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जापान में लड़कियों की चोटी पर रोक:मोजे के रंग, स्कर्ट की लंबाई, आइब्रो, अंडर गारमेंट्स के लिए भी स्कूलों ने बनाए नियम

नई दिल्ली3 महीने पहले
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जापान में स्कूली लड़कियों के चोटी बनाने पर पाबंदी लगा दी गई है। इस फैसले के पीछे दलील दी गई कि लड़कियों के एक चोटी यानी पोनीटेल करने से लड़के सेक्शुअली एक्साइटेड हो जाते हैं। कहा गया कि लड़कियों के गर्दन का पिछला हिस्सा लड़कों को सेक्शुअली तौर पर उत्तेजित कर सकता है।

जापान के स्कूलों में लड़कियों के पोनीटेल बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है । अधिकारियों ने लड़कियों से कहा है कि उनकी गर्दन का पिछला हिस्सा दिखने से लड़के ‘यौन रूप से उत्तेजित’ हो सकते हैं।
जापान के स्कूलों में लड़कियों के पोनीटेल बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है । अधिकारियों ने लड़कियों से कहा है कि उनकी गर्दन का पिछला हिस्सा दिखने से लड़के ‘यौन रूप से उत्तेजित’ हो सकते हैं।

चोटी पर किए गए सर्वे का सच
दरअसल,साल 2020 में लड़कियों की चोटी के नियम को लेकर जापान के फुकुओका इलाके के कई स्कूलों में सर्वे किया गया। सर्वे के अनुसार चोटी में लड़कियों की दिखती गर्दन पुरुषों को उत्तेजित करती है, जबकि कई जगह लड़कियों के छोटे बालों और बॉब हेयरकट की इजाजत है।

लड़कियों के अंडरगार्मेट्स, बाल कलर पर भी रोक
जापान के कई स्कूलों में लड़कियों के मोजे का रंग, स्कर्ट की लंबाई, आइब्रो का शेप और यहां तक कि अंडर गारमेंट्स को लेकर भी नियम बने हुए हैं। यहां स्कूलों में लड़कियां सिर्फ सफेद रंग की अंडर गारमेंट्स पहनकर ही स्कूल जा सकती हैं। उनके बालों का रंग काला के अलावा कोई और नहीं हो सकता। अगर उनके बाल सीधे नहीं हैं तो उन्हें इसके लिए भी प्राकृतिक होने की सबूत देना पड़ता है। इसके लिए छात्राओं के माता-पिता को प्रमाणपत्र देना पड़ता है।

साल 2020 के एक सर्वे में फुकुओका शहर के दक्षिणी प्रांत में हर 10 में से एक स्कूल ने पोनीटेल बनाए जाने पर प्रतिबंध लगाने की सलाह दी थी। यह जापान के बाकी खतरनाक नियमों में से एक है। जिसे बुराकु कोसोकु कहते हैं।
साल 2020 के एक सर्वे में फुकुओका शहर के दक्षिणी प्रांत में हर 10 में से एक स्कूल ने पोनीटेल बनाए जाने पर प्रतिबंध लगाने की सलाह दी थी। यह जापान के बाकी खतरनाक नियमों में से एक है। जिसे बुराकु कोसोकु कहते हैं।

सोशल मीडिया पर उठाए सवाल
जापान के एक यूट्यूबर मोटोकी मैक्सटेक ने इन नियमों को सोशलसाइट टिकटॉक पर शेयर कर बताया था कि ऐसे बकवास नियमों को लेकर कभी कोई सफाई नहीं दी गई। बस इन्हें जबरन लागू कर दिया गया। ऐसे बकवास नियम को मानना हर किसी की मजबूरी और जरूरी हो गया है। मोटोकी कहते हैं कि इन कड़े नियमों के जरिए छात्र-छात्राओं को एक नियम और अनुशासन में बनाए रखना है ताकि वो उस उम्र की अपनी सीमाएं याद रखें।

1870 से नहीं किया गया नियमों में बदलाव
रिपोर्ट के अनुसार, जापान के इन नियमों को स्कूलों में जबरन लागू कर दिया गया है। इसे मानना हर छात्रा की मजबूरी है। ऐसे नियम साल 1870 के दशक में बनाए गए थे। इसके बाद से इन नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जापान में गिने-चुने स्कूलों में ही एक-दो नियमों में बदलाव किया गया है। ऐसा नियमों को ‘ब्लैक रूल्स’ कहा जाता है।

दरअसल, जापान के स्कूलों में ब्लैक रूल्स के रूप में जाने जाने वाले इन कठोर नियमों की जड़ें 1870 के दशक में हैं. जब जापानी सरकार ने पहली बार शिक्षा की एक विनियमित प्रणाली की स्थापना की थी। उस समय स्कूलों में हिंसा को कम करने के नियम बेहद सीमित थे। समय के साथ स्कूलों में ये नियम स्थाई होते गए। अब इनमें सुधार हो रहे हैं।
दरअसल, जापान के स्कूलों में ब्लैक रूल्स के रूप में जाने जाने वाले इन कठोर नियमों की जड़ें 1870 के दशक में हैं. जब जापानी सरकार ने पहली बार शिक्षा की एक विनियमित प्रणाली की स्थापना की थी। उस समय स्कूलों में हिंसा को कम करने के नियम बेहद सीमित थे। समय के साथ स्कूलों में ये नियम स्थाई होते गए। अब इनमें सुधार हो रहे हैं।

उत्तर कोरिया के स्कूलों में भी अजीब नियम
उत्तर कोरिया में नेता किम जोंग उन ने स्किनी जींस, मुलेट हेयरस्टाइल और बॉडी के कुछ हिस्सों में पियरसिंग कराए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। उनका कहना था कि इससे युवा पश्चिमी सभ्यता के प्रति आकर्षित होते हैं। यहां मुलेट और स्पाइस जैसे हेयरस्टाइल को समाज-विरोधी माना जाता है।

अमेरिका में भी योगा पैंट्स और लेगिंग पर रोक

अमेरिका के मैसाचुसेट्स के एक स्कूल में लड़कियों का योगा पैंट्स और लेगिंग पहनने पर पाबंदी है। ऐसे ही एक स्कूल में जॉगिंग सूट और टाइट जींस पहनने पर भी रोक है। स्कूल का कहना है कि इस पहनावे से छात्र हा नहीं टीचर्स की भी ध्यान भटकता है।

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