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प्यार का पोस्टमॉर्टम-5:DU की वो छात्रा, जिसने राष्ट्रपति भवन में काम करने वाले लड़के से की शादी, तीन दिन बाद ही मिली दर्दनाक मौत

नई दिल्ली5 महीने पहलेलेखक: दीप्ति मिश्रा
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प्यार का पोस्टमॉर्टम की पांचवीं सीरीज में आज कहानी देश की राजधानी दिल्ली के अभिषेक सेठ और भावना यादव की है। पसंद का हमसफर चुनने के चलते अपनों ने बेटी का गला घोंट दिया। आइए, शुरू करते हैं...

दिल्ली के अभिषेक सेठ राष्ट्रपति भवन में बतौर असिस्टेंट प्रोग्रामर काम करते थे। 21 साल की भावना यादव दिल्ली यूनिवर्सिटी के वेंकटेश्वर कॉलेज में पढ़ती थीं। दोनों की किसी काम के सिलसिले में मुलाकात हुई। अभिषेक और भावना को एक-दूसरे का साथ रास आने लगा। छोटी-छोटी बातों पर साथ हंसने लगे। कभी मेट्रो तो कभी पार्क में बैठकर भविष्य के ख्वाब बुनने लगे। एक रूठ जाता तो दूसरा मना लेता। मोहब्बत की गाड़ी रफ्तार से दौड़ रही थी।

बेटी को वापस ले जाने के लिए रचा षड्यंत्र
बात नवंबर, 2014 की है। भावना के घर वालों को दोनों के प्रेम की भनक लग चुकी थी। उन्होंने अलवर जिले के गांव अकबरपुर में भावना का रिश्ता तय कर दिया। 22 नवंबर, 2014 सगाई की तारीख तय की गई। इससे पहले, 12 नवंबर को अभिषेक और भावना ने आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली। अभिषेक के घर वाले राजी थे, लेकिन भावना के अपनों को इससे नाराजगी थी। उन्हें दूसरी बिरादरी में रिश्ता कतई मंजूर नहीं था। भावना के माता-पिता समझ गए कि अब बेटी दामाद को समझा-बुझाकर अलग करना नामुमकिन है। इसलिए उन्होंने बेटी को अपने साथ ले जाने के लिए षड्यंत्र रचा। समाज के सामने धूमधाम से शादी कराकर विदाई करने का वादा किया।

शादी के बाद अभिषेक सेठ और भावना यादव। 12 नवंबर को दोनों ने दिल्ली के एक आर्य समाज मंदिर में शादी की थी।
शादी के बाद अभिषेक सेठ और भावना यादव। 12 नवंबर को दोनों ने दिल्ली के एक आर्य समाज मंदिर में शादी की थी।

पिता बोले- बेटी की शादी को लेकर हमारे भी कुछ अरमान
अभिषेक सेठी बताते हैं, ‘हम दोनों ने आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली। शादी के बाद मैंने अपने और भावना ने अपने परिवार को फोन पर जानकारी दी। थोड़ी देर बाद भावना के परिवार वाले मेरे घर आ गए। भावना के पिता जगमोहन यादव पेशे से प्रॉपर्टी कंसल्टेंट थे। उन्होंने अपनी पत्नी सावित्री देवी के साथ मेरे परिवार वालों से बात की। उन्होंने कहा कि हम दोनों की धूमधाम से शादी करना चाहते हैं। समाज के सामने गाजे-बाजे के साथ भावना की डोली मेरे आंगन से उठेगी। आखिर समाज में हमारी भी तो इज्जत है। भावना की शादी को लेकर हमारे भी कुछ अरमान हैं। इसलिए, मैं अपनी बेटी को अपने साथ ले जाना चाहता हूं।'

मामा लाखन ने दी अभिषेक को जान से मारने की धमकी
इसके बाद ताजा सास बनी भारती सेठी और अभिषेक ने खुशी-खुशी भावना को उसके घर जाने दिया। 13 नवंबर को भावना की पति अभिषेक से बात हुई। एक दिन बाद, भावना के मामा लाखन सिंह यादव ने फोन पर अभिषेक को धमकी दी। लाखन ने कहा, 'भूल जा, यह शादी ​​कभी नहीं होगी। हम भावना की शादी अपने समाज में करेंगे। अगर मेरी बेटी से मिलने की कोशिश की तो जान से मार दूंगा।'

भावना ने हड़बड़ाते हुए किया था कॉल, यहां कुछ ठीक नहीं
लाखन सिंह के धमकी देने के थोड़ी देर बाद भावना का कॉल आया। उसने हड़बड़ाते हुए अभिषेक से कहा, 'यहां कुछ ठीक नहीं लग रहा है। मैं द्वारका मोड़ पहुंच रही हूं। मुझे लेने आ जाओ।' अभिषेक द्वारका मोड़ पहुंचे और भावना को अपने घर ले आए। शाम को भावना के मम्मी-पापा, मामा दो और लोगों के साथ अभिषेक के घर पहुंचे, जहां फिर से भावना के पापा ने इमोशनल कार्ड खेला। जगमोहन ने कहा- अब भावना हमारे साथ रहना नहीं चाहती है तो ठीक है। 16 नवंबर का मुहूर्त सही है। आप लोग मेरे यहां आइए और चुन्नी चढ़ाकर भावना को ले जाइएगा। इसके बाद भावना देर रात अपने मम्मी-पापा के साथ घर लौट गई।

अभिषेक सेठ और भावना यादव। भावना को अपने साथ ले जाने के लिए पिता ने कहा था कि समाज के सामने गाजे-बाजे के साथ भावना की डोली मेरे आंगन से उठेगी। आखिर समाज में हमारी भी तो इज्जत है।
अभिषेक सेठ और भावना यादव। भावना को अपने साथ ले जाने के लिए पिता ने कहा था कि समाज के सामने गाजे-बाजे के साथ भावना की डोली मेरे आंगन से उठेगी। आखिर समाज में हमारी भी तो इज्जत है।

‘जगमोहन गांव ले जाकर लाश जला रहा है...’ और फोन कट गया
फिर अभिषेक की पत्नी भावना से बात नहीं हुई। वह लगातार कॉल ट्राई करता रहा, लेकिन उधर से फोन नहीं उठा। उसे भावना की फिक्र हो रही थी, लेकिन सोचा- कल तो उसके घर जाना ही है। 16 नवंबर सुबह 9 बजे भावना के चचेरे भाई सचिन का कॉल आया। सचिन ने बताया- 'जगमोहन लाश गांव ले जाकर जला रहा है…' और फोन कट गया। अभिषेक बिना देर किए द्वारका नॉर्थ के भारत नगर स्थित भावना के घर पहुंचे, जहां दरवाजे पर लटके हुए ताले ने मानो उनकी जान निकाल दी। दौड़ते हुए पुलिस स्टेशन पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। शुरुआत में तो पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई, लेकिन शाम को FIR दर्ज जांच शुरू कर दी। एक टीम जगमोहन के गांव भेजी गई।

बिना रीति-रिवाज के कर दिया अंतिम संस्कार
पुलिस की टीम ने गांव के लोगों से पूछताछ की। इससे पता चला कि जगमोहन 16 नवंबर की सुबह 6:30 बजे बेटी के शव को गांव लेकर आया। पास के एक झाड़-पूछ करने वाले बाबा के पास ले गया, जहां उसने भावना की नब्ज देखकर मौत की पुष्टि की। 10 बजे बिना किसी रीति-रिवाज के गोबर के उपलों की चिता बनाकर अंतिम संस्कार कर दिया। न किसी पुजारी को बुलाया और न किसी रिश्तेदार के आने का इंतजार किया। गांव वालों को उस वक्त शक हुआ, जब जगमोहन और उसकी पत्नी दिल्ली लौटने लगे। उन लोगों ने जगमोहन को रोका- 'जवान बेटी मरी है। शोक में कामकाज नहीं किया जाता।' लेकिन जगमोहन नहीं रुका और पत्नी सावित्री के साथ दिल्ली लौट आया।

भावना मर्डर केस की जांच टीम को लीड करने वाली दिल्ली पुलिस की डिप्टी कमिश्नर सुमन गोयल बताती हैं, 'भावना के माता-पिता उस पर किसी दूसरे लड़के से सगाई करने के लिए दबाव बना रहे थे। इस बात पर 15 नवंबर देर रात भावना की अपने माता-पिता से बहस हुई। भावना ने कहा था, मैं कानूनन शादीशुदा हूं। अगर आप लोगों ने जबरदस्ती की तो अदालत में जाऊंगी। यह सुनकर जगमोहन और उसकी पत्नी आपा खो बैठे। पहले बेटी की पिटाई की। फिर जगमोहन ने भावना के पैर पकड़े और सावित्री ने गला घोटकर मार दिया।'

भावना यादव। भावना के गांव वालों को तब शक हुआ, जब बिना किसी रिश्तेदार, परिचित का इंतजार किए ही जगमोहन ने बेटी का अंतिम संस्कार कर दिया और शाम को ही दिल्ली लौट गया।
भावना यादव। भावना के गांव वालों को तब शक हुआ, जब बिना किसी रिश्तेदार, परिचित का इंतजार किए ही जगमोहन ने बेटी का अंतिम संस्कार कर दिया और शाम को ही दिल्ली लौट गया।

हत्या के बाद रिश्तेदार को सुनाई झूठी कहानी
16 नवंबर को तड़के सुबह 3:30 बजे जगमोहन ने अपने एक परिचित को फोन किया और बताया- भावना को सांप ने काट लिया है, उसे झाड़-फूक करने वाले बाबा के पास अलवर लेकर जाना है। शव को कंबल में लपेट 150 किलोमीटर दूर अपने गांव पहुंचा। जहां पहले झाड़-फूंक करने वाले बाबा के पास ले गया। ताकि कहानी सच्ची लगे। उसके बाद बिना को किसी को सूचना दिए भावना को घर के पास ही बंजर जमीन पर जला दिया। दिल्ली में भावना के पिता का रसूख ऐसा था कि पड़ोसियों ने मुंह नहीं खोला। पुलिस ने भावना के माता-पिता को गिरफ्तार किया। दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। मामला कोर्ट में है।

पति और सास ने छेड़ी न्याय की जंग
भावना के पति अभिषेक और सास भारती ने अपनी बहू को इंसाफ दिलाने के लिए जंग छेड़ी। अभिषेक के परिवार के गुरुग्राम और अलवर से कई धमकी भरे फोन कॉल आए। फोन करने वालों ने धमकी दी- केस वापस ले लो या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार हो जाओ। भारती सेठ बताती हैं- 'मैं अपनी बहू के लिए लड़ रही हूं। मेरा बेटा किसी भी हालत में केस वापस नहीं लेगा।'

यह कैसा सम्मान है, जिसके लिए मेरी भावना को मार डाला
अभिषेक ने की हत्यारों के लिए फांसी की मांग की। अभिषेक ने कोर्ट से गुहार लगाई- ‘मैं जानता हूं कि उन्हें भावना को मारने का कोई अफसोस नहीं है। उनके समाज वाले उन्हें बड़े आदर से देखेंगे। कहेंगे कि देखो, सम्मान बचा लिया, लेकिन कोई मुझे बताए- यह कैसा सम्मान है, जिसके लिए उन्होंने मेरी पत्नी को मार डाला। उन्हें फांसी मिलनी चाहिए।’

शादी के बाद भावना यादव। अभिषेक ने बताया कि भावना बहुत छोटी-छोटी चीजों से खुश रहती थी। उसे शादी के बाद हनीमून के लिए समुद्री तट पर जाना था।
शादी के बाद भावना यादव। अभिषेक ने बताया कि भावना बहुत छोटी-छोटी चीजों से खुश रहती थी। उसे शादी के बाद हनीमून के लिए समुद्री तट पर जाना था।

शादी का जोड़ा पहन खुशी से नाचने लगी थीं भावना
अभिषेक ने एक इंटरव्यू में बताया, 'भावना के माता-पिता स्कूल के बाद ही शादी करना चाहते थे, लेकिन उसके छोटे-छोटे सपने थे। वह जींस और शॉर्ट्स पहना चाहती थी। आगे पढ़ना चाहती थी। जिद करके डीयू में दाखिला लिया था। जब हम शादी की शॉपिंग करने गए थे, तब वह बहुत खुश थी। शादी का जोड़ा पहनते ही खुशी से नाचने लगी थी। शादी के बाद वह मेरे साथ वाइन चखना चाहती थी। हनीमून पर किसी समुद्री तट पर जाना चाहती थी। जब फोन नहीं लग रहा था, तब फिकर थी, लेकिन मुझे लग रहा था कि वह वापस जरूर आएगी। वह इतनी जल्दी हार मानने वालों में से नहीं थी।'

इस सीरीज की छठवीं किस्त अगले रविवार, 26 जून को आएगी। पढ़ने के लिए साथ बने रहें।

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