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पति शहीद तो यूक्रेनी-पत्नी रोई नहीं, बोली-रूस से जंग जीतेंगे:क्रीमिया की लड़ाई भी लड़ा था सैनिक, जाने से पहले गले लगाया, कहा-परवाह मत करना

कीव9 महीने पहले
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रूस-यूक्रेन जंग का आज 17वां दिन है। रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव और उसके पास के इलाकों में हमले तेज कर दिए हैं। ब्रोवरी इलाके में रूसी सेना ने एयरस्ट्राइक और भारी गोलीबारी की। रूसी हमले में कई यूक्रेनी सैनिक शहीद हुए हैं। इस जंग में कई भावुक करने वाले पल आए। एक क्षण वो भी था, जहां युद्ध में शहीद विक्टर डुडार की विधवा ओक्साना ने अपने अंतिम अनुभव साझा किए। हालांकि, ओक्साना का हौसला कम नहीं हुआ है। वह कहती हैं कि रूस से जंग जीतेंगे। विक्टर इससे पहले क्रीमिया युद्ध के दौरान रूस से लोहा ले चुके थे।

ओक्साना ने बताया कि युद्ध में जाने से पहले विक्टर ने उन्हें गले लगाया और उन्हें चिंता न करने को कहा था। लेकिन फिर वह नहीं लौटे। विक्टर यूक्रेन के लिए लड़ रहे थे। वतन के लिए लड़ते हुए विक्टर को पत्नी और परिवार को कॉल करने तक की मोहलत नहीं मिल पाती थी। जब उन्हें थोड़ा समय मिला तो उन्होंने अपनी पत्नी को मैसेज किया-'मैं जिंदा हूं, सब कुछ ठीक है।'

विक्टर की पत्नी ओक्साना का रो-रोकर बुरा हाल है। वह हर मिलने वाले को अपने पति के अंतिम मैसेज को दिखा रही हैं।
विक्टर की पत्नी ओक्साना का रो-रोकर बुरा हाल है। वह हर मिलने वाले को अपने पति के अंतिम मैसेज को दिखा रही हैं।

साथी सैनिकों ने ओक्साना से कहा-आपके पति हीरो थे
असल में, यूक्रेन पर रूसी हमले शुरू होने के एक सप्ताह बाद विक्टर के 3 मार्च से मैसेज आने बंद हो गए। उसके तीन दिन बाद ओक्साना को जिस बात का डर था वही हुआ, कुछ सैनिक उनके घर आए। सेना ने 47 वर्षीय ओक्साना को बताया- 'आपके पति हीरो थे।' ओक्साना के लिए यह बात बताने के लिए काफी थी कि उनके पति शहीद हो चुके हैं। ओक्साना के पति की रूसी बमबारी की चपेट में आने से मौत हो गई थी।

यूनिवर्सिटी में मिले थे ओक्साना और विक्टर
ओक्साना और विक्टर की मुलाकात डुडर यूनिवर्सिटी में हुई थी। यहीं से उनकी प्रेम कहानी शुरू हुई थी। विक्टर और ओक्साना शादी के बाद यूक्रेन के पश्चिमी शहर ल्वीव के पास झोव्कवा में घर बनाया था। उनकी एक 21 साल की बेटी सोफिया है। विक्टर के शहीद होने के बाद ओक्साना सदमे में हैं।

विक्टर के शहीद होने के बाद ओक्साना सदमें हैं और पति का सैन्य बैज हाथ में लिए सबको दिखाती रहती हैं।
विक्टर के शहीद होने के बाद ओक्साना सदमें हैं और पति का सैन्य बैज हाथ में लिए सबको दिखाती रहती हैं।

रूस ने जब क्रीमिया पर किया था कब्जा, तब भी विक्टर लड़े थे
ओक्साना ने बताया कि उनके पति को पहले से ही युद्ध की आशंका थी। विक्टर को सैन्य मामलों में रुचि थी। उन्हें अंदेशा था कि रूसी हमले होने वाले हैं। हमले के कुछ घंटों के अंदर वह खुद 80वीं ब्रिगेड के हेड ऑफिस में पेश होने लविवि चले गए थे। विक्टर ने 2014 में ब्रिगेड में काम किया था, उस दौरान रूस ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था और पूर्वी यूक्रेन में कब्जा करने वाले अलगाववादियों का समर्थन करना शुरू कर दिया था।

शहीद विक्टर का पार्थिव शरीर लेकर सेना उनके घर पहुंची थी। विक्टर को श्रद्धांजलि देने के पूरा शहर सड़कों पर उमड़ आया।
शहीद विक्टर का पार्थिव शरीर लेकर सेना उनके घर पहुंची थी। विक्टर को श्रद्धांजलि देने के पूरा शहर सड़कों पर उमड़ आया।

युद्ध के दौरान विक्टर ने कभी सही लोकेशन नहीं बताई
जब दूसरी बार रूस ने यूक्रेन पर अटैक किया तो विक्टर सीधे युद्ध मोर्चे पर पहुंच गए। ओक्साना को बाद में पता चला कि उनके पति मायकोलाइव में हैं, जहां भीषण युद्ध चल रहा था। झोव्कावा एक ऐसा शहर था जहां लड़ाई का नामोनिशान नहीं था। ओक्साना ने विक्टर के रोज के मैसेज और कॉल से यह पता लगाने की कोशिश की थी कि वहां क्या चल रहा है और कितना खतरा है। विक्टर ने कभी भी इस दौरान अपने सही जगह का खुलासा नहीं किया। साथी सैनिकों ने बताया कि विक्टर को जंग के दौरान पेड़ पर भी रात गुजारनी पड़ी थी। सेना की यूनिट को खाने-पीने की दिक्कतों का भी सामना पड़ा। कई दफा तो स्थानीय लोगों ने विक्टर की यूनिट के लिए खाना बनाया था।

पेशे से पत्रकार विक्टर स्वेच्छा से देश के लिए लड़ने के लिए सेना में भर्ती हुए थे। रूस की बमबारी में वह शहीद हो गए।
पेशे से पत्रकार विक्टर स्वेच्छा से देश के लिए लड़ने के लिए सेना में भर्ती हुए थे। रूस की बमबारी में वह शहीद हो गए।

पति की तरफ से मैसेज नहीं आने पर परेशान थी पत्नी
3 मार्च को विक्टर की तरफ से जब कोई मैसेज नहीं आया तो ओक्साना ने मैसेज किया कि आप कहां हैं? लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया। विक्टर शहीद हो चुके थे। बाद में विक्टर का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा। ओक्साना इतनी दुखी हैं कि उन्होंने विक्टर का सारा सामान सेना को लौटा दिया। ओक्साना ने विक्टर के वॉलेट सहित दूसरे सामान भी लौटा दिए। ओक्साना इस बात से भी दुखी हैं कि सेना ने उन्हें अपने पति का पार्थिव शरीर तक देखने नहीं दिया।

ओक्साना ने कहा कि उन्हें अपने पति का चेहरा देखना है, लेकिन सेना ने इसकी इजाजत नहीं दी।
ओक्साना ने कहा कि उन्हें अपने पति का चेहरा देखना है, लेकिन सेना ने इसकी इजाजत नहीं दी।

विक्टर की मौत ने ओक्साना को सख्त दिल बना दिया है। ओक्साना का कहना है कि इस घटना के बाद उनके पास जीतने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने, 'हमें जीतना है उन सब लोगों के लिए जो पहले ही शहीद हो चुके हैं।'

वतन के लिए मोर्चे पर आए नागरिक ​​​​​
ओक्साना के 44 वर्षीय पति विक्टर एक पत्रकार थे। वह उन सैकड़ों सैनिकों में से एक थे, जो 24 फरवरी को रूसी आक्रमण के बाद से मारे गए हैं। यूक्रेन ने रूस से मोर्चा लेने के लिए अपने नागरिकों को सेना में भर्ती किया है। सैकड़ों नागरिक स्वेच्छा से सेना में भर्ती होकर अपने वतन के लिए लड़ रहे हैं। विक्टर भी उन्हीं नागरिकों में शामिल थे जो देश के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए।

सैनिकों को "यूक्रेन के हीरो" की उपाधि से किया गया सम्मानित
यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने अपने नियमित टीवी संबोधन में युद्ध में मारे गए सैनिकों को "यूक्रेन के हीरो" कहकर नवाजा। गुरुवार को संबोधन में जेलेंस्की ने युद्ध में शहीद हुए 13 सैनिकों के नाम बताएं। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि इस युद्ध में लगभग 1,500 नागरिक मारे गए हैं या घायल हुए हैं। यूक्रेनी अधिकारियों ने काफी लोगों के मारे जाने की आशंका जताई है। यूक्रेन के शहरों पर लगातार बमबारी हो रही है।

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