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  • PM Modi Laid The Foundation Of Indian Space Association, 20% Women In The Field Of Space In The Country, Kalpana, Who Flew Paper Plane, These 7 Women Including Sunita And Shirisha Raised The Value Of India

PM मोदी ने रखी इंडियन स्पेस एसोसिएसन की नींव:देश में स्पेस के क्षेत्र में 20% महिलाएं, बचपन में कागज का प्लेन उड़ाने वालीं कल्पना, सुनीता और शिरीषा समेत इन 7 महिलाओं ने बढ़ाया भारत का मान

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: दिनेश मिश्र
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स्पेस में महिलाएं। - Dainik Bhaskar
स्पेस में महिलाएं।
  • साइंटिफिक एंड टेक्निकल कैटेगरी में कुल 12,300 वैज्ञानिक हैं, जिसमें से करीब 1890 महिलाएं
  • अंतरिक्ष विभाग में प्रशासनिक कैटेगरी में कुल 4602 लाेग हैं, जिसमें से 1262 महिलाएं हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को इंडियन स्पेस एसोसिएशन की शरुआत की। उन्होंने कहा, हमारा स्पेस सेक्टर 130 करोड़ देशवासियों की प्रगति का बड़ा जरिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो की 2016-17 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अंतरिक्ष विभाग में साइंटिफिक एंड टेक्निकल कैटेगरी में कुल 12,300 वैज्ञानिक हैं, जिसमें से करीब 1890 महिलाएं हैं। वहीं, विभाग में प्रशासनिक कैटेगरी में कुल 4602 लाेग हैं, जिसमें से 1262 महिलाएं हैं। इन्हें मिलाकर देश के स्पेस डिपार्टमेंट में कुल 15,881 लोग काम करते हैं, जिसमें से करीब 20 फीसदी पदों का प्रतिनिधित्व महिलाएं करती हैं। इसरो के पूर्व वैज्ञानिक विनोद कुमार श्रीवास्तव भी कहते हैं कि स्पेस मिशनों में महिलाओं की भूमिका दिनोंदिन बढ़ रही है। अब महिलाओं को स्पेस बतौर कॅरियर भाने लगा है। वैसे भी स्पेस में जीरो ग्रैविटी से महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की आंखों पर ज्यादा असर पड़ता है। आइए, जानते हैं कि कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स और शिरीषा बांदला समेत भारत से जुड़ीं उन महिलाओं के बारे में, जिन्होंने देश और दुनिया में हमारा मान बढ़ाया है।

कल्पना चावला: 1997 में पहली भारतीय महिला जो गईं अंतरिक्ष
कल्पना चावला बचपन से ही प्लेन उड़ाने का सपना देखा करती थीं। कागज का प्लेन कब उनकी जिंदगी बन गया, उन्हें पता ही नहीं चला। वह 1997 में भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री बनीं, जो स्पेस में गईं। 1982 में हरियाणा के करनाल में जन्मी कल्पना ने एयरोनॉटिकल इंजीनियिरंग में पढ़ाई की थी। वह 1988 में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा से जुड़ीं। 2003 में अमेरिकी स्पेस शटल कोलंबिया की मिशन स्पेशलिस्ट कल्पना अपने छह सहकर्मियों के साथ अंतरिक्ष के सफर से धरती पर लौट रही थीं, जब उनका यान लैंड होने से ठीक 15 मिनट पहले हादसे का शिकार हो गया। कल्पना समेत सभी सातों अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई।

कल्पना चावला।
कल्पना चावला।

सुनीता विलियम्स: 195 दिन तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में रहीं
कल्पना चाचला के बाद सुनीता विलियम्स दूसरी ऐसी भारतीय मूल की महिला रहीं, जो अंतरिक्ष में गईं। उनकी पहली उड़ान 2006 में रही, जब वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 195 दिन बिताकर सकुशल लौटीं। वह 2012 में ISS पर फ्लाइट इंजीनियर भी रहीं। 2015 में वह नासा के कमर्शियल क्रू प्रोग्राम के लिए चुनी गईं। वह कहती हैं स्पेस में हम सभी धरती वासी हैं। गुजरात के मेहसाणा से ताल्लुक रखने वालीं सुनीता को भारत के समोसे बेहद पसंद हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमेरिकी नौसेना से की थी।

सुनीता विलियम्स।
सुनीता विलियम्स।

शिरीषा बांदला: सब ऑर्बिटल में गईं, स्पेस टूरिज्म के लिए खोली राह
इसी साल 11 जुलाई को साइंटिस्ट शिरीषा बांदला कल्पना और सुनीता के बाद भारतीय मूल की तीसरी महिला बन गईं, उन्होंने अंतरिक्ष में जाकर इतिहास रचा। आंध्र प्रदेश के गुंटूर में जन्मीं बांदला पहले नासा में काम करना चाहती थीं, मगर आंखों मंें दिक्कत की वजह से स्पेस एजेंसी में उन्हें काम करने का मौका नहीं मिला। इसके बाद वह कंपनी वर्जिन गैलेक्टिक में वाइस प्रेसीडेंट बनीं। उन्होंने कंपनी के संस्थापक रिचर्ड ब्रॉन्सन के साथ न्यू मैक्सिको से कंपनी की पहली सब ऑर्बिटल टेस्ट फ्लाइट पूरी की। बांदला की भूमिका एक रिसर्चर एक्सपीरियंस की थी। स्पेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए की गई इस उड़ान ने कई और निजी कंपनियों के लिए दरवाजे खोले हैं।

शिरीषा बांदला।
शिरीषा बांदला।

स्वाति मोहन: साइंस फिक्शन देखकर स्पेस एक्सप्लोरेशन को बनाया बना करियर
भारतीय-अमेरिकी एयरोस्पेस इंजीनियर डॉ. स्वाति मोहन ने नासा के मार्स मिशन, 2020 में गाइडेंस, नैविगेशन और कंट्रोल ऑपरेशंस की अगुवाई की थी। वह नासा की जेट प्रपल्शन लेबोरेटरी में सुपरवाइजर हैं। बेंगलुरु में जन्मीं स्वाति 9 साल की उम्र से स्पेस के प्रति तब आकर्षित हो गई थीं, जब वह अमेरिकी साइंस फिक्शन स्टार ट्रेक देखा करती थीं। शुरुआत में वह पीडियाट्रीशियन बनना चाहती थीं, मगर 16 साल की उम्र में उन्होंने तय किया कि वह स्पेस एक्सप्लोरेशन में अपना करियर बनाएंगी। स्वाति मार्स से पहले शनि ग्रह पर नासा के कैसिनी मिशन के लिए काम कर चुकी हैं।

स्वाति मोहन।
स्वाति मोहन।

प्रियंका श्रीवास्तव: कल्पना की खबर टीवी पर देखी तभी स्पेस साइंटिस्ट बनने की ठानी
लखनऊ निवासी प्रियंका श्रीवास्तव ने पंजाब विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार में बीटेक किया। उन्होंने स्पेस को करियर बनाने की तब सोची, जब टीवी पर चावला के अंतरिक्ष मिशन की खबर देखी और अंतरिक्ष यात्री बनने का सपना देखा। वह उन नौ भारतीयों में से थीं, जब इसी साल नासा के प्रीजर्वेशन रोवर की कामयाबी के साथ लैंडिंग कराई। वह मिशन में सिस्टम इंजीनियर के रूप में रही थीं।

प्रियंका श्रीवास्तव।
प्रियंका श्रीवास्तव।

जैनब नागिन कॉक्स: टीवी सीरीज देखकर बनाया कॅरियर, एस्टरॉयड का नाम इन्हीं पर
बेंगलुरु में जन्मीं जैनब नागिन कॉक्स नासा की जेट प्रपल्शन लेबोरेटरी में स्पेसक्रॉफ्ट ऑपरेशंस इंजीनियर हैं। वह मार्स, 2020 मिशन में इंजीनियरिंग टीम की डिप्टी टीम लीड रही हैं। 2015 में उनके नाम पर एस्टरॉयड 14061 का नाम नागिनकॉक्स रखा गया। उन्हें दो बार नासा का एक्सेपशनल सर्विस मेडल मिल चुका है। धरती पर रहते हुए उन्होंने मार्स मिशन के लिए कई दफा काम किया है। अमेरिकी साइंस डॉक्युमेंट्री टीवी सीरीज कॉस्मॉस: ए स्पेसटाइम ओडिसी देखकर मन में स्पेस को कॅरियर बनाने की चाहत जगी। कॉक्स ने अमेरिका के एयरफोर्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से 1990 में मास्टर की डिग्री ली।

जैनब नागिन कॉक्स।
जैनब नागिन कॉक्स।

योगिता शाह: नासा में इंजीनियर बनकर पापा का सपना किया पूरा, भेदभाव भी सहा
नासा की जेट प्रपल्शन लेबोरेटरी में फ्लाइट सिस्टम इंजीनियर योगिता शाह ने मार्स, 2020 मिशन में अहम भूमिका निभाई। योगिता ने औरंगाबाद के गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज से नासा तक लंबा और चुनौतियों भरा सफर तय किया है। वह उस टीम का हिस्सा रही हैं जिसने मंगल ग्रह तक सफलतापूर्वक एक रोवर पहुंचाया। उनके पापा चाहते थे एक बेटा हो जो बड़ा होकर इंजीनियर बने। बेटा तो नहीं हुआ, मगर उनकी बेटी योगिता ने पिता का यह सपना पूरा किया। 2005 में जब उन्होंने मिलिट्री कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर ज्वाइन किया तो उनका कोई खास स्वागत नहीं हुआ। यहां तक कि योगिता को अपनी राष्ट्रीयता को लेकर भेदभाव का भी सामना करना पड़ा। हालांकि, बाद में उनकी कामयाबी को दुनिया ने सलाम किया।

योगिता शाह।
योगिता शाह।