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प्यार में होशियार:नो कोविड वैक्सीन नो सेक्स

6 दिन पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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  • प्यार में सतर्कता बरत रहे हैं युवा
  • मनमानी के बजाय सोच-समझकर चल रहा इश्क

ड्रेसिंग और ईटिंग हैबिट ही नहीं बदली और सुधरी, बल्कि कोविड ने युवाओं के सेक्सुअल बिहेविअर को भी बदल दिया। सेक्सुअल रिलेशनशिप और लव गेम्स का रूल्स ही चेंज कर दिया। अब इश्क में पड़े युवा सेक्स से पहले पाटर्नर से यह पूछने से झिझकते नहीं कि उन्होंने कोविड वैक्सीन लगवायी है या नहीं।

वैक्सीन के बाद ही मोहब्बत
वैक्सीन के बाद ही मोहब्बत

प्रेमरोगियों पर भी कोरोना का डर
वीमन फर्स्ट डेटिंग ऐप बंबल ने खुलासा किया है कि कोरोना की पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर में मोहब्बत के दीवाने युवा अपने साथी के कोविड वैक्सीनेशन स्टेट्स को लेकर पहले से ज्यादा स्पष्ट सोच रखने लगे हैं। एक सर्वे के अनुसार डेटिंग में शामिल 100 में से करीब 40 लोगों का यह मानना है कि जिन लोगों ने वैक्सीन नहीं लगवायी है, वे उसके साथ सेक्सुअल संबंध बनाने से बचेंगे। बंबल इंडिया की कम्युनिकेशन डायरेक्टर समर्पिता समद्दर का कहना है कि कोविड के कारण युवाओं के बिहेविअर में आए नए बदलावों की वजह से लव गेम्स के रूल में कई बदलाव आए हैं। उनका मानना है कि कोरोना वायरस के डर के कारण जब लोग घर में थे, तो उन्होंने डेटिंग को लेकर सीरियसली सोचा और अगर यह कहें कि बोरियत से पैदा हुई डेटिंग की लालच ने उन्हें इस तरह के रिश्तों की ओर आकर्षित किया। सर्वे में शामिल 100 में से 85 युवा डेटिंग को लेकर गंभीर नजर आए कि उन्हें किसे डेट करना है किसे नहीं, किसके साथ सेक्स करना है और किसके साथ नहीं।

मोहब्बत का मामला है सोच-समझकर कदम उठाएं
मोहब्बत का मामला है सोच-समझकर कदम उठाएं

डेटिंग में भी महिला अधिकारों की बात
कुड़ियों का है जमाना… बात में दम तो है! तभी तो इश्क लड़ाने को आतुर लड़कियां भी डेटिंग से पहले यह जान लेना चाहती हैं कि लड़का जेंडर इक्वालिटी में कितना बिलीव करता है। लड़के जरा गौर करें, क्योंकि 100 में से 88 लड़कियां आजकल ऐसा सोच रही हैं कि लड़के हेल्थ को लेकर कितने सतर्क हैं। वे ऐसे लड़कों को डेट नहीं करना चाहती हैं, जो लिंगभेद जैसी सोच के हिमायती हैं और सेहत के प्रति लापरवाह। साफ शब्दों में कहा जाए, तो लड़कियां उन लड़कों के साथ प्यार का पेंच नहीं लड़ाना चाहती, जो उन्हें बराबरी का दर्जा नहीं देते और अपनी व लड़की की सेहत को भी गंभीरता से नहीं लेते।

डेटिंग का नया रूल समझदारी से भरा
डेटिंग का नया रूल समझदारी से भरा

प्यार की डोर में और भी पेंच
सोहनी और महिवाल के जमाने में ही नहीं, अभी भी इश्क के दरिया को पार करना आसान नहीं है। दूसरी लहर के बाद युवा डेटिंग के मामले में बहुत ज्यादा सचेत नजर आए। ज्यादातर युवाओं ने माना कि वे ऐसे लोगों के साथ डेट पर जाना चाहते हैं, जो कोविड को लेकर सतर्क हैं और जेब से मजबूत हैं। शादीशुदा महिलाओं में मशहूर एक डेटिंग ऐप ग्लीडन के सर्वे में भी यह पाया कि डेटिंग करने को तैयार 10 में 8 महिलाएं लिए वर्चुअल इश्क के लिए मालदार आसामी को तलाशती हैं यानी अधिक सैलेरी पानेवाले मैनेजर, डॉक्टर, डेंटिस्ट, चार्टड एकाउंटेड के साथ डेट करना पसंद करती हैं।

लापरवाही से अपना ही नुकसान
लापरवाही से अपना ही नुकसान

ग्लैमर का तड़का ही काफी
डेटिंग के लिए लड़कियों को अब पहले की तरह ग्लैमरस दिखने का दबाव नहीं रहा। उनके लिए मास्क उतारने की नौबत देर से आती है। वो अपने हाफ ग्लैमरस लुक से अपनी बात कहने में कामयाब हो जाती हैं। इसकी वजह है कोविड के दौरान शुरू हुआ वर्चुअल डेटिंग का बढ़ता ट्रेंड, जहां लड़कियां सिर से पैर तक सजने के बजाय चेहरे पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। महिलाएं शायद एड्स को लेकर लापरवाह रही हैं, पर कोविड के दौर में यह लापरवाही नजर नहीं आयी।

समझदारी वाली मोहब्बत है सबसे बेस्ट
समझदारी वाली मोहब्बत है सबसे बेस्ट

कंजूस आशिकों का बटुआ भी खुश
प्यार को बहुत खर्चीला माना जाता रहा है। युवाओं की बातचीत में तो यह कॉमन है, “मैं गर्लफ्रेंड अफोर्ड नहीं कर सकता।” लेकिन कोविड के बाद कम से कम 50 प्रतिशत लोगों ने महसूस किया कि लॉकडाउन के कारण ऑनलाइन डेटिंग करने से उनके बटुए का वजन कम नहीं हुआ। मजेदार तरीके से कहा जाए, तो लॉकडाउन मुफ्त मोहब्बत का दौर भी रहा। युवाओं के बीच इसमें भी दो राय नहीं है कि वर्चुअल डेटिंग ने पैसे के साथ-साथ समय की भी बचत की। कोरोना के बाद आए बदलाव में मोहब्बत जरूर जारी है, लेकिन प्यार का कोडवर्ड थोड़ा बदल गया है। अब रिश्ता बनाने की बात बाद में आती है, सेफ्टी फर्स्ट का ख्याल दिमाग में पहले आता है और पाटर्नर से बेहिचक पूछा जाता है, आपने कोविड वैक्सीन की डोज ले ली है ना?

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