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वियतनाम युद्ध की वो न्यूड लड़की:बम-बारूद के खौफ से भागती बच्ची को देख दुनिया ने जानी अमेरिकी बर्बरता की कहानी, अब 50 साल की हुई तस्वीर

नई दिल्ली4 महीने पहले
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तस्वीरें सिर्फ मीठा सा नॉस्टेल्जिया ही नहीं बल्कि क्रूर और विभत्स यादें भी समेटती हैं। ऐसी ही एक तस्वीर वियतनाम युद्ध की है, जो अमेरिकी बर्बरता को तो दिखाती ही है साथ ही बम-बारूद के खौफ से भागती न्यूड बच्ची के खौफ का इतिहास भी बताती है। इस ऐतिहासिक तस्वीर को अब 50 साल हो गए हैं।

नेपॉल्म गर्ल कौन है?
तस्वीर को अमेरिकन-वियतनामी फोटोग्राफर निक उत ने खींचा था। इस फोटो में कई बच्चे युद्ध की बमबारी से खुद को बचाने की फिराक में सड़क पर भाग रहे हैं, जिसमें एक लड़की बिना कपड़े, एकदम नंगी बदहवास दौड़ रही है। जिसे दुनिया अब ‘नेपॉल्म गर्ल’ के नाम से भी जानती है।

एक्टिविस्ट है, ऐतिहासिक फोटो वाली लड़की
फोटोग्राफर उत ने उस बच्ची का फोटो क्लिक करके तुरंत उसे अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल में पीड़ितों की इतनी भीड़ थी कि डॉक्टर लड़की को एडमिट करने से भी मना कर रहे थे, लेकिन निक ने जब बताया कि वे पत्रकार हैं तो उसकी जान बचाई गई। आज वही लड़की किम फुक फान, एक एक्टिविस्ट है और युद्ध से पीड़ित बच्चों के अधिकारों के लिए लड़ रही है।

क्या हुआ था उस दिन
8 जून, 1972 को ली गई इस तस्वीर में अमेरिकी सेना की ओर से वियतनाम के एक गांव पर नेपॉल्म बमबारी के प्रभाव से बचने के लिए बच्चे दौड़ रहे थे, जिसमें बिना कपड़ों के दौड़ने वाली नेपॉल्म गर्ल भी शामिल थी। तस्वीर ने युद्ध की क्रूरता तो दिखाई ही साथ ही इसे पुलित्जर अवॉर्ड से भी नवाजा गया।

न्यूयॉर्क टाइम्स में 6 जून को किम फुक ने तस्वीर के 50 साल पूरे होने पर एक लेख लिखा, जिसमें उन्होंने तस्वीर से जुड़ी दुखद यादें साझा कीं। इससे पहले 2 जून को फोटोग्राफर उत ने भी वॉशिंगटन पोस्ट में लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा कि एक तस्वीर दुनिया बदल सकती है, मैं जानता हूं क्योंकि मैंने एक ऐसी तस्वीर खींची थी।

वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना की बर्बरता भी दिखाई दी। ऐसे बम गिराए गए जो इंसानी शरीर पर चिपक जाते थे।
वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना की बर्बरता भी दिखाई दी। ऐसे बम गिराए गए जो इंसानी शरीर पर चिपक जाते थे।

तस्वीर क्लिक करने के पीछे की कहानी
फोटोग्राफ्रर उत उस समय एसोसिएटिड प्रेस के साथ काम करते थे और 7 जून, 1972 को उन्हें जानकारी मिली कि साइगॉन शहर से 50 किलोमीटर ट्रांग बैंग गांव में लड़ाई होने वाली है। वे वहां पहुचे और उन्हें लाशों से बिछी सड़कें और पलायन कर रहे हजारों शरणार्थी दिखे।

शरीर से चिपक रहे थे बम
उत ने नेपॉल्म बॉम्ब गिराते विमान की तस्वीरें खींची। नेपॉल्म बम एक ऐसे जैली जैसे पदार्थ के बनाए गए थे, जो जिसके शरीर पर गिरते उस पर चिपक जाते। इन बमों को1981 की संयुक्त राष्ट्र संधि द्वारा नागरिकों पर इसके इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया गया। फोटो जर्नलिस्ट उत ने पाया कि बहुत से लोग मंदिरों में छुप रहे थे ताकि वे आसमान से गिरते बमों से बच सकें। यही वो समय था जब उत ने उस समय नौ साल की थी किम फुक को भागते देखा।

बम से जल गई 30 प्रतिशत स्किन
नौ साल की बच्ची ने अपने कपड़े उतार दिए थे क्योंकि जो बम उसके ऊपर गिरे वे इतने गर्म थे कि उसकी जलन सहन नहीं हुई। लड़की उस समय 'बहुत गर्म' है चीख रही थी और भाग रही थी। किम के शरीर का 30 प्रतिशत हिस्सा जल गया था।

...फिर लड़की के साथ क्या हुआ?
1972 में किम फुक का 14 महीने इलाज चला और ठीक हो गई। फोटो जर्नलिस्ट उत उनके गांव उनका हालचाल लेने भी गए। सरकार ने किम फुक को पढ़ने के लिए क्यूबा भेजा, जहां उनकी मुलाकात अपने जीवनसाथी से हुई। बाद में किम ने कनाडा में शरण ली।

किम ने तस्वीर के बारे में हाल ही में लिखा कि निक उत ने इस तस्वीर के साथ ही मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। उन्होंने यह भी लिखा कि फोटो में खुद को नंगा देखकर कभी-कभी उत पर गुस्सा भी आया, लेकिन उन्होंने मेरी जान भी बचाई।

किम अब चला रहीं एनजीओ
किम फुक ने लिखा, तस्वीर के फेमस होने से मेरे निजी और भावनात्मक जीवन को नेविगेट करना और मुश्किल हो गया। सड़क पर दौड़ता हुआ बच्चा युद्ध की भयावहता का प्रतीक बन गया। तस्वीरें समय के एक पल को कैद करती हैं। लेकिन इन तस्वीरों में बचे हुए लोगों को, खासकर बच्चों को, किसी न किसी तरह से आगे चलते रहना चाहिए। हम प्रतीक नहीं हैं। हम मानव हैं। हमें काम, प्यार करने वाले लोग, समुदायों को गले लगाने और सीखने के लिए जगह मिलती रहनी चाहिए।

किम फुक अब किम फाउंडेशन इंटरनेशनल चलाती हैं, जहां वे युद्ध से पीड़ित बच्चों को चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता मुहैया कराती हैं।