जिंदगी कुछ ऐसी ही रही है। दिल्ली में पैदा होने वाले मुशर्रफ के भारत का दुश्मन नंबर-1 बनने और फिर भगोड़ा होने की कहानी बड़ी रोचक है।

मुशर्रफ परिवार का ताल्लुक दिल्ली और लखनऊ से रहा है। उनकी मां ने 2005 में अपने शहर लखनऊ का दौरा किया था।
मुशर्रफ परिवार का ताल्लुक दिल्ली और लखनऊ से रहा है। उनकी मां ने 2005 में अपने शहर लखनऊ का दौरा किया था।

दिल्ली की कोठी में रहता था मुशर्रफ परिवार, मां AMU में पढ़ती थीं

परवेज मुशर्रफ का परिवार बंटवारे से पहले भारत में काफी संपन्न था। उनके दादा टैक्स कलेक्टर थे। उनके पिता भी ब्रिटिश हुकूमत में बड़े अफसर थे। मुशर्रफ की मां अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ती थीं। मुशर्रफ परिवार के पास पुरानी दिल्ली में एक बड़ी कोठी थी। अपने जन्म के चार साल बाद तक मुशर्रफ ज्यादातर यहीं रहे।

2005 में अपनी भारत यात्रा के दौरान परवेज मुशर्रफ की मां बेगम जरीन मुशर्रफ लखनऊ, दिल्ली और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी गई थीं। जरीन 1940 में यहां पढ़ा करती थीं।

बंटवारे से पहले दिल्ली में भी मुशर्रफ परिवार काफी संपन्न माना जाता था। उनके पिता और दादा ब्रिटिश सरकार में बड़े अफसर थे।
बंटवारे से पहले दिल्ली में भी मुशर्रफ परिवार काफी संपन्न माना जाता था। उनके पिता और दादा ब्रिटिश सरकार में बड़े अफसर थे।

मुशर्रफ परिवार ने पाकिस्तान में भी बनाई अपनी अलग पहचान

1947 में बंटवारे के वक्त 4 साल के मुशर्रफ को लेकर उनका परिवार पाकिस्तान के कराची चला गया। ब्रिटिश हुकूमत के लिए काम करने वाले मुशर्रफ के पिता पाकिस्तान की नई सरकार में अफसर बन गए। उन्होंने पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के लिए काम करना शुरू कर दिया। इस तरह मुशर्रफ परिवार नए मुल्क पाकिस्तान में भी अपना रसूख बनाने में सफल रहा।

सेना में जुड़े मुशर्रफ, 1965 में भारत से लड़े थे युद्ध, पाकिस्तान ने माना वीर

कॉलेज की पढ़ाई खत्म करने के बाद 21 साल की उम्र परवेज मुशर्रफ ने बतौर जूनियर अफसर पाकिस्तानी आर्मी जॉइन कर ली। उन्होंने 1965 के युद्ध में भारत के खिलाफ लड़ाई लड़ी। ये युद्ध पाकिस्तान हार गया। बावजूद इसके बहादुरी से लड़ने के लिए पाक सरकार की ओर से मुशर्रफ को मेडल दिया गया।

1971 के युद्ध में भी मुशर्रफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिसे देखते हुए सरकार ने उन्हें कई बार प्रमोट किया। 1998 में परवेज मुशर्रफ जनरल बने। उन्होंने भारत के खिलाफ़ कारगिल की साजिश रची। लेकिन बुरी तरह से असफल रहे।

अपनी जीवनी ‘ 'इन द लाइन ऑफ फायर - अ मेमॉयर' में जनरल मुशर्रफ ने लिखा कि उन्होंने कारगिल पर कब्जा करने की कसम खाई थी। लेकिन नवाज शरीफ की वजह से वो ऐसा नहीं कर पाए।

जनरल मुशर्रफ पर आरोप लगाए जाते हैं कि उन्होंने पाक पीएम नवाज शरीफ को बिना बताए कारगिल का युद्ध छेड़ा था। इस युद्ध में पाकिस्तान बुरी तरह से हारा था।
जनरल मुशर्रफ पर आरोप लगाए जाते हैं कि उन्होंने पाक पीएम नवाज शरीफ को बिना बताए कारगिल का युद्ध छेड़ा था। इस युद्ध में पाकिस्तान बुरी तरह से हारा था।

जिस नवाज शरीफ ने बनाया सेनाध्यक्ष, उन्हें ही सत्ता से बाहर किया

1998 में तत्कालीन पाक पीएम नवाज शरीफ ने परवेज मुशर्रफ पर भरोसा करके उन्हें पाकिस्तानी सेना का प्रमुख बनाया। लेकिन एक साल बाद ही 1999 में जनरल मुशर्रफ ने नवाज शरीफ का तख्तापलट कर दिया और पाकिस्तान के तानाशाह बन गए। उनके सत्ता संभालते ही नवाज शरीफ को परिवार समेत पाकिस्तान छोड़ना पड़ा था।

सत्ता में रहते हुए जनरल मुशर्रफ ने बलूचिस्तान में आजादी की मांग करने वालों के साथ काफी बुरा सुलूक किया। सैकड़ों लोगों की हत्या कर दी गई। यही कारण है कि सत्ता जाने के बाद में बलूच महिलाओं ने अमेरिका से जनरल मुशर्रफ को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने की मांग की थी।

मुशर्रफ को महिलाओं को अधिकार देने के लिए भी याद किया जाएगा

जनरल परवेज मुशर्रफ पर पाकिस्तान में देशद्रोह और सामूहिक हत्या जैसे कई मुकदमे चले। अदालत ने उन्हें फांसी की सजा भी सुनाई थी। लेकिन फांसी से पहले ही वो इलाज के नाम पर विदेश भाग गए। तमाम बुराइयों के बीच पाकिस्तान में जनरल मुशर्रफ को महिलाओं को ज्यादा अधिकार देने वाले नेता के रूप में भी याद किया जाता है।

मुशर्रफ के दौर में ही पाकिस्तान के सदनों में बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंच पाईं। इसी तरह उन्होंने इस्लामिक रेप कानून को बदल दिया। जिसमें रेप को साबित करना काफी जटिल हुआ करता था। इन सब के लिए पाकिस्तान के कट्टरपंथी जनरल परवेज मुशर्रफ के खिलाफ हो गए थे।