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असुरक्षित संबंधों का कैंसर:दुनिया के एक-चौथाई गर्भाशय के कैंसर यहां, 73% महिलाओं को जानकारी ही नहीं; पुरुष प्राइवेट पार्ट को भी खतरा

नई दिल्ली10 दिन पहलेलेखक: ऐश्वर्या शर्मा

जनवरी को सर्वाइकल कैंसर अवेयरनेस का महीना कहा जाता है। दुनिया में हर 2 मिनट में 1 महिला सर्वाइकल कैंसर की वजह से अपनी जान गंवा देती है। ब्रेस्ट कैंसर के बाद भारत में यह दूसरा ऐसा कैंसर है जो महिलाओं का दुश्मन है।

सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के मुंह का कैंसर है जो एक वायरस की वजह से होता है। यह शारीरिक संबंध बनाने से फैल सकता है। यह कैंसर महिलाओं के लिए इतना घातक है कि सरकार ने देश की सभी स्कूली बच्चियों को इसकी मुफ्त वैक्सीन लगाने का फैसला किया है। CERVAVAC नाम की स्वदेशी वैक्सीन को सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने तैयार किया है। गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को यह वैक्सीन लॉन्च की।

यह वन शॉट वैक्सीन है यानी यह एक ही बार में 9 से 14 साल की लड़कियों को लगेगी। भारत में अभी तक सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए जो वैक्सीन लग रही हैं वो सब विदेशी हैं और उनकी 2 डोज लगती हैं। CERVAVAC वैक्सीन स्कूल में मुफ्त लगेगी, लेकिन बाजार में इसकी कीमत 200 से 400 रुपए होगी।

यह फैसला सरकारी पैनल नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑफ इम्यूनाइजेशन (NTAGI) की सलाह पर लिया गया। स्कूलों में वैक्सीनेशन ड्राइव यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) के तहत चलाई जाएगी। HPV वैक्सीन टीनेज में लग जाए तो सर्वाइकल कैंसर होने के चांस बहुत कम होते हैं।

सबसे पहले बताते हैं कि सर्वाइकल कैंसर होता क्या है?

सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन है सर्वाइकल कैंसर

सर गंगाराम हॉस्पिटल, दिल्ली में गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर रूमा सात्विक के अनुसार सर्वाइकल कैंसर सर्विक्स यानी गर्भाशय के मुंह का कैंसर होता है। यह यूट्रस का निचला हिस्सा होता है जो प्राइवेट पार्ट से जुड़ा होता है। यह कैंसर Human Papillomavirus (HPV) से होता है। यह वायरस संबंध बनाने से शरीर में प्रवेश करता है यानी यह सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (STD) है जो कैंसर की शक्ल ले लेता है।

आगे बढ़ने से पहले ग्राफिक के जरिए जानिए सर्वाइकल कैंसर के लक्षण:

9 से 14 साल तक की बच्चियों को लगना चाहिए यह टीका

सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से फैलता है इसलिए इसे रोकने लिए एचपीवी वैक्सीन लगाई जाती है।

डॉक्टर रूमा सात्विक ने बताया कि इस बीमारी से बचने के लिए टीनेज में ही लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई जाती है।

इसे लगाने की सही उम्र 9 से 14 साल है। यह इसलिए क्योंकि उस समय बच्चा सेक्शुअली एक्टिव नहीं होता। चूंकि सर्वाइकल कैंसर संबंध बनाने से होता है इसलिए कम उम्र में ही लड़कियों को इसकी डोज दे देनी चाहिए, ताकि भविष्य में उन्हें उनके पार्टनर से कोई अनचाहा वायरस ना मिले। अगर मिले भी तो सर्विक्स पर उसका कोई असर न पड़े। हर पेरेंट्स को अपनी बच्ची को यह वैक्सीन लगवानी चाहिए।

भारत में 2008 से Gardasil और Cervarix नाम की 2 वैक्सीन मौजूद हैं। इसकी एक डोज 3 हजार रुपए से शुरू होकर 10 रुपए तक आती है।

45 की उम्र तक की महिलाएं लगवा सकती हैं डोज

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली में गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. सुनीत कौर मल्होत्रा ने बताया भारत में 45 तक की उम्र की महिलाएं ये वैक्सीन लगवा सकती हैं, लेकिन वैक्सीन के साथ ही पैप स्मीयर टेस्ट भी कराने की सलाह दी जाती है। अगर पैप स्मीयर टेस्ट में कैंसर डिटेक्ट होता है तब ये वैक्सीन नहीं लगाई जाती।

पैप स्मीयर टेस्ट में ब्रश की मदद से सर्विक्स के सेल्स लिए जाते हैं। माइक्रोस्कोप की मदद से इन सेल्स की जांच की जाती है जिससे सर्वाइकल कैंसर डिटेक्ट होता है।

शादीशुदा महिलाओं को भी लगती है वैक्सीन, कई इन्फेक्शन से सुरक्षा

डॉ. रूमा सात्विक कहती हैं कि सेक्शुअली एक्टिव महिलाओं को भी इस वैक्सीन की डोज लगाई जाती है। दरअसल आमतौर पर डॉक्टर यह मानकर चलते हैं कि महिला की पूरी जिंदगी में एक ही सेक्शुअल पार्टनर होता है। इसलिए उनमें सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन का रिस्क जीरो है, लेकिन जरूरी नहीं महिला को एचपीवी (HPV) इन्फेक्शन ही हो। अगर उसे कोई दूसरा इन्फेक्शन भी है तो यह वैक्सीन तब भी कारगर है और सर्वाइकल कैंसर का डर भी दूर होता है।

ग्राफिक्स में देखिए HPV वैक्सीन की कितनी डोज लगती है:

संबंध बनाने में तेज दर्द और ब्लीडिंग सर्वाइकल कैंसर के लक्षण

HPV वायरस के कई प्रकार होते हैं। लकिन हर एचपीवी वायरस से कैंसर हो, यह जरूरी नहीं। हाई रिस्क वाले वायरस जैसे HPV 16, 18, 6 और 11 ही सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार हैं। सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती दौर में कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन यह जैसे-जैसे बढ़ता है तब संबंध बनाने के बाद बहुत दर्द होता है और ब्लीडिंग होती है।

संबंध बनाने वाली 50 से 80% महिलाओं में HPV

गायनेकोलॉजिस्ट रूमा सात्विक के अनुसार 50 से 80% सेक्शुअली एक्टिव महिलाओं में HPV देखा गया है। अधिकतर मामलों में यह तभी होता है जब महिला के एक से ज्यादा सेक्स पार्टनर रहे हों, एक ही पार्टनर हो लेकिन उसे सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन हो या पुरुष पार्टनर के एक से ज्यादा महिलाओं से संबंध हों। इसके अलावा महिला स्मोकिंग करती हो या उसकी इम्यूनिटी कमजोर हो, तो वह इस इंफेक्शन की चपेट में आ सकती है।

हर HPV पॉजिटिव महिला को कैंसर नहीं होता है। यह काफी हद तक शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करता है। अगर महिला का इम्यून सिस्टम अच्छा है तब कैंसर होने की आशंका कम होती है।

एक पार्टनर से भी मिल सकता है वायरस

डॉ. सुनीत कौर कहती हैं कि सर्वाइकल कैंसर जेनेटिक नहीं है। यह एकमात्र ऐसा कैंसर है जो पैप स्मीयर टेस्ट में पहले ही डिटेक्ट हो जाता है और यह सर्जरी के बाद पूरी तरह ठीक हो सकता है।

प्री कैंसर डिटेक्शन में शरीर के उस अंग को निकाल दिया जाता है जो अफेक्टेड है। अगर कैंसर अर्ली स्टेज में है तो यूट्रस रिमूव कर दिया जाता है। अगर कैंसर 2बी स्टेज पर पहुंच गया हो तब रेडियोथेरेपी होती है। स्टेज बढ़ने के साथ ही इसका इलाज मुश्किल हो जाता है। इसलिए HPV वैक्सीन के साथ ही पैप स्मीयर टेस्ट जरूरी है।

वैक्सीन लगवाने के बाद भी पैप स्मीयर टेस्ट कराना जरूरी

डॉ. सुनीत कौर मल्होत्रा के अनुसार एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह सेफ है। लेकिन इसके बावजूद पैप स्मीयर टेस्ट कराना जरूरी है। इस टेस्ट के जरिए गर्भाशय ग्रीवा की जांच होती है और कैंसर का पता लगाया जाता है। पैप स्मीयर टेस्ट 21- 30 साल तक 3 साल में एक बार और उसके बाद 5 साल में 1 बार करवाने की सलाह दी जाती है।

ग्राफिक्स के जरिए जानिए कैसे होती है सर्वाइकल कैंसर की जांच:

महंगी है वैक्सीन इसलिए अभी तक लोग हैं दूर

भारत में कुछ साल पहले ही HPV वैक्सीन लगाने का सिलसिला शुरू हुआ है। डॉ. सुनीत कौर मल्होत्रा के अनुसार वैक्सीन की मार्केटिंग की वजह से ही लोगों को इसके बारे में पता चला।

यह वैक्सीन बहुत पुरानी है जो विदेशों में लड़कियों को लगाई जा रही है। भारत में अब HPV वैक्सीन को इंडियन इम्यूनाइजेशन यानी भारतीय टीकाकरण योजना में डाला गया। अब जो लोग इसके बारे में पूछते हैं वो वैक्सीन जरूर लगवाते हैं। लेकिन यह केवल अपर मिडिल क्लास या उससे ऊपर की सोसायटी तक सीमित है। इसकी सबसे बड़ी वजह है इसकी कीमत। HPV वैक्सीन महंगी होने की वजह से लोग इसे लगवाने से बचते हैं।

Cervarix नाम की वैक्सीन 3299 रुपए की सिंगल डोज है। Gardasil-4 नाम की वैक्सीन की कीमत 2800 रुपए है जबकि Gardasil 9 की एक डोज 10 हजार रुपए की है।

लड़कों को भी लगती है HPV वैक्सीन, ग्राफिक्स देखिए:

दिल्ली, पंजाब और सिक्किम में पहले से मुफ्त वैक्सीन लग रही

भारत में राज्य सरकारें अपने स्तर पर स्कूल में लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन लगवा रही हैं। यह मुहिम सबसे पहले 2016 में दिल्ली सरकार ने शुरू की। इसकी डोज कक्षा 6 तक की छात्राओं को मुफ्त दी गई। 2016 से 2020 तक 11 से 13 साल की उम्र की 13 हजार लड़कियों को टीका लगाया गया।

लेकिन एक अखबार ने फरवरी 2022 में दिल्ली में 8 हजार एचपीवी टीकों के खराब होने की खबर छापी क्योंकि बच्चियों और उनके पेरेंट्स ने इसमें कोई रुचि दिखाई।

2017 में पंजाब और 2018 में सिक्किम में स्कूलों में पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के तहत इस वैक्सीन को लगाने की शुरुआत हुई। अच्छी बात यह है कि सिक्किम एकमात्र ऐसा राज्य है जहां 95% लड़कियों को HPV वैक्सीन लगी हुई है।

दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट के दिलशाद गार्डन और जनकपुरी सेंटर में 11 से 13 तक की बच्चियों को यह वैक्सीन मुफ्त लगाई जाती है।

73% महिलाएं सर्वाइकल कैंसर और वैक्सीन से अनजान

सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता फैला रही एनजीओ CAPED India ने दिसंबर 2020 में भारत के 21 शहरों में सर्वे किया। इसमें 55% लोगों ने कभी सर्वाइकल कैंसर के बारे में सुना ही नहीं था।

कई लोग सर्वाइकल कैंसर और गर्दन में होने वाले सर्वाइकल में कंफ्यूज दिखे। 73% महिलाओं को न तो इस कैंसर के बारे में सही जानकारी थी, न उन्होंने कभी पैप स्मीयर टेस्ट करवाया और न ही वैक्सीन के बारे में सुना या लगवाई। सर्वे में सामने आया कि कुल 21% महिलाओं ने ही HPV वैक्सीन लगवाई है।

सेक्शुअली ट्रांसमिटेड होने की वजह से नहीं होती सोसाइटी में बात

CAPED India की कम्यूनिकेशन एंड प्रोग्राम स्ट्रेटेजी की हेड मथांगी रामाकृष्णन ने बताया कि इस वायरस और वैक्सीन के बारे में इसलिए बात नहीं होती क्योंकि लोगों में जागरूकता नहीं है।

कुछ लोग इसके बारे में जानते हैं लेकिन बात नहीं करते क्योंकि यह सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन है। जिन लोगों को इसके बारे में पता है और पेरेंट्स हैं, वे अपने बच्चों से इस बारे में बात करने में असहज होते हैं।

कई पेरेंट्स को लगता है कि उनके बच्चों को इस HPV वैक्सीन की जरूरत नहीं है क्योंकि वो सेक्शुअली एक्टिव नहीं हैं। कुछ को यह भी डर सताता है कि अगर उनके बच्चों को ये वैक्सीन लग गई तो वो संबंध बनाने शुरू न कर दें।

देश में गायनेकोलॉजिस्ट और पीडियाट्रिशियन खुद लोगों को HPV वैक्सीन लेने की सलाह नहीं देते हैं जबकि डॉक्टरों को लड़कियों के पेरेंट्स और महिलाओं को ये वैक्सीन लेने पर जोर देना चाहिए।

सर्वाइकल कैंसर को लेकर कई मिथक हैं, ग्राफिक्स पढ़िए:

भारत में हर साल 1.25 लाख नए केस मिलते हैं

जर्नल द लैंसेट की रिपोर्ट में सामने आया कि 2020 में दुनियाभर में 6,04,127 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर पाया गया। इनमें 21% नए केस और 23% मौतें भारत से थीं। सर्वाइकल कैंसर के मामले में विश्व में भारत का चौथा स्थान है।

नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के अनुसार भारत में हर साल 1.25 लाख सर्वाइकल कैंसर के नए मामले मिलते हैं। इससे 67,477 महिलाएं अपनी जान गंवा देती हैं। 55–59 साल की उम्र की महिलाओं में यह कैंसर ज्यादा डिटेक्ट होता है।

रिपोर्ट के मुताबिक प्रति 1 लाख की दर से भारत में सर्वाइकल कैंसर के 24.3% मामले मिजोरम के आइजोल से मिले। इसके बाद 19.5% महाराष्ट्र के बार्शी और 18.9% बेंगलुरु से सामने आए।

बेटी को पार्टनर से अनचाहा वायरस न मिले, इसलिए वैक्सीन जरूरी

एक स्कूल की प्रिंसिपल ने बताया कि पेरेंट्स को यह बात समझना जरूरी है कि भविष्य में उनकी बेटी को उनके पार्टनर से अनचाहा वायरस न मिले, उन्हें सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझना न पड़े इसलिए एचपीवी वैक्सीन बहुत जरूरी है। लेकिन पेरेंट्स इस बारे में खुलकर नहीं सोच पाते। सोसायटी को इस विषय पर बात करने की सख्त जरूरत है।

ग्राफिक्स: सत्यम परिडा

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