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कश्मीरी जर्नलिस्ट को दिल्ली एयरपोर्ट पर रोका:पेरिस जा रही थीं सना इरशाद मट्टू, कोरोना पर कवरेज के लिए मिला था पुलित्जर प्राइज

नई दिल्ली3 महीने पहले
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पुलित्जर पुरस्कार विजेता कश्मीरी फोटो जर्नलिस्ट सना इरशाद मट्टू को शनिवार को विदेश जाने की अनुमति नहीं दी गई। वह सना एक पुस्तक विमोचन और एक फोटोग्राफी एग्जिबिशन में भाग लेने के लिए पेरिस जा रही थीं, लेकिन उन्हें दिल्ली हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने रोक दिया। अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से उन पर लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से उन्हें विदेश जाने से रोका गया।

घटना के बाद सना इरशाद मट्टू ने कहा कि आज जो कुछ भी हुआ, वह पूरी तरह से अप्रत्याशित था। सना ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, 'मैं सेरेन्डिपिटी आर्ल्स ग्रांट 2020 के 10 पुरस्कार विजेताओं में शामिल होने पर पुस्तक लॉन्च और फोटोग्राफी प्रदर्शनी के लिए पेरिस जाने वाली थी। फ्रांस का वीजा होने के बावजूद मुझे दिल्ली एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने फ्लाइट पकड़ने से रोक दिया। मुझे कोई कारण नहीं बताया गया। सिर्फ इतना कहा गया कि मैं विदेश यात्रा नहीं कर सकती।'

जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि सना इरशाद मट्टू को नो-फ्लाई लिस्ट में रखा गया था। इसका साफ मतलब है कि वह विदेश यात्रा नहीं कर सकतीं। इससे पहले भी कुछ कश्मीरी पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को हवाई अड्डे पर रोका गया था।

कोविड कवरेज के लिए मिला पुलित्जर पुरस्कार
मट्टू समेत चार भारतीय फोटो जर्नलिस्ट वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान शानदार कवरेज के लिए इस साल मई में मीडिया के सबसे बड़े सम्मान पुलित्जर अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

पत्रकारों के समूह ने की आलोचना
जम्मू-कश्मीर में पत्रकारों के एक समूह ने पुलित्जर पुरस्कार विजेता सना को विदेश यात्रा पर जाने से रोकने के केंद्र की फैसले की आलोचना की। जर्नलिस्ट फेडरेशन ऑफ कश्मीर ने ट्वीट किया, एलओसी (लुकआउट सर्कुलर) का अंधाधुंध इस्तेमाल किया जा रहा है। लोगों को परेशान किया जा रहा है। सरकार की आलोचना करने वाले सभी लोगों को परेशान किया जा रहा है। इसमें आगे कहा गया कि कश्मीर में पत्रकारों ने हमेशा खतरनाक परिस्थितियों में काम किया है। स्वतंत्रता के मूल्यों को बनाए रखने के लिए उन्होंने अपने जीवन को खतरे में डाल दिया। हम सभी मट्टू के उत्पीड़न का विरोध करते हैं और उनके साथ एकजुटता से खड़े हैं।'

बता दें कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद सरकार ने कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं को काफी दिनों तक नजरबंद रखा गया था। राज्य के कई हिस्सों में लगातार इंटरनेट बंद कर दिया गया था। इसी क्रम में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भी तमाम वीवीआईपी व विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सक्रिय लोगों के विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया था।

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