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11 नंबर से चूका UPSC परीक्षा, नहीं टूटा हौसला:रजत सांबियाल बोले-10 साल की तैयारी, सपने हुए खाक, पर फिर उठ खड़ा होऊंगा, ट्वीट वायरल, महिला एस्पिरेंट्स ने सराहा

नई दिल्ली3 महीने पहले
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हाल ही में आए सिविल सेवा परीक्षा के रिजल्ट ने जहां कई एस्पिरेंट्स को खुशियां दी हैं तो वहीं एक एस्पिरेंट ऐसे भी हैं जो बार-बार नाकामयाब हुए और आखिर तक प्रयास करते रहे। रजत सांबियाल जिन्होंने आखिरी प्रयास में इंटरव्यू दिया। पर 11 नंबर से पिछड़ गए और कामयाबी की दहलीज तक नहीं पहुंच पाए।

इसके बाद उन्होंने ट्वीटर पर अपनी बात रखी। उनका ट्वीट अब वायरल हो रहा है। ट्वीटर पर तमाम महिला एस्पिरेंट्स भी रजत का ढाढस बंधा रही हैं।

10 साल में कई बार प्री और मेंस नहीं निकले

रजत दस साल से यूपीएससी की तैयारी में लगे हुए थे। पर, कई बार उनका प्री नहीं निकला तो कई बार मेंस एग्जाम में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए।

इस बार इंटरव्यू में 11 अंकों से पिछड़ कर सपनों को विराम लग गया। रजत का यह छठा और आखिरी प्रयास था।

रजत ने कहा- दस साल की मेहनत खाक में मिल गई

परिणाम अनुकूल न आने के बाद रजत ने ट्वीट कर कहा- दस साल की मेहनत खाक में मिल गई। अभी मुझे उठना है।

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ से सिविल इंजीनियरिंग पूरी करने वाले रजत सांबियाल ने कहा- यह मेरा छठा और आखिरी प्रयास था। मैं कभी भी आखिरी राउंड तक नहीं पहुंच पाया था। इस बार मैंने सभी राउंड पूरे किए और आखिर में उम्मीद थी कि रिजल्ट अनुकूल होगा।

इससे पहले रजत तीन बार प्रिलिम्स में फेल हुए। दो बार मेंस से आगे नहीं बढ़ पाए थे। आखिरी प्रयास में इंटरव्यू दिया तो कम स्कोर का डर सता रहा था। जम्मू एवं कश्मीर के सांबा जिले में जन्मे रजत जम्मू में पले-बढ़े हैं।

इधर, जन्म से नेत्रहीन आयुषी ने सिविल सेवा में पाई 48वीं रैंक

वैसे तो इस बार सिविल सेवा परीक्षा के पहले तीनों पायदान पर लड़कियों ने बाजी मारी है लेकिन उनके अलावा भी कई टॉपर्स अपनी मेहनत के चलते सुर्खियों में हैं। इन्हीं में से एक हैं दिल्ली की आयुषी जिन्होंने 48वां स्थान प्राप्त किया है। आयुषी पूरी तरह से नेत्रहीन हैं और दिल्ली सरकार के एक स्कूल में इतिहास की शिक्षिका हैं।

जन्म से नेत्रहीन 29 वर्षीय आयुषी ने चुनौतियों को अपने पर हावी नहीं होने दिया। आयुषी दिल्ली के रानीखेड़ा की रहने वाली हैं।

आयुषी ने अपनी स्कूली शिक्षा रानी खेड़ा के एक निजी स्कूल में पूरी की और दिल्ली विश्वविद्यालय के श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज से बीए प्रोग्राम की डिग्री हासिल की। बाद में उन्होंने इग्नू से इतिहास में मास्टर डिग्री हासिल की।
आयुषी ने अपनी स्कूली शिक्षा रानी खेड़ा के एक निजी स्कूल में पूरी की और दिल्ली विश्वविद्यालय के श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज से बीए प्रोग्राम की डिग्री हासिल की। बाद में उन्होंने इग्नू से इतिहास में मास्टर डिग्री हासिल की।

सपना सच हो गया
आयुषी ने कहा कि मेरा सपना सच हो गया है। यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि मेरा नाम टॉप 50 की सूची में है। हर कोई मेरे लिए खुश है। मैं एक साधारण परिवार से आती हूं और मेरा लक्ष्य बस एक नौकरी हासिल करना था। 2016 में मैंने अपनी मां के सहयोग से परीक्षा की तैयारी शुरू की थी। दोस्तों और परिवार से बधाई संदेश आ रहे हैं। आयुषी का कहना है कि शिक्षा सशक्तीकरण का एक साधन है। मैं विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा की दिशा में काम करना चाहता हूं और दिव्यांग लोगों को प्रेरित करना चाहती हूं।

मां को विश्वास था, बेटी परीक्षा पास कर लेगी

आयुषी ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को दिया, जिन्होंने 2020 में एक वरिष्ठ नर्सिंग कर्मचारी के रूप में अपने पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। आयुषी ने यह भी बताया कि मेरी तैयारियों में मदद करने के लिए मेरी माँ ने अपनी नौकरी से रिटायरमेंट ले ली।

वहीं आयुषी की मां आशा रानी (54) ने कहा कि उन्हें विश्वास था कि उनकी बेटी परीक्षा के लिए क्वालीफाई करेगी। भले ही भगवान ने उसे दृष्टि से वंचित कर दिया लेकिन उसे एक रास्ता भी दिखाया। चुनौतियों के बावजूद उसने बाधाओं को पार किया। हार न मानने के लिए उस पर गर्व है।