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प्यार का पोस्टमॉर्टम-7:वो कनाडाई लड़की, जिसने पंजाबी मुंडे के लिए छोड़ दिया बड़ा खानदान, हीर-रांझा जैसी कहानी का मां ने किया अंत, बनी फिल्में

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: दीप्ति मिश्रा
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प्यार का पोस्टमॉर्टम सीरीज-7 में आज कहानी कनाडा की जसविंदर कौर उर्फ जस्सी और पंजाब के सुखविंदर सिंह उर्फ मिट्ठू की है। दोनों को पहली नजर में ही प्यार हो गया। जस्सी की मां बेटी की शादी बड़े खानदान में करना चाहती थी, लेकिन बेटी ने कनाडा से भागकर मिट्ठू को हमसफर बना लिया। जब कनाडा में बैठी मां को पता चला तो उसने पंजाब में रह रहे बेटी और दामाद के कत्ल की साजिश रची। जस्सी नहीं रही। मिठ्ठू बच गया, जो 21 साल से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा है। पढ़िए, इनकी कहानी...

नवंबर, 1994 की बात है। मिट्ठू घर जाने के लिए दोस्त के साथ जगरांव के कमल चौक टेम्पो स्टैंड पर खड़ा था। तभी उसने दूर से आती एक बला की खूबसूरत लड़की को देखा। गोरा रंग, बड़ी-बड़ी आंखें और लंबा कद। उसकी नजरें ठहर गईं। वो लड़की कोई और नहीं, जसविंदर कौर उर्फ जस्सी थी। जस्सी कनाडा से अपनी ननिहाल आई थी। उसके साथ मां मलकीत और मामी थीं। जस्सी अपनी मां और मामी के साथ टेम्पो में बैठ गई। मिट्ठू और उसका दोस्त भी टेम्पो के पीछे लटक गए। दोनों की मंजिल काउंके खोसा गांव थी। कबड्डी खिलाड़ी मिठ्ठू एक साधारण परिवार का लड़का था, जबकि जस्सी एक प्रभावशाली परिवार की बेटी थी। वह ब्यूटीशियन का कोर्स कर रही थी।

मिट्ठू ने एक इंटरव्यू में बताया, 'जस्सी के ननिहाल वाले घर की आलीशान कोठी का पिछला दरवाजा मेरे दो कमरों के कच्चे मकान की तरफ खुलता था। आजाद ख्यालों वाली जस्सी पंजाब के कायदों से अनजान, खुद स्कूटर चलाकर अगले दिन मेरे घर के सामने पहुंची। जस्सी का स्कूटर बंद हो गया। वह हेल्प-हेल्प चिल्लाने लगी। मैं बाहर आया और स्कूटर स्टार्ट किया। हिम्मत जुटाकर धीरे से बोला- 'मैं गल्ल करनी मंगदा... (मैं बात करना चाहता हूं)।' उसने जवाब में ‘हां’ कहा। साथ ही जाते हुए अगले दिन जगरांव में मिलने का वादा किया।'

शादी के बाद एक रेस्टोरेंट में जस्सी और मिट्ठू।
शादी के बाद एक रेस्टोरेंट में जस्सी और मिट्ठू।

ओए मितरां ये मैच तो एक ही पैंतरे में जीत गया
मिठ्ठू याद कर बताते हैं, 'अगले दिन मैं परिवार के साथ खरीदारी के लिए जगरांव गया। उसकी मम्मी और मौसी भी उसी शोरूम पर कुछ खरीदारी कर रहीं थी। मैं जस्सी के पीछे बैठ गया। वह कॉफी पी रही थी। उसने चुपके से कप मेरी तरफ बढ़ा दिया। हम एक-दूसरे को देख मुस्कुराए, लेकिन हमारे बीच कोई बात नहीं हुई। शाम को गांव लौट आए।'

घर में घुसने से पहले जस्सी ने इधर-उधर देखा और मिट्ठू के हाथ में एक पर्ची थमी दी। खुद दौड़ते हुए घर में घुस गई। उसके जाने के बाद मिठ्ठू ने पर्ची पढ़ी। पर्ची में लिखा था- 'आई लव यू।' यह पढ़कर मिट्ठू की खुशी का ठिकाना न रहा। मिठ्ठू ने दोस्त को बताया तो उसने बधाई देते हुए कहा- 'ओए मितरां ये मैच तो एक ही पैंतरे में जीत लिया तूने।'

मिट्ठू को दुखी देख, जस्सी ने फाड़ दिया था पासपोर्ट
मिट्ठू के मुताबिक, हम दोनों पड़ोस के एक घर में मिलने लगे। एक हफ्ते बाद जस्सी ने कहा- वह कनाडा लौट रही है। मिट्ठू का दिल बैठ गया। जस्सी का भी जाने का मन नहीं था। इसलिए जस्सी ने अपना पासपोर्ट फाड़ दिया। पासपोर्ट न होने की वजह से उसे 15 दिन और रुकना पड़ा। जस्सी पढ़ने में होशियार थी। उसका सपना कनाडा में वकील बनने का था। वो शादी करके मेरे साथ जिंदगी बिताना चाहती थी। अक्सर कनाडा में अलग घर लेकर साथ रहने की बातें करती थी।

मिट्ठू की अंग्रेजी कमजोर और जस्सी बोलती थी टूटी-फूटी पंजाबी
जस्सी का पासपोर्ट बन गया था। 15 दिन बाद वह कनाडा लौट गई। जब जस्सी जाने वाली थी, तब मिट्ठू ने पूछा- चली जाओगी तो फिर बातचीत कैसे होगी?' वह जगरांव के एक पीसीओ का नंबर लेकर गई। कॉल करने का दिन और समय फिक्स करके गई थी। जस्सी ने कनाडा पहुंचकर तय वक्त पर फोन किया। दोनों की बातचीत हुई। चिठ्ठियों का लंबा सिलसिला भी चला।

जस्सी अंग्रेजी में लिखती थी। मिट्ठू को अंग्रेजी कम आती थी। इसलिए वह अपने दोस्तों से चिट्ठियां पढ़वाता था। चिट्ठियों और टेलीफोन के जरिए दोनों का प्यार परवान चढ़ता रहा। हर साल कुछ वक्त के लिए जस्सी अपनी नानी के घर आती, तब दोनों की मुलाकात होती।

मिट्ठू और जस्सी की लव स्टोरी को 5 साल हो गए थे। साल 1999 में जस्सी की मां मलकीत और मामा बादेशा ने एक बड़े खानदान में उसके रिश्ते की बात शुरू कर दी। जस्सी ने विरोध किया, लेकिन वो मिट्ठू से प्यार करती है, उसने यह नहीं बताया। जस्सी जानती थी कि मिट्ठू मिडिल क्लास से है, इसलिए उसकी मां इस रिश्ते को स्वीकार नहीं करेगी। जस्सी ने मिट्ठू से शादी करने का सोच लिया। जब छुट्टियों में ननिहाल आई तो उसने मिट्ठू के सामने शादी करने का फैसला जाहिर किया।

शादी के बाद जस्सी और मिठ्ठू। उस वक्त वे छिप-छिपकर रह रहे थे, लेकिन एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम भी स्पेंड कर रहे थे।
शादी के बाद जस्सी और मिठ्ठू। उस वक्त वे छिप-छिपकर रह रहे थे, लेकिन एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम भी स्पेंड कर रहे थे।

गुरुद्वारे में कर ली शादी, सही वक्त पर बताने का किया वादा
मिट्ठू कुछ मसलों से वाकिफ था, लेकिन उसने पूछा- 'इस तरह अचानक? मैं बात करता हूं तुम्हारी मां से।' जस्सी ने कहा- 'नहीं मिठ्ठू, तुम मेरी मां को नहीं जानते हो। मेरी मां वही करती हैं, जो मेरा मामा कहता है। मामा अपने बिजनेस में फायदे के लिए मेरी शादी किसी और से कराने की फिराक में है। यहां बात- बड़ा खानदान, दौलत और ताकत की है, हमें शादी करनी होगी।' मिठ्ठू से पूछा- 'तुम अपने मन की बताओ, मुझसे प्यार है? शादी करोगे?'

जस्सी और मिट्ठू ने अमृतसर गुरुद्वारे में जाकर शादी कर ली। जस्सी ने कहा- सही वक्त आने पर वह कनाडा में सबको बता देगी। मां को समझा लेगी, तब तक शादी के बारे में किसी को नहीं बताना है।

लव स्टोरी में आया दर्दनाक मोड़
कनाडा में मां और मामा ने शादी के लिए जस्सी पर ज्यादा दबाव बनाया। मां उसकी एक भी बात सुनने को राजी न हुई तो उसने अपनी शादी के बारे में बता दिया। उसने मुझे कनाडा बुलाने के लिए भी अप्लाई कर दिया। बस फिर क्या था जस्सी के बुरे दिन आ गए। जस्सी के साथ मारपीट हुई। उसे घर में कैद कर दिया गया।

मामा बादेशा ने सलाह दी, 'पंजाब में क्या गुल खिलाकर आई है, यहां कनाडा किसी को क्या पता चलेगा। इसकी शादी कर देते हैं।' घर में शादी की तैयारियां जारी थीं। जस्सी कभी कमरे में से चीखकर विरोध करती तो कभी मां के सामने गिड़गिड़ाती, लेकिन उसकी हर बात अनसुनी कर दी जाती।

मिट्ठू के लिए कनाडा से दौड़ी आई जस्सी, कोर्ट में बोली- गुनाह नहीं किया
मई, 2000 की बात है। जस्सी को पता चला कि उसके मामा ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर मिट्ठू और उसके दोस्तों को फंसा दिया है। उन पर जस्सी को अगवा कर जबरन शादी करने को मामला दर्ज करवा दिया गया। जस्सी किसी तरह अपने घर से भाग निकली और पंजाब पहुंची। यहां कोर्ट में पेश हुई और अपना बयान दर्ज कराया। बयान में कहा- 'हम दोनों की उम्र 24-25 साल है। हमने अपनी मर्जी से शादी की है और मर्जी से शादी गुनाह नहीं होती। कोर्ट ने मिट्ठू और उसके दोस्तों को बरी कर दिया। दोनों अपने रिश्तेदारों के यहां छिप-छिप कर रहने लगे। उन्हें अंदेशा था कि उन पर हमला हो सकता है।

मां बोली- तू फिकर न कर, मैं सबको समझावांगी..
उधर मां और मामा ने बेटी को सबक सिखाना का फैसला लिया। बादेशा और मलकीत ने कनाडा में रहकर अपने कॉन्टेक्ट का इस्तेमाल किया। पैसा पानी की तरह बहाया और मिट्ठू की हत्या की साजिश रची। पंजाब पुलिस में दारोगा जोगिंदर की मदद से सुपारी किलर हायर किए। 7 जून को कनाडा से मलकीत ने किसी तरह जस्सी से फोन पर बात की। फोन पर बोली- 'ओए पुत्तर ऐ की कीत्ता। चल कोई गल नहीं। अब जो तेरी खुशी, सो हमारी। तूने अपने मन की कर ली जस्सी। अब हमें अपने मन की करन दे। बड़े अरमान थे तेरी शादी के। मैं गांव आ रही हूं। मैं सबको समझावांगी। तू फिक्र न कर, मिट्ठू और तेरा ब्याह कायदे से करवाऊंगी। बिरादरी में हमारी भी नाक बची रहे। तू आ जा पुत्तर।'

मां से बात करने के बाद जस्सी खुशी से चहकने लगी। बोली- 'लोग कैंदे ने मांवां ठंडियां छांवां, देखो आखिर मां मान गई। मिट्ठू अब हमारी शादी भी और की तरह होगी।' 12 जून को गांव में रिसेप्शन रखा गया। 8 जून, 2000 को दोनों बाजार गए थे। कॉफी पी। जस्सी ने रंग-बिरंगी चूड़ियां, लिपस्टिक, झुमके और गजरे खरीदे। जब लौट रहे थे, तभी रास्ते में उन पर तलवार और रॉड से हमला हुआ। जस्सी को भी रॉड लगी। मिठ्ठू पर लगातार हमले किए जाते रहे। जस्सी चीखी- मत मारो, उसे छोड़ दो.. चिल्लाते-चिल्लाते जस्सी बेहोश हो गई। कुछ देर बाद हमलावरों ने मिट्ठू को पैरों से मारा, जब कोई हरकत नहीं हुई तो मरा समझ लिया और पास के नाले के किनारे फेंक दिया। जस्सी को लुधियाना के बुलाया गांव के पास एक फार्म हाउस में ले गए।

दोषियों के कबूलनामे के मुताबिक, जब जस्सी को होश आया। हमलावरों ने मलकीत से फोन पर बात कराई। मलकीत बोली- 'अब तू आजा पुत्तर। जो हो गया सो हो गया। तूने एक गलती कर ली। हमने गलती सुधार दी। अब सब कुछ पहले जैसा है।' जस्सी चीखी- 'तूने धोखा दिया है मां। मैं पुलिस, मीडिया और कानून को बता दूंगी। तेरा घिनौना चेहरा सबको दिखाऊंगी।' उधर से बादेशा ने आदेश दिया- इसे भी खामोश करा दो। बदमाशों ने जस्सी का भी गला रेत दिया। पूरे शरीर पर चाकू से कई वार किए और लाश को नाले में फेंक दिया।

कत्ल, जांच और इंसाफ की लंबी लड़ाई
मिठ्ठू हमले में मरा नहीं। वहां से गुजर रहे लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाया। कई दिन तक जिंदगी और मौत से जूझता रहा। जस्सी की लाश मिलने पर पुलिस ने शिनाख्त के लिए मलकीत और बादेशा से संपर्क किया तो उन्होंने लाश को पहचानने से इनकार कर दिया। जब मिठ्ठू को होश आया, तब उसने पूरी कहानी सुनाई।

जस्सी की मां मलकीत और मामा बादेश समेत 13 लोगों पर आरोप लगाए। तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा हुई। 2012 में बादेशा और मलकीत को कनाडा में गिरफ्तार किया गया। इस केस में सबसे निर्णायक मोड़ तब आया, जब जनवरी, 2019 में कनाडा से दोनों को प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया। अब दोनों पर देश में मुकदमा चल रहा है।

झूठे केस में फंसाया, फिर पैसे देकर मनाने की कोशिश की
मिट्ठू ने जस्सी के लिए इंसाफ की लंबी लड़ाई लड़ी। जस्सी के परिवार वालों ने धनबल का प्रयोग कर मिठ्ठू को बलात्कार समेत कई झूठे मामलों में फंसाया। हालांकि, वह लड़ा और बरी हुआ। मिट्ठू का दावा है कि साल 2012 में एक विधायक के जरिये जस्सी के परिवार वालों ने समझौता करने की कोशिश की। केस वापस लेने के बदले में 14 एकड़ जमीन और एक करोड़ रुपये की पेशकश की गई। मैंने साफ कह दिया- 'जस्सी का प्यार बिकाऊ नहीं है।'

अपने मोबाइल में जस्सी की फोटो दिखाता मिट्ठू। 22 साल बीत गए। मिट्ठू के लिए जस्सी की यादें ही जीने का सहारा हैं। उसने दूसरी शादी नहीं की।
अपने मोबाइल में जस्सी की फोटो दिखाता मिट्ठू। 22 साल बीत गए। मिट्ठू के लिए जस्सी की यादें ही जीने का सहारा हैं। उसने दूसरी शादी नहीं की।

जस्सी की यादें हैं मिठ्ठू के जीने का सहारा
परिवार और दोस्तों ने दोबारा शादी कराने की कोशिश की, लेकिन मिट्ठू ने आज तक दूसरी शादी नहीं की। मिट्ठू का कहना है, 'जितना मैं जस्सी से प्यार करता हूं, उससे कई गुना ज्यादा वह मुझसे प्यार करती थी। उसने मुझ जैसे गरीब के लिए अपनी करोड़ों की दौलत, बंगला, गाड़ी और एशोआराम सब छोड़ दिया। उसके साथ बिताया हर लम्हा यादगार है। भुलाए नहीं भूलता। मैं जस्सी की जगह किसी और को नहीं दे सकता है तो मैं किसी और से शादी क्यों करूं। '

सीरीज और फिल्म बनी
जस्सी के प्यार और कत्ल साल पर साल 2005 में 'मर्डर अन्वैल्ड' नाम से एक फिल्म बनी। ‘जस्टिस फॉर जस्सी’ नाम से किताब लिखी गई और इसी नाम से वेबसाइट भी बनी। साल 2012 में 'जस्सी सिंधु मर्डर: एस्केप फ्रॉम जस्टिस' टेलीविजन सीरीज भी आई।

इस सीरीज की आठवीं किस्त अगले रविवार, 10 जुलाई को आएगी। पढ़ने के लिए साथ बने रहें।

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