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कच्ची उम्र में मां बन रहीं लड़कियां:दुष्कर्म, जल्दी शादी, टीनएज रिलेशनशिप इसकी वजह, फैमिली सपोर्ट न मिलने से उठा रहीं गलत कदम

नई दिल्ली5 महीने पहलेलेखक: पारुल रांझा
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कम उम्र में मां बनने का मतलब है 20 साल की उम्र से पहले ही गर्भधारण कर लेना। दुष्कर्म, जल्दी शादी, कम उम्र में रिलेशनशिप के चलते देश में टीनएजर्स प्रेग्नेंसी के मामलों में काफी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। हैरानी की बात यह है कि 15 से 19 साल तक की लड़कियों के गर्भवती होने के सबसे ज्यादा मामले दिल्ली में सामने आए हैं। 2021-21 के नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 के मुताबिक सेक्शुअल हैरेसमेंट यानी दुष्कर्म, कम उम्र में शादी और बच्चियों का जल्दी रिलेशनशिप में पड़ जाना कम उम्र में मां बनने की सबसे बड़ी वजह है। ऐसे में स्त्री रोग विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है।

राजस्थान में हर तीसरी लड़की 15 से 16 साल की उम्र में मां बन रही
राजस्थान में बेटियों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य के मामले में स्थिति अभी भी खराब है। यहां औसतन हर तीसरी बेटी 15 से 16 साल की उम्र में मां बन रही है। राज्य में 25% लड़कियों की शादी 15 से 19 साल की उम्र में ही हो जाती है। ग्रामीण इलाकों में 18-19 साल तक 60% लड़कियों की शादी हो जाती हैं। इसके खतरे भी हैं, जो शिशु और मातृ मृत्यु दर ज्यादा होने और कुपोषण के साथ खून की कमी के रूप में देखे जा रहे हैं।

राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में 18-19 साल तक 60% लड़कियों की शादी हो जाती हैं।
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में 18-19 साल तक 60% लड़कियों की शादी हो जाती हैं।

सेव द चिल्ड्रेन की रिपोर्ट के अनुसार बाल विवाह के कारण दुनिया भर में हर दिन 60 से ज्यादा लड़कियों और दक्षिण एशिया में 6 लड़कियों की मौत होती है। चाइल्ड मैरिज के कारण गर्भवती होने और बच्चों को पैदा करने से हर साल करीब 22,000 लड़कियों की मौत हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2030 तक 1 करोड़ और बाल विवाह होने का अनुमान है, ऐसे में ज्यादा लड़कियों की मौत का खतरा है।

टीनएज प्रेग्नेंसी की बड़ी वजह दुष्कर्म, समय पर नहीं मिल पाता ट्रीटमेंट
राजस्थान में वुमन एंड चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट भाग्यश्री सैनी कहती हैं कि 15 से 19 साल के बीच टीनएजर्स प्रेग्नेंसी की एक बड़ी वजह दुष्कर्म भी है। ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में दुष्कर्म पीड़िता या उनके परिवार वालों को मेडिकल रीजन की ज्यादा जानकारी नहीं होती। समय पर ट्रीटमेंट के लिए अस्पताल ना पहुंच पाने के कारण लड़कियां प्रेग्नेंट हो जाती हैं। इसके अलावा आज भी कुछ गांवों में लड़कियों की जल्दी शादी कर दी जाती है। बदलते समय के बावजूद भी टीनएजर्स प्रेग्नेंसी बढ़ना चिंता की बात है।

राजस्थान में ड्रॉप आउट बेटियों को संबल बनाने में जुटी भाग्यश्री कहती है, राजस्थान में स्कूल दूर होना, परिवार की खराब आर्थिक स्थिति, रुढिवादी सोच, बालिका स्कूलों की कमी.. ये सभी बाल से लड़कियों की शादी कम उम्र में हो रही है। पर ये न केवल बालिकाओं की सेहत के लिहाज से, बल्कि उनके व्यक्तिगत विकास के लिहाज से भी खतरनाक है। शिक्षा से वंचित रहने के कारण वे अपने बच्चों को शिक्षित नहीं कर पातीं और फिर कच्ची उम्र में प्रेग्नेंट होने से जान को खतरा रहता है।

राजस्थान में वुमन एंड चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट भाग्यश्री सैनी टीनएज प्रेग्नेंसी को लेकर लड़कियों व महिलाओं को जागरूक करने में जुटी हैं।
राजस्थान में वुमन एंड चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट भाग्यश्री सैनी टीनएज प्रेग्नेंसी को लेकर लड़कियों व महिलाओं को जागरूक करने में जुटी हैं।

लड़कियों को होने लगती है हाई ब्लड प्रेशर की समस्या
जयपुर के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल में एडिशनल डायरेक्टर गायनोकॉलोजिस्ट डॉ. स्मिता वैद बताती हैं, सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बाद टीनएजर्स में रिलेशनशिप बढ़ा है। कई मामले ऐसे होते है जिसमें यौन अनुरोध को स्वीकार न करने के चलते पार्टनर को खोने का डर रहता है। यह भी टीनएज प्रेग्नेंसी की एक वजह देखी जाती है। सरकारी अस्पतालों की बजाय अमूमन ऐसे ज्यादातर मामले प्राइवेट में जाते हैं।

कुछ विशेष श्रेणी में मेडिकल गर्भपात के लिए गर्भ की समय सीमा को 20 सप्ताह से बढ़ाकर 24 सप्ताह कर दी गई है। लेकिन कम उम्र में मां बनने से ज्यादातर लड़कियों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होने लगती है। लंबे समय तक रहने के कारण दिल को नुकसान पहुंच सकता है।

कई बार खुद को संभाल नहीं पाते हैं टीनएजर्स
डॉ. स्मिता वैद बताती हैं, मां बनने पर डायबिटीज का खतरा भी हो जाता है, जो होने वाले बच्चे तक पहुंच सकता है। लड़की को प्री-मेच्योर डिलीवरी का सामना करना पड़ सकता है। टीनएज में बच्चे को ठीक से पोषण न मिलने की वजह से बच्चा कम वजन का हो सकता है। जननांग पूर्ण विकसित न होने से शिशु का मानसिक विकास नहीं हो पाता। ऐसी मांओं के बच्चे मानसिक रूप से विकृत पैदा होते हैं।

टीनएज प्रेग्नेंसी का लड़कियों की मेंटल हेल्थ पर भी काफी असर पड़ता है। पोस्टपार्टम ब्लूज में लड़की मूड स्विंग्स, उदासी, एंग्जाइटी , कुछ भी खाने और सोने में समस्या, ध्यान लगाने में परेशानी महसूस कर सकती है। कई बार गर्भवती होने के बाद टीनएजर्स महसूस करते हैं कि उन्होंने अपने पेरेंट्स का विश्वास खोया है। समाज व परिवार का सपोर्ट न मिल पाने के कारण वे खुद को संभाल नहीं पातीं। ऐसी स्थिति में गलत कदम भी उठा लेती हैं।

इन बातों पर ध्यान देना जरूरी।

  • टीनएज में जितना मुमकिन हो प्रेग्नेंसी से बचने की कोशिश करें। अगर ऐसा होता है तो सेहत का ख्याल रखें।
  • पूरी तरह से डॉक्टर की सलाह पर रहें।
  • पेट में दर्द, उल्टियां, आंख में धुंधलापन, पैरों में सूजन या वजाइना से ब्लीडिंग होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।