ऐप पर लड़कियों की ‘बोली’:तस्वीर पर 5-21 रुपए तक लगाए दाम, डाउनलोड करते वक्त रीड मैसेज, लोकेशन और वॉयस नोटिफिकेशन न करें Allowed

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: राधा तिवारी
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  • महिलाओं को सोशल मीडिया पर सतर्क रहना जरूरी
  • साइबर क्राइम को लेकर कई नए कानून
  • अपराध की ऑनलाइन भी कर सकते हैं शिकायत

सोशल मीडिया ऐप 'क्लबहाउस' का एक ऑडियो ट्विटर पर वायरल है। इसमें लड़कियों की तस्वीर पर बोली लगाई जा रही है। अभद्र टिप्पणी करते हुए एक व्यक्ति कहता है कि यह लड़की पंद्रह रुपये की है, दूसरा उसी तस्वीर पर कॉमेंट करता है, “ओए पांच रुपए की”, तीसरा कहता है, “इतनी महंगी नहीं है। क्लब हाउस के उसी ‘रूम’ से जुड़ा हुआ एक और शख्स कहता है, “मैं इक्कीस दे रहा हूं, तुम लोगों के पास पैसे नहीं हैं।”

ट्रोलिंग आज हमारी जिंदगी का हिस्सा है। सोशल मीडिया अकाउंटट् वेरिफिकेशन न होने के कारण अभद्र और अश्लील भाषा का इस्तेमाल भी अकसर देखने को मिलता है।
ट्रोलिंग आज हमारी जिंदगी का हिस्सा है। सोशल मीडिया अकाउंटट् वेरिफिकेशन न होने के कारण अभद्र और अश्लील भाषा का इस्तेमाल भी अकसर देखने को मिलता है।

क्या है क्लब हाउस चैट
क्लब हाउस सोशल नेटवर्किंग ऐप है जो ऑडियो चैट पर आधारित है। मार्च 2020 में इसे आई फोन पर उपलब्ध कराया गया था। बाद में एंड्रायड यूजर्स को ये सुविधा मिलने लगी। यह एक इनवाइट ऐप है और इसे यूजर गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं।

क्लब हाउस सोशल नेटवर्किंग ऐप है जो ऑडियो चैट पर आधारित है।
क्लब हाउस सोशल नेटवर्किंग ऐप है जो ऑडियो चैट पर आधारित है।

‘टीम साथ’ ने ट्वीट कर जताई आपत्ति
ऑनलाइन ट्रोलिंग और हैरेसमेंट के खिलाफ काम करने वाली संस्था ‘टीम साथ’ ने इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए सख्त आपत्ति जताई। उन्होंने क्लबहाउस के सह-संस्थापक रोहन सेठ से सीधे सवाल किए। रोहन सेठ को टैग कर के पूछा,“क्या महिलाओं की नीलामी, उनके शरीर पर हो रही भद्दी टिप्पणियों, और अश्लील व्यवहार के लिए आपका प्लेटफॉर्म खुला हुआ है? आपकी चुप्पी इस बात की निशानी है कि आप इसे स्वीकार कर रहे हैं।”

इस मुद्दे पर कई संस्था ने ट्वीट करते हुए सख्त आपत्ति जताई ।
इस मुद्दे पर कई संस्था ने ट्वीट करते हुए सख्त आपत्ति जताई ।

प्रियंका चतुर्वेदी ने जताई नाराजगी
टीम साथ के ट्वीट के बाद राज्य सभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार की नजरअंदाजी को ऐसे व्यवहार का दोषी बताया। प्रियंका ने लिखा, “क्योंकि भारत सरकार ने सुल्ली डील्स मामले को नजरअंदाज किया, इसलिए को ऑब्जेक्टिफाइड करने के नए नए तरीके देखने को मिल रहे हैं।”

टीम साथ के ट्वीट के बाद राज्य सभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार की नजरअंदाजी को ऐसे व्यवहार का दोषी बताया।
टीम साथ के ट्वीट के बाद राज्य सभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार की नजरअंदाजी को ऐसे व्यवहार का दोषी बताया।

हर साल अपराध में बढ़त
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की 2020 (NCRB)की रिपोर्ट के अनुसार देश भर में जहां 2019 में साइबर अपराध के 44,735 मामले दर्ज किए गए थे, 2020 में ऐसे मामले 50,035 पर पहुंच गए। यह 11.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।

साइबर क्राइम पर लगाम लगाने के लिए कई कानून
सोशल मीडिया एक्सपर्ट मनोज दुग्गल कहते हैं कि सोशल मीडिया और ओटीटी के लिए बनाए गए दिशा निर्देश के अनुसार, डाटा प्रोटेक्शन बिल के आने के बाद काफी बेहतरी और सुधार की संभावना है। नई गाइडलाइन में कई चीजें अच्छी हैं, लेकिन कई चीजों पर अब भी काम बाकी है। सरकार गाइड कर रही है ताकि फेक न्यूज, अफवाह और साइबर क्राइम पर लगाम लगाई जा सके।

डाटा प्रोटेक्शन बिल के आने के बाद काफी बेहतरी और सुधार की संभावना है। नई गाइडलाइन में कई चीजें अच्छी हैं, लेकिन कई चीजों पर अब भी काम बाकी है।
डाटा प्रोटेक्शन बिल के आने के बाद काफी बेहतरी और सुधार की संभावना है। नई गाइडलाइन में कई चीजें अच्छी हैं, लेकिन कई चीजों पर अब भी काम बाकी है।

नए नियम से मिलेंगे कई फायदे
नए आईटी नियमों के मुताबिक, देश में सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए नए साइबर इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) नियम लागू हो चुके हैं। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ग्रीवांस ऑफिसर को रखना जरूरी हो गया है। कंपनियों को ग्रीवांस ऑफिसर की पूरी डिटेल और उनसे कांटेक्ट करने का तरीका स्पष्ट तौर पर बताना होगा। यानी ऑफिसर का कॉन्टैक्ट नंबर, शिकायत करने की प्रोसेस बतानी होगी।

15 दिनों में होगी कार्रवाई
जब कोई यूजर शिकायत करता है तब अधिकारी को 24 घंटे के अंदर शिकायत मिलने की पुष्टि करनी होगी। शिकायत मिलने के 15 दिन के अंदर उसका समाधान करना होगा। यदि किसी कंटेंट पर यूजर ने आपत्ति दर्ज कराई है, तो उसे 36 घंटे के अंदर उस प्लेटफार्म से हटाना होगा। वहीं, पोर्नोग्राफी और न्यूडिटी वाला कंटेंट 24 घंटे के अंदर हटाना होगा। नई गाइडलाइन का फायदा यह होगा कि किसी क्राइम के मामले में जल्दी डिटेल मिलेगी और फिर तेजी से कार्रवाई भी होगी।

नई गाइडलाइन का फायदा यह होगा कि किसी क्राइम के मामले में जल्दी डिटेल मिलेगी और फिर तेजी से कार्रवाई भी होगी।
नई गाइडलाइन का फायदा यह होगा कि किसी क्राइम के मामले में जल्दी डिटेल मिलेगी और फिर तेजी से कार्रवाई भी होगी।

मैसेजिंग ऐप पर लगाम लगाना थोड़ा मुश्किल
सोशल मीडिया या ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए किसी यूजर को लॉग इन करने के लिए सबसे पहले अकाउंट का वेरिफिकेशन करना होता है। जिसमें उसकी उम्र, फोन नम्बर और नाम डालना होता है। इससे उस अकाउंट का वेरिफिकेशन होता है। इससे यह फायदा है कि जब भी किसी तरह की कोई शिकायत होगी तो हम उस अकाउंट होल्डर को जल्दी से जल्दी पकड़ लेंगे।

भारत में इंटरनेट मौलिक अधिकार के दायरे में नहीं आता
एक्सपर्ट कहते हैं कि मैसेजिंग ऐप में लगाम लगाना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि तमाम मैसेजिंग एप एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड हैं। ऐसे में सरकार के आदेश के बाद इन एप को एंक्रिप्शन को तोड़ना होगा, तभी किसी यूजर्स की डिटेल मिलेगी।

एक गलती बन सकती है मुसीबत
कोई भी ऐप डाउनलोड करने पर अलाउ टू रीड मैसेज, लोकेशन ऐंड वॉइस का नोटिफिकेशन आता है। इसे कभी अलाउड न करे। इस नोटिफिकेशन को हमेशा डिनाई करें। बहुत सारे ऐसे ऐप्स होते हैं जिसमें ऑटोमैटिक कैमरा, वाईस रिकॉडर ऑन हो जाता है। इसकी जानकारी हमें नहीं होती है और कई बार हम मुसीबत में फंस जाते हैं।

पोर्नोग्राफी और न्यूडिटी वाला कंटेंट 24 घंटे के अंदर हटाना होगा। नई गाइडलाइन का फायदा यह होगा कि किसी क्राइम के मामले में जल्दी डिटेल मिलेगी और फिर तेजी से कार्रवाई भी होगी।
पोर्नोग्राफी और न्यूडिटी वाला कंटेंट 24 घंटे के अंदर हटाना होगा। नई गाइडलाइन का फायदा यह होगा कि किसी क्राइम के मामले में जल्दी डिटेल मिलेगी और फिर तेजी से कार्रवाई भी होगी।

वर्तमान में आईटी एक्ट के तहत सजा के प्रावधान
पटियाला हाउस कोर्ट के वकील महमूद आलम का कहना है कि कानून में किसी की निजता का हनन जैसे-अश्लील फोटो अपलोड और कमेंट करने पर 3 साल से 7 साल तक सजा और जुर्माना के प्रावधान है। इसके अलावा ऑनलाइन प्रताड़ित और पोर्नोग्राफी देखने पर 5 साल से 7 साल तक की सजा और जुर्माना के प्रावधान है। सोशल साइट्स किसी अभद्र कॉन्टेंट पर कमेंट करने पर 5 साल तक के सजा और जुर्माना का प्रावधान है।

पटियाला हाउस कोर्ट के वकील महमूद आलम
पटियाला हाउस कोर्ट के वकील महमूद आलम

वकील कहते हैं कि महिलाओं के साथ अगर बुलिंग होने पर सेक्शन 509 लगता है। इसके अलावा महिलाओं के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने पर सेक्शन 66 ए का क्लॉज बी लगता है। ये कानून इंटरनेट से जुड़े कानूनों का हिस्सा है। इनमें तीन साल तक की सजा होती है। फर्जी अकाउंट बनाने या दूसरे के अकाउंट के साथ छेड़छाड़ करने पर 3 साल की सजा और जुर्माना के प्रावधान है।

ऑनलाईन शिकायत की भी सुविधा
अगर आपके पास कोर्ट जाने का समय नहीं है तो आप आईटी एक्ट के अनुसार cybercrime.gov. In पर ऑनलाइन भी कंप्लेन कर सकते हैं। इसे साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल नाम दिया गया है। वेबसाइट पर साइबर अपराध, ठगी, चाइल्ड पोर्नोग्राफी और रेप जैसी घटनाओं की शिकायत दर्ज करवाई जा सकती हैं। किसी अपराध की ऑनलाइन शिकायत के बाद गृह मंत्रालय से मामला जांच के लिए प्रदेश पुलिस को भेजा जाएगा। सबसे पहले cybercrime. gov. in वेबसाइट ओपन करें। वेबसाइट खुलने के बाद Report anonymously पर क्लिक करें। कैटेगरी ऑफ क्राइम को सेलेक्ट करने के बाद सस्पेक्ट (जिस पर संदेह) के नाम, घटना की डिटेल, सस्पेक्ट के खिलाफ एविडेंस अपलोड करें और शिकायत सबमिट कर दें।

अगर आपके पास कोर्ट जाने का समय नहीं है तो आप आईटी एक्ट के अनुसार cybercrime.gov. In पर ऑनलाइन भी कंप्लेन कर सकते हैं।
अगर आपके पास कोर्ट जाने का समय नहीं है तो आप आईटी एक्ट के अनुसार cybercrime.gov. In पर ऑनलाइन भी कंप्लेन कर सकते हैं।

वेबसाइट पर शिकायत करने के बाद आपको एक नंबर मिलेगा। इस नंबर के आधार पर आपकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई, इससे ट्रैक भी किया जा सकता है। इसके लिए वेबसाइट पर रिपोर्ट एंड ट्रैक बटन पर क्लिक करना होगा। वेबसाइट पर पहचान जारी किए बगैर भी शिकायत की जा सकती है।

  • इंटरनेट इस्तेमाल करते समय अपनी निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ शेयर न करें।
  • अनजान लोगों से इंटरनेट पर बातचीत न करें।
  • किसी भी प्रकार का पासवर्ड कभी किसी से शेयर न करें।
  • अंजान लोगों के ई-मेल का जवाब न दें।

शिकायत करने के कई विकल्प
कंपनी के आधिकारिक पेज के मुताबिक, अगर आपको कोई सर्विस सही नहीं लग रही है या कोई आपत्तिजनक कंटेंट दिखा है तो आप support। google। com/legal/troubleshooter/1114905 पर शिकायत कर सकते हैं। वहीं, शिकायत के लिए support। google। com/youtube/answer/10728153 पर भी जा सकते हैं। 1800-419-0157 नंबर पर भी कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा आप सुबह 7 बजे से लेकर रात 8 बजे तक 1800-212-8552 नंबर पर कॉल कर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। वहीं, ग्रीवांस ऑफिसर तक पोस्ट भेजकर भी अपनी शिकायत पहुंचाई जा सकती है।

आप सुबह 7 बजे से लेकर रात 8 बजे तक 1800-212-8552 नंबर पर कॉल कर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। वहीं, ग्रीवांस ऑफिसर तक पोस्ट भेजकर भी अपनी शिकायत पहुंचाई जा सकती है।
आप सुबह 7 बजे से लेकर रात 8 बजे तक 1800-212-8552 नंबर पर कॉल कर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। वहीं, ग्रीवांस ऑफिसर तक पोस्ट भेजकर भी अपनी शिकायत पहुंचाई जा सकती है।

हौसला बढ़ाने के लिए हो रहे कई वर्कशॉप
साइकोलोजिस्ट बिंदा सिंह कहती हैं कि हमारे यहां ऐसे केस में जब पेरेंट्स अपने बच्चों को लेकर आते हैं तो बच्चे और बच्चियां इतने डरे हुए होते हैं कि वह उस घटना के शेयर करने में भी डरते हैं। ज्यादातर केस में देखने को मिलता है कि महिलाओं की फेक आईडी बनाकर उनके फोटो को पोर्न वेबसाइट पर उनके नाम के साथ डाले जाते हैं। ऐसे केस में काउंसल करना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि पीड़ित को यह लगता है कि उसका सब कुछ बर्बाद हो गया। वह कई दिन तक कुछ बात ही नहीं करती बस हमारी बातें सुनती हैं और चली जाती हैं। कई बच्चे डिप्रेशन में जाकर आत्महत्या तक कर लेते हैं। कई बार पूरा परिवार ऐसे मामले के बाद डिप्रेशन में चला जाता है। पीड़ित महिलाओं को हौसला बढ़ाने के लिए कई तरह के वर्कशॉप किए जाते हैं ताकि उन्हें सही तरीके से समझाया जा सके। कई तरह के सरकारी संस्था भी है जो ऐसे लोगों की मदद करती हैं।

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