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नोएडा में ससुर ने बेटे के सामने बहू को पीटा:पार्टनर के ह‍िंसक बर्ताव को पहचानें, मारपीट की शिकार हैं तो जानिए क्या करें

नई दिल्ली3 महीने पहले
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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दिल दहला देने वाला वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक ससुर अपने बेटे के सामने अपनी बहू को पिटता नजर आ रहा है। ये पूरा वाक्या पास के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कमरे के अंदर महिला के पति के अलावा दो और महिलाएं मौजूद होती हैं लेकिन कोई भी महिला की मदद नहीं कर पाता है।

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पिछले चार सालों से हो रही थी महिला के साथ घरेलू हिंसा

ये पूरा मामला नोएडा के सेक्टर 121 के क्लियो काउंटी सोसायटी का है। बताया जा रहा है कि महिला पिछले चार साल से घरेलू हिंसा का शिकार हो रही थी। महिला की शादी 2018 में बिहार के रहने वाले विवेक कुमार से हुई थी। शादी के बाद से वो पति और परिवार वालों के साथ नोएडा में रह रही थी। महिला ने बताया पिछले चार से उसके ससुर, पति और देवर तीनों उसे पीटते थे। उन्हें कई बार उसके घरवालों के सामने भी पीटा गया है।

महिला ने इस घटना के बाद अपने ससुर, पति और देवर के खिलाफ पुलिस में कंप्लेंट दर्ज करवाई। उन्होंने पुलिस में सबूत के तौर पर वीडियो भी जमा करवाया है। पुलिस की मानें तो उन्होंने वो मामले की जांच कर रही है। महिला के साथ हुए इस हिंसक व्यवहार को देखने के बाद आपको ये जरूर जान लेना चाहिए कि अगर आपके साथ भी हिंसा होती हैं को आपको क्या करना चाहिए।

पार्टनर के ह‍िंसक व्‍यवहार को पहचानें

रिलेशनशिप में आने या शादी होने के बाद इस बात का ध्यान जरूर रखें क‍ि कहीं आपके पार्टनर में ज्‍यादा गुस्‍सा करने, आपको मारने या बेइज्जती करने जैसी आदतें तो नहीं हैं? कई बार मह‍िलाएं घरेलू ह‍िंसा के मामलों में चुप रहकर सब कुछ बर्दाश्‍त करती रहती हैं। जबकि ऐसा करने से पार्टनर की हिम्मत दिन प्रतिदिन बढ़ती जाती है।

घरेलू हिंसा की शिकार हो रही हैं तो क्या करें

भारत में अगर कोई भी महिला अपने घर में शारीरिक, मानसिक, आर्थिक या योन शोषण का शिकार होती हैं तो वो घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत पुलिस में शिकायत दर्ज करवा सकती है। इसको लेकर सबसे शुरुआती कानून 'डाउरी प्रोहिबिशन ऐक्‍ट' यानी दहेज विरोधी अध‍िनियम 1961 में बना। क्‍योंकि घर में महिलाओं से मारपीट के अध‍िक मामले पहले दहेज से संबंध‍ित होते थे, इसलिए इस अध‍िनियम में 1983 और 1986 में दो नई धाराओं, धारा 498A और धारा 304B को आईपीसी यानी भारतीय दंड संहिता में जोड़ा गया। लेकिन घरेलू हिंसा को लेकर जो अब ज्यादातर मुकदमे 'प्रोटेक्‍शन ऑफ वीमन अगेंस्‍ट डोमेस्‍ट‍िक वॉयलेंस ऐक्‍ट' यानी 'घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत ही दर्ज होते हैं।

महिला चाहे तो ड्यूटी ऑफिसर या प्रोटेक्शन ऑफिसर को संपर्क कर सकती हैं। वो चाहे तो किसी जज को भी पूरी कहानी बताकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकती है। आज के समय में महिलाओं से जुड़े इमरजेंसी केस फास्‍ट ट्रैक कोर्ट में भी हल क‍िए जाते हैं। इनमें पीड़‍ित को तुरंत न्‍याय द‍िलाने की कोश‍िश की जाती है। महिला चाहे तो महिलाओं से जुड़े एनजीओ से भी संपर्क कर सकती है।

घरेलू ह‍िंसा के कारण प्रभावित हो सकता है स्वास्थ्य

घरेलू ह‍िंसा व्यक्ति का मूड, नींद, डेली लाइफ हर एक चीज को प्रभाव‍ित कर सकता है। कई बार खराब रिश्ते के कारण कपल का मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। इससे स्ट्रेस, ब्लड प्रेशर बढ़ने की संभावना होती है। इसका सेहत पर बुरा असर पड़ता है। हाइपरटेंशन और हार्ट की समस्याओं से भी जूझना पर सकता है।

घरेलू हिंसा में हो सकती है तीन साल की सजा

घरेलू हिंसा अध‍िनियम सिव‍िल केस है, क्र‍िमिनल केस नहीं। इसलिए इसमें दोषी के लिए सजा से अधिक मुआवजे का प्रावधान है। लेकिन घरेलू हिंसा के कई मामले ऐसे होते हैं, जिसमें क्रिमनल मामले के तहत कई और धाराएं भी जुड़ जाती हैं। धारा 498ए के तहत क्रूरता एक गंभीर अपराध है। ऐसे में इस धारा के तहत 1 साल से लेकर तीन साल तक जेल की सजा हो सकती है। साथ में जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।