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मां ने PF के पैसाें से पढ़ाया, बेटी लाई 92%-नंबर:ऑनलाइन पढ़ाई के लिए दिलवाया मोबाइल, दर्जी पिता का गर्व से चौड़ा हुआ सीना

नई दिल्ली8 महीने पहलेलेखक: सुनाक्षी गुप्ता
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कहते हैं बच्चों के प्रति मां-पिता का प्यार अमूल्य होता है, इसे कभी भी तोला नहीं जा सकता। एक मां अपने बच्चों की हर जरूरत को पूरा करने के लिए खुद को न्योछावर कर देती है। शुक्रवार को देश में सीबीएसई बोर्ड ने कक्षा 12वीं और 10वीं का परिणाम घोषित किया। देश की लड़कियों ने अच्छे नंबरों से बोर्ड परीक्षा पास कर अपने साथ परिवार और स्कूल का नाम भी रोशन किया।

इन्हीं तमाम बेटियों में एक बेटी हैं गौतमबुद्धनगर की गुंजन सिंह जिसने ईडब्ल्यूएस कोटे से नोएडा के एमिटी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाई की और 12वीं में 92% नंबर हासिल किए। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से ताल्लुक रखने वाली गुंजन के पिता गुरमीत सिंह एक दर्जी हैं और मां दया कौर स्कूल में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी हैं। 12वीं का परिणाम आने पर इस परिवार के सभी सदस्यों के चेहरे पर अलग ही मुस्कराहट और चमक थी। बेटी की सफलता पर माता-पिता की खुशी से आंखें भर आईं थी। वुमन भास्कर की टीम ने गुंजन के परिवार से बात कर जानी उनकी सफलता और संघर्ष की कहानी।

पेरेंट्स ने कहा बच्ची के पास मोबाइल फोन नहीं था ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पा रही थी, इसलिए पीएफ के पैसे निकालकर सबसे पहले मोबाइल खरीदा।
पेरेंट्स ने कहा बच्ची के पास मोबाइल फोन नहीं था ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पा रही थी, इसलिए पीएफ के पैसे निकालकर सबसे पहले मोबाइल खरीदा।

बेटी की ऑनलाइन कक्षा के लिए पीएफ से पैसे निकाले
दया बताती हैं कि परिवार मूलरूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रहने वाले हैं। मगर पिछले करीब 20-25 वर्षों से नोएडा के छलैरा गांव में रहते हैं। वह पिछले 15 वर्षों से एमिटी स्कूल में कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रही हैं, जबकि उनके पति गुरमीत किराए पर दर्जी की दुकान चलाते हैं।

कोरोना काल सभी के लिए बुरा समय लेकर आया। लॉकडाउन में दुकानें बंद हुई तो पति का काम भी बंद पड़ गया और दया की नौकरी भी पर्मानेंट नहीं थी, इसलिए उन्हें भी वेतन नहीं मिल सका। कोरोना के मुश्किल समय में परिवार आर्थिक तंगी का सामना कर रहा था। इस बीच स्कूलों में ऑनलाइन कक्षा शुरू हुई, मगर उनकी बेटी के पास मोबाइल फोन नहीं था, इसलिए वो पढ़ाई भी नहीं कर पा रही थी।

पहले दया ने कई जगह से एक मोबाइल फोन की जुगाड़ करने की कोशिश की ताकि उनकी बेटी की पढ़ाई जारी रहे, जब कहीं से भी इंतजाम नहीं हुआ तब दया ने अपने PF यानी प्रॉविडेंट फंड के एकाउंट से 40 हजार रुपए निकाले। इन पैसों से अपनी बेटी और बेटे के लिए मोबाइल फोन खरीदा। गुंजन से बड़े दो भाई हैं और दोनों ही कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं। कोरोना और लॉकडाउन के कारण इनकी पढ़ाई भी प्रभावित हुई थी।

जिस स्कूल में नौकरी की उसी में बच्ची को पढ़ाने की चाह रखी और पूरी भी हुई। - दया कौर
जिस स्कूल में नौकरी की उसी में बच्ची को पढ़ाने की चाह रखी और पूरी भी हुई। - दया कौर

10वीं में आए थे 69.2 % और बारहवी में बनी स्कूल टॉपर
गुंजन ने 12वीं कक्षा आर्ट्स स्ट्रीम से पास की है। उन्होंने इतिहास में 96, हिंदी में 89, राजनीति विज्ञान में 87, होम साइंस में 90 और मूर्तिकला विषय में 98 अंक हासिल किए हैं। इस तरह 92% हासिल कर गुंजन अमित-आशा स्कूल की टॉपर बनी हैं। जबकि कक्षा 10वीं में गुंजन ने मात्र 69.2% अंक हासिल किए थे। कक्षा 12वीं के लिए गुंजन ने खुद मेहनत की और बिना किसी ट्यूशन-कोचिंग के ही अच्छे अंक हासिल किए।

बनना चाहती हैं फैशन डिज़ाइनर
नोएडा के एमिटी स्कूल में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए अमितआशा नाम से स्कूल संचालित किया जाता है। यहां बच्चों को निश्शुल्क पढ़ाया जाता है। गुंजन ने भी इसी स्कूल से पढ़ाई पूरी की है।

डीयू में बीए कोर्स में ग्रेजुएशन करना चाहती हूं, दाखिले की तैयारी कर रही हूं। - गुंजन सिंह
डीयू में बीए कोर्स में ग्रेजुएशन करना चाहती हूं, दाखिले की तैयारी कर रही हूं। - गुंजन सिंह

गुंजन बताती हैं कि वो बचपन से अपने पिता को काम करते देखती आई हैं और उनसे काफी प्रेरणा लेती हैं। अपने पिता से टेलरिंग की स्किल सीखी है और भविष्य में फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हैं।

घर नहीं बना पाए मगर बच्चों की पढ़ाई में लगाया सर्वस्व
गुंजन के पिता गुरमीत बताते हैं कि सबसे बड़ा बेटा 23 वर्ष का है और प्राइवेट कॉलेज में बीकॉम की पढ़ाई कर रहा है, तृतीय वर्ष में है। दूसरा बेटा 21 साल वर्ष का है और वह डीयू से बीकॉम की पढ़ाई कर रहा है। अब बेटी भी कॉलेज में दाखिला लेगी, इसके लिए हम पैसे इकट्ठे कर रहे हैं। वह कहते हैं कि बच्चे ही हमारी एकमात्र पूंजी है। हमने आज तक अपना मकान नहीं बनाया मगर बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। पढ़ाई पूरी कराने के लिए कर्जा भी लेना पड़ा तो लिया, आज हमें उसी का परिणाम मिल रहा है। बेटी ने टॉप कर हमारा सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।