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पवित्र पहल:सर्दी में अनाथ बच्चों का तन ढंक रहे मजार की चादरों से तैयार रजाई और कपड़े

7 दिन पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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  • स्वतंत्रता दिवस समारोह की सजावट के लिए सामान भी बनाया
  • लड़कियों के सिलाई प्रशिक्षण में काम आती हैं चढ़ाई गईं चादरें

चमकदार चादरें जो मन्नतें और दुआएं मांगते हुए धार्मिक स्थलों पर चढ़ाई जाती हैं, वह गरीबों और अनाथों के लिए बड़ा सहारा बन गई हैं। कहीं पर अनाथ बच्चे चादरों से बनी रजाई ओढ़ कर सर्दी से राहत पा रहे हैं, तो कहीं आस्था के कपड़ों से तैयार परिधान गरीब बच्चों का तन ढंक रहे हैं। कुछ गैर-सरकारी संस्थाओं ने यह अनूठा प्रयास किया और विभिन्न धार्मिक स्थलों से चादरें जुटाकर उसकी पतली रजाइयां और परिधान बनवाकर जरूरतमंदों में वितरित करवाया।

हरी पतली रजाई में समाया है आशीष
हरी पतली रजाई में समाया है आशीष

सांप्रदायिक सौहार्द की पाठशाला
दरअसल कुछ स्वयंसेवी संगठनों के प्रयास से पालम, दिल्ली के पीरबाबा मजार की चादरों को अनाथालय के बच्चों की भलाई के लिए इकट्‌ठा किया गया। इससे सर्दियों में ओढ़े जाने वाले गरम कपड़े बनाए गए। इसके अलावा जरूरतमंद बच्चों के लिए ड्रेसेज तैयार किए गए। बाल विहार अनाथालय से जुड़ी अनीता शर्मा बताती हैं कि इन चादरों से लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं इसलिए हमारे लिए यह जरूरी था कि इसका बेहतर इस्तेमाल किया जाए। हमारे पास ढेरों ऐसी चादरें थीं। हमने इनकी क्वालिटी के हिसाब से छंटनी की। जैसे, किस चादर से ड्रेसेज बनानी हैं, किस से ओढ़ने के लिए पतली रजाई बनानी हैं। 15 अगस्त जैसे कार्यक्रमों में स्टेज को सजाने के लिए किन चादरों से डेकोरेटिव आइटम्स बनाए जा सकते हैं। चादर से हैंडबैग बनाने के लिए भी कुछ चादरों को लाने के लिए चुना गया।

चादरों से बनी ड्रेसेज में कार्यकम देती बालिकाएं
चादरों से बनी ड्रेसेज में कार्यकम देती बालिकाएं

सेवा की भावना ही इस काम की पहली सीढ़ी
इसके बाद सिलाई का काम किया गया। इस काम से जुड़े कारीगर का कहना है कि मशीन पर कपड़े सिलना तो हमारा पेशा है, लेकिन अनाथ बच्चों से जुड़े इस नेक काम को करने के लिए हमने इन कपड़ों को अपने प्यार और आशीष के धागों से सजाया है। डॉनबॉस्को अनाथालय के फादर एडवर्ड का कहना है कि इस तरह के दान को स्वीकारने के पीछे हमारा मकसद केवल बच्चों को जरूरत की चीजें उपलब्ध कराना भर नहीं होता, बल्कि यह भी सिखाना होता है कि कल जब वो आत्मनिर्भर हो जाएं, तो गरीबों और अनाथों का सहारा बनें। चादरों से बने सामान बाल विहार अनाथालय, पालम के करीब 35 बच्चे और डॉनबॉस्को असायालम, पालम के लगभग 50 बच्चों के काम आ रहे हैं।

समाज के सामने जरूरतमंदों की मदद का सुंदर उदाहरण
समाज के सामने जरूरतमंदों की मदद का सुंदर उदाहरण

ठंडी रातों में मां की ममता बन जाती है चादरों से तैयार रजाइयां
इस प्रोजेक्ट से जुड़ी को-ऑर्डिनेटर प्रीति मिश्रा ने बताया कि मजार की चादरों को उनके साथियों और उन्होंने खुद जुटाया। वर्ष 2019 में यह काम किया गया था। चादरें जुटाने के काम में उनको धार्मिक स्थलों का पूरा सहयोग मिला। इसके बाद उनसे ठंड में ओढ़ने के लिए गरम चादरें विशेष रूप से बनाई गईं, ताकि दिल्ली की हाड़ कंपा देने वाली ठंडी रातों में अनाथ बच्चे सुकून की नींद सो सकें। कहीं न कहीं चादरों की यह रजाइयां मां की ममता की तरह बच्चों का सहारा बन जाती हैं।

चादर से बनी सुंदर पोशाक
चादर से बनी सुंदर पोशाक

प्रीति ने बताया कि कोरोना के कारण चादरों को जुटाने काम नहीं हो सका, लेकिन अब फिर से वॉलंटियर संपर्क कर रहे हैं। इसे दोबारा शुरू किया जाएगा, ताकि सभी धार्मिक स्थानों पर चढ़ने वाली चादरों का अच्छा उपयोग हो सके। डॉनबॉस्को असायलम अनाथालय के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर फादर एडवर्ड का कहना है कि कोविड के दिनों में लोगों की ओर से अनाथालय को बहुत कम दान आया क्योंकि लोग घर से बाहर नहीं निकल रहे थे। ऐसे में बच्चों के लिए की जाने वाली ऐसी कोशिशों की जितनी तारीफ की जाए कम है।

ड्रेसेज बनाने की ट्रेनिंग
ड्रेसेज बनाने की ट्रेनिंग

स्किल डेवलपमेंट का भी बना जरिया
बाल विहार अनाथालय के निदेशक रिटायर्ड विंग कमांडर के एल कपूर का मानना है कि यह एक बेहद सराहनीय कदम है, जिससे सोसायटी को सीख लेनी चाहिए। इन चादरों को सही तरीके से इस्तेमाल किए जाने से जरूरतमंदों को फायदा पहुंचता है। इसका दोहरा फायदा यह हुआ कि कई बार ऐसी चादरें बहुत दिन बंध कर पड़ी रहने के कारण खराब हो जाती थीं। इस तरह पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता था। इन चादरों में वैल्यू एडीशन करके इसे कई रूपों में ढाला गया, जो इन बच्चों के काम आ सकीं। ये चादरें आश्रम में रह रही बच्चियों के प्रशिक्षण में भी काम आईं। आश्रम में स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग ले रही लड़कियों ने इन कपड़ों पर ही सिलाई का प्रशिक्षण लिया।

अनाथालय के लिए अनूठी पहल
अनाथालय के लिए अनूठी पहल

साईंबाबा और पीरबाबा आदि धार्मिक स्थलों की नारंगी-हरी चादरें इंसानों को हर मजहब से मोहब्बत करने की अनूठी मिसाल बन चुकी हैं। बैग, ब्लेंकेट ड्रेस, रूमाल आदि सुंदर वस्तुओं में बदल गईं चादरें ऐसा समाज बनाने की सीख भी दे रही हैं जहां इंसानियत की मीनार जाति और धर्म की दीवार से ऊंची हो।