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भारत की महिला को मिला शिक्षा का सबसे बड़ा पुरस्कार:अब तक नौ लोगों ने जीता पुरस्कार, इसमें से पांच महिलाएं, बच्चों की कहानियां लिखने वाली रुक्मिणी ने जीता यिदान पुरस्कार, मिलेंगे 28 करोड़ रुपये

नई दिल्ली2 महीने पहले
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यिदान पुरस्कार 2021 विजेता रुक्मिणी बनर्जी और प्रोफेसर एरिक ए हनुशेक - Dainik Bhaskar
यिदान पुरस्कार 2021 विजेता रुक्मिणी बनर्जी और प्रोफेसर एरिक ए हनुशेक

भारतीय शिक्षाविद रुक्मिणी बनर्जी को शिक्षा के क्षेत्र में दिए जाने वाला सबसे बड़ा पुरस्कार यिदान प्राइज मिला है। रुक्मिणी ने 2021 का यिदान पुरस्कार अपने नाम किया है। इस पुरस्कार के लिए 130 देशों के शिक्षाविदों और रिसर्चर ने आवेदन किया था। रुक्मिणी के अलावा शिक्षा में रिसर्च के लिए अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एरिक ए हनुशेक को भी यह अवॉर्ड मिला है।

अमेरिका से लौटकर किया बच्चों के लिए काम

रुक्मिणी बनर्जी मूल रूप से बिहार की रहने वाली हैं। दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन की डिग्री ली। दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से मास्टर किया। फिर साल 1991 में पीएचडी के लिए शिकागो यूनिवर्सिटी गईं। पीएचडी पूरी करने के बाद अपने देश वापस लौटीं और ग्रामीण बच्चों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में काफी काम किया। हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही अखबारों के लिए कॉलम लिखती रही हैं। इसके अलावा वह बच्चों के लिए कहानी लिखती हैं। साल 2015 से वह गैर सरकारी संगठन प्रथम की सीईओ हैं। उन्हें बिहार सरकार की तरफ से शिक्षा के क्षेत्र में दिया जाने वाला मौलान अबुल कलाम पुरस्कार भी मिल चुका है रुक्मिणी मौलान अबुल कलाम पुरस्कार की पहली विजेता हैं।

100 दिन में 6 लाख बच्चों का पता लगाया

रुक्मिणी और उनकी टीम ने 100 दिनों में भारत के 6 लाख बच्चों और उनके परिवार के हालात का अध्ययन किया। इसमें उन बच्चों की पहचान की गई जो कई साल से स्कूल तो जा रहे थे लेकिन उनको गणित के मामूली सवाल भी हल करने नहीं आते थे। इसके बाद उन्होंने भारत के आधे से ज्यादा राज्यों की सरकारों के साथ मिलकर एक कार्यक्रम तैयार किया। इसमें बच्चों को सही तरीके से सही चीज पढ़ाने पर जोर दिया गया। इनकी संस्था का नारा है- हर बच्चा स्कूल में रहे और अच्छे से सीखे।

अब तक नौ लोगों को मिला पुरस्कार, पांच महिलाएं
यिदान प्राइज फाउंडेशन की शुरुआत साल 2016 में हुई। इसकी शुरुआत चीन के समाज सेवी और उद्यमी चेन यिदान ने की। चेन यिदान को लोग चार्ल्स चेवन के नाम से भी जानते हैं। यह पुरस्कार एजुकेशन डेवलपमेंट और एजुकेशन रिसर्च जैसी दो कैटेगरी में दिया जाता है। प्राइज जीतने वाले को बतौर प्राइज मनी करीब 28 करोड़ रुपये की राशि दी जाती है। 2017 से अब तक नौ लोगों को यिदान पुरस्कार मिला है, जिनमें पांच महिलाएं शामिल हैं।

देश में लड़कियों का स्कूल छोड़ना चिंता की बात

इसी साल फरवरी में महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) मंत्रालय की तरफ से जारी रिपोर्ट के अनुसार प्राइमरी के बाद 17.3 फीसदी लड़कियां पढ़ाई छोड़ देती हैं। वहीं प्राइमरी स्तर पर 4.74 फीसदी लड़कियां स्कूल जाना बंद कर देती हैं। बिहार, असम, कर्नाटक, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा वो राज्य हैं, जहां की लड़कियों में सबसे ज्यादा ड्रॉप आउट है।

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