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ये ऑयल खाएंगे तो हार्ट-लिवर होंगे जाम:200 डिग्री पर तेल बनता है जहर, एक दिन में कितना चम्मच खाएं कि ना हो बीमारी

8 दिन पहलेलेखक: ऐश्वर्या शर्मा
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खाने के तेल का कनेक्शन पेट से लेकर दिल तक है। टेस्टी खाने की बात हो या खूबसूरत बालों की, तेल का जिक्र जरूर होता है। पुराने जमाने से ही इसका इस्तेमाल हो रहा है लेकिन आज बाजार में कई तरह के कुकिंग ऑयल बिक रहे हैं। लेकिन अधिकतर लोग यह नहीं जानते कि कौन-सा तेल खाना ठीक है।

वहीं, इसके दाम भी लगातार आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। रूस-यूक्रेन के बीच चल रही जंग ने इसकी कीमत को बढ़ा दिया। वहीं, इंडोनेशिया ने भी तेल का निर्यात रोक दिया है। इस पर देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत खाद्य तेलों के आयात के लिए नए विकल्प तलाश कर रहा है।

हड़प्पा सभ्यता में इस्तेमाल होता था तिल का तेल

माना जाता है कि 250,000 ईसा पूर्व जब आदमी ने आग जलाना सीखा था, तभी खाना पकाने के लिए एनिमल फैट से खाद्य तेल बनाया गया। 1930 में हड़प्पा की खुदाई के दौरान भारी मात्रा में तिल का तेल मिला। वैदिक काल में भारत में इसी तेल का इस्तेमाल होता है। इसके बाद सरसों का तेल भी चलन में आया।

चीन और जापान ने 2000 ईसा पूर्व में सोया तेल बनाना शुरू किया। 2000 ईसा पूर्व यूरोप में जैतून का तेल बना। भारत में साल 1930 में डालडा लॉन्च किया गया। 1970 में हमारा देश खाने के तेल में 95% आत्मनिर्भर था।

कई तरह के तेल

भारत में तेल की कई वैराइटी मिलती है। जैसे तटीय इलाकों में नारियल का तेल, उत्तर और पूर्व में सरसों का तेल, पश्चिम और दक्षिण भारत में मूंगफली, सूरजमुखी और तिल का तेल। कुछ तेल पौधों, ड्राई फ्रूट या फलों से निकाले जाते हैं।

पौधों से सरसों, मूंगफली, नारियल, मक्का, कैनोला, जैतून, कपास, पाम, सूरजमुखी, रेपसीड और तिल निकाला जाता है। ड्राई फ्रूट्स से बादाम, काजू, कद्दू के बीज, पिस्ता, अखरोट, पाइन नट का तेल बनता है। वहीं, संतरा, अंगूर के बीज और नींबू से भी तेल निकाला जाता है।

तेल खाना जरूरी पर सही मात्रा में

भारत में हर साल एक व्यक्ति 19 किलो खाने के तेल की खपत करता है। हर इंसान को तेल खाने की जरूरत है लेकिन एक निर्धारित मात्रा में। वयस्क को हर दिन 2000 कैलोरी लेनी चाहिए। महिलाएं एक दिन में 5-6 चम्मच और पुरुष 6-7 चम्मच तेल ले सकते हैं।

बीमारियों से दूर रखते हैं ये ऑयल

डाइटीशियन कामिनी सिन्हा ने बताया कि हर तेल की अपनी अलग खासियत होती है। हर महीने तेल बदलते रहना चाहिए। सभी तेल के अलग-अलग फायदे भी होते हैं। लोग ऑलिव ऑयल को यूज तो करते हैं लेकिन यह कुकिंग ऑयल नहीं है। यह सलाद या हल्का बेक करने में इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन एक तापमान पर इसे गर्म करने के बाद इसकी गुणवत्ता खत्म हो जाती है। यह तेल विटामिन ई से भरपूर होता है जो आसानी से पचता है। इससे कोलेस्ट्रॉल भी नियंत्रित रहता है।

सरसों का तेल खाने में सबसे बेहतर होता है। गर्म होने के बाद भी इसकी न्यूट्रिशन वैल्यू खत्म नहीं होती। सनफ्लावर ऑयल स्किन, नसों, मीनोपॉज के बाद अचानक बढ़ने वाली शुगर और बीपी जैसी बीमारियों को रोकता है। बादाम का तेल विटामिन ई, प्रोटीन और मोनो अनसैचुरेटेड फैटी एसिड का अच्छा सोर्स होता है। इसे खाने से कैंसर होने की संभावना नहीं होती। हर दिन 15ml तेल खाना चाहिए।

रिफाइंड ऑयल से करें तौबा

आजकल कई कंपनी रिफाइंड ऑयल बेच रही हैं। इसे 5 लेवल पर साफ किया जाता है। इसमें कई तरह के रसायन मिलाए जाते हैं। तेल को रिफाइंड बनाने की प्रक्रिया के दौरान उसके गुण खत्म हो जाते हैं। अगर इस तेल को 200 डिग्री से ज्यादा गर्म किया जाए तो जहर बन सकता है। यानी इसे आधे घंटे से ज्यादा लगातार गर्म किया जाए तो यह जहरीला बन जाता है। यह दिल के साथ-साथ लिवर को नुकसान पहुंचाता है।

जितनी बार तेल गर्म किया जाता, उतनी बार फैटी एसिड और खतरनाक फ्री रेडिकल ऑक्सिडेशन की प्रक्रिया से गुजरते हैं जिससे कई तरह के केमिकल रिएक्शन होते हैं। इससे तेल बासी होने लगता। इस्तेमाल किए गए तेल को 2 बार से ज्यादा यूज नहीं करने में ही भलाई है।

हर तेल का स्मोकिंग पॉइंट होता है अलग

हर तेल की खासियत और स्मोकिंग पॉइंट अलग-अलग होते हैं। मूंगफली, तिल या सरसों के तेल का स्मोकिंग पॉइंट ज्यादा होता है। इसे 400 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा तापमान में गर्म किया जा सकता है। ऐसे तेल फ्राई करने के लिए ठीक रहते हैं। वहीं, अखरोट, अलसी, ऑलिव जैसे तेलों का स्मोकिंग पॉइंट 225 डिग्री फारेनहाइट से कम होता है। इन्हें सलाद में डाला जाता है।

गुजरात में सबसे ज्यादा प्रोडक्शन

दुनिया में सबसे अधिक खाने का तेल भारत से आयात होता है। तिलहन में सोयाबीन का तेल 34 फीसदी, मूंगफली 27% और सरसों 27% का प्रोडक्शन होता है। वैजिटेबल ऑयल में सरसों का तेल 35% और मूंगफली का तेल 25% बनता है। वित्तीय वर्ष 2021 के दौरान 3.6 करोड़ मीट्रिक टन तिलहन का उत्पादन हुआ। 2020 में सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में इसका उत्पादन किया गया, वहीं, 2021 में गुजरात को पहला स्थान मिला।

यूक्रेन वॉर के बाद तेल के दाम

भारत में लगातार पिछले 1 साल से तेल के दाम बढ़ रहे हैं। कई तेलों के दामों में तो 50 फीसदी तक का उछाल देखने को मिला। सबसे महंगा पाम ऑयल हुआ है। प्राइज मॉनिटरिंग सेल, कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री के मुताबिक इसका दाम साल 2020 में 85 था जो 2021 में 122 रुपए हो गया। रूस और यूक्रेन की जंग का असर पाम, सनफ्लावर और सोयाबीन ऑयल की सप्लाई पर पड़ा है। भारत यूक्रेन से 90% सनफ्लावर ऑयल खरीदता है।