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नींद...तेरे लिए अजब-गजब जतन:चीन में रात को पैर भिगोते हैं तो स्वीडन में पीते हैं वाल्लिंग, ग्वाटेमाला में डॉल्स के साथ सोने की परंपरा

नई दिल्ली8 महीने पहलेलेखक: ऐश्वर्या शर्मा
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कोरोना खत्म होने के कई महीने या साल बीतने के बाद भी क्या आपको नींद नहीं आती? अगर हां तो डरे नहीं। आप अकेले नहीं हैं जो इस समस्या से जूझ रहे हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो कोरोना ने नींद को प्रभावित किया है।

कोरोना ने डाला नींद पर असर

जिन लोगों को कोरोना हुआ, उनके दिमाग पर इसका असर जरूर पड़ा है। यह बात दिल्ली स्थित सर गंगाराम हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर अंशु रोहतगी ने कही। व्यक्ति की सोचने की क्षमता घटने के साथ ही नींद भी प्रभावित हुई है। कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें नींद नहीं आती। आती है तो रात को कई बार अचानक आंख खुल जाती है। बिस्तर पर लेटने के 4-5 घंटे बीत जाने के बाद भी सिर्फ करवट बदलते रहते हैं। यह लॉन्ग कोविड सिंड्रोम है।

वहीं, एक अखबार में दिल्ली के पीएसआरआई हॉस्पिटल एंड इंस्टीट्यूट ऑफ पलमोनरी, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन के चेयरमैन प्रोफेसर डॉक्टर जी. सी. खिलनानी ने दावा किया कि कोविड-19 से ठीक हुए 59% लोगों को लगातार नींद से जुड़ी परेशानी हो रही है।

एक स्टडी में पाया गया कि महिलाओं को पुरुषों से ज्यादा है नींद ना आने की समस्या।

37.9% महिलाएं हुईं प्रभावित

द इजिप्टियन जर्नल ऑफ न्यूरोलॉजी, साइकियाट्री एंड न्यूरो सर्जरी ने एक स्टडी की। इसमें कोविड-19 से ठीक हुए 500 लोगों को शामिल किया गया। इसमें पाया गया कि 59% इन्सोमिया का शिकार हुए। 37.9% महिलाएं और 26.5% पुरुषों पर इसका असर देखने को मिला। इनमें 37.9% लोगों की उम्र 36 साल से ज्यादा था।

इसलिए भी नहीं आती नींद

अगर आपको नींद नहीं आती तो हो सकता है कि आपको स्लीप एप्निया हो। इसमें नींद पूरी नहीं होती और अगर हो भी जाए तो व्यक्ति को थकान महसूस होती है। कई बार सोते समय सांस लेने में भी दिक्कत होती है।

अगर व्यक्ति तनाव में हो तब भी उसे स्लीप डिसऑर्डर हो सकता है। टेंशन होने पर शरीर में कोर्टिसोल नाम का स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाता है।

दुनिया के कई देशों में अलग-अलग तरीकों से बुलाई जाती है नींद।

चीन में फुट स्पा और सुआन जाओ रेन का लिया जाता है सहारा

भारत के पड़ोसी देश चीन में रात के समय पानी में पैर भिगोने की परंपरा है। इसके लिए एक बाथ टब, गर्म पानी, गुलाब या लैवेंडर ऑयल, सेंधा नमक, फलों के छिलके और मगवोर्ट जैसी जड़ी-बूटी की जरूरत है।

ट्रेडिशनल चाइनीज मेडिसिन के मुताबिक यह दिमाग से 'की' यानी वाइटल एनर्जी को कम करती है। यह शरीर के लिम्बिक सिस्टम को आराम देती है और दिमाग को सोने का सिग्नल पहुंचाती है। इसके अलावा सुआन जाओ रेन (चीनी भाषा) यानी बेर भी अच्छी नींद में मददगार होते हैं।

स्वीडन की यह ड्रिंक है खास

इस देश में सोने से पहले बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक वाल्लिंग पीते हैं। यह ड्रिंक ओट्स और दूध से बनता है। दूध वैसे भी अच्छी नींद लाता है। इसके अलावा इल्क का मांस भी स्वीडन में अच्छी नींद लाने के लिए पॉपुलर है। इल्क हिरण जाति का जानवर होता है। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर ने मुताबिक 100 ग्राम इल्क के मीट में 30.2 ग्राम प्रोटीन और 0.545 ग्राम ट्राइप्टोफन होता है। ट्राइप्टोफन नींद में मदद करता है।

फिनलैंड में शाम को सोना स्टीम लेने का रिवाज

उत्तरी यूरोप की नॉर्डिक परंपरा के हिसाब से फिनलैंड के लोग शाम को सोना स्टीम लेते हैं। इससे शरीर का तापमान बढ़ता है, मांसपेशियां रिलैक्स होती है जिसका नतीजा अच्छी नींद होती है।

मध्य अमेरिका में स्थित ग्वाटेमाला देश में वरी डॉल्स (Worry dolls) को अच्छी नींद के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
मध्य अमेरिका में स्थित ग्वाटेमाला देश में वरी डॉल्स (Worry dolls) को अच्छी नींद के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

जापान में इस गद्दे पर सोते हैं लोग

जापान में शिकिबूटन एक ट्रैडिशन मैट्रस यानी गद्दा होता है जो जमीन पर बिछाया जाता है। इस्तेमाल के बाद इसे आसानी से उठाया जा सकता है। अच्छी नींद के साथ-साथ इससे व्यक्ति सेहतमंद भी रहता है। यह इकोफ्रेंडली गद्दा ऊन और कॉटन से बनता हैं। इस पर सोने से रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या भी दूर होती है। जिन लोगों की पीठ में दर्द रहता है, यह उनके लिए वरदान है।