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UN में भारत की पहली महिला दूत बनीं रुचिरा:पाकिस्तान पर भड़की थीं स्नेहा दुबे, ईनम गंभीर ने कहा था- टेरेरिस्तान

नई दिल्ली16 दिन पहले
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संयुक्त राष्ट्र में रुचिरा कंबोज ने भारत की नई स्थायी प्रतिनिधि के रूप में कार्यभार संभाला है। वह टीएस तिरुमूर्ति की जगह लेंगी। रुचिरा न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त मुख्यालय की पहली स्थायी महिला दूत बनी हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में की कई ऐसी डिप्लोमैट रही हैं, जिन्होंने समय आने पर चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। आइए आपको ऐसी ही 4 महिला अफसरों के बारे में बताते जिनकी आवाज संयुक्त राष्ट्र में गूंज चुकी है।

1987 सिविल सेवा बैच की टॉपर रुचिरा कंबोज

रुचिरा कंबोज भारतीय विदेश सेवा की 1987 बैच की अफसर हैं। वो 1987 सिविल सेवा बैच की टॉपर भी रही हैं। रुचिरा भूटान में भारत की पहली महिला राजदूत रही हैं। उनके करियर की शुरुआत फ्रांस में थर्ड सेक्रेटरी के तौर पर हुई थी। उन्होंने फ्रांस स्थित भारतीय दूतावास में सेकेंड सेक्रेटरी का पद भी संभाला है।

रुचिरा UNESCO में भी भारत की स्थायी प्रतिनिधि के तौर पर काम कर चुकी हैं।
रुचिरा UNESCO में भी भारत की स्थायी प्रतिनिधि के तौर पर काम कर चुकी हैं।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान पर भड़की थीं स्नेहा दुबे

UN में फर्स्ट सेक्रेटरी स्नेहा दुबे ने इमरान खान को जवाब देते हुए पाकिस्तान पर हमला बोला था। उन्होंने कहा, पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा से भारत के अभिन्न हिस्से हैं और रहेंगे। पाकिस्तान को PoK को फौरन छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अपने यहां आतंकियों को पाला-पोसा है जो हमेशा उसके पड़ोसियों को ही नुकसान पहुंचाते हैं।

UN में पाकिस्तान पर हमला बोलने के लिए सोशल मीडिया पर उनके वीडियो को बार-बार देखा गया था और लोग उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे थे। स्नेहा दुबे ने संघ लोक सेवा आयोग में पहली ही कोशिश में कामयाबी हासिल की थी। IFS के लिए चुनी गई स्नेहा को भारतीय विदेश मंत्रालय ने 2014 में स्पेन की राजधानी मैड्रिड दूतावास भेजा गया। उन्होंने पुणे के प्रतिष्ठित फर्गुसन कॉलेज से हायर एजुकेशन और दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज से M Phil किया है।

स्नेहा ने 12 साल की उम्र में ही सिविल सेवा में जाने का फैसला कर लिया था।
स्नेहा ने 12 साल की उम्र में ही सिविल सेवा में जाने का फैसला कर लिया था।

विदिशा मैत्रा ने इमरान को गिनाई पाकिस्तान की कमियां

2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के कुछ देर बाद ही इमरान खान ने भाषण दिया था। उस वक्त भी इमरान ने भारत की गलत छवि पेश करने की कोशिश की थी। तब विदेश मंत्रालय की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने इमरान को मुंहतोड़ जवाब दिया था।

विदिशा ने कहा था कि इमरान खान का भाषण नफरत से भरा हुआ था और उनकी कही हर बात झूठी है। उन्होंने दुनिया को गुमराह करने की कोशिश की है। पाकिस्तान ने खुलेआम आतंकी ओसामा बिन लादेन का बचाव किया था। विदिशा ने कहा कि मानवाधिकार की बात करने वाले पाकिस्तान को सबसे पहले अपने देश में अल्पसंख्यकों की हालत देखनी चाहिए जिनकी संख्या 23 प्रतिशत से 3 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वहां ईसाई, सिख, अहमदिया, हिंदू, शिया, पश्तून, सिंधी और बलोच पर सख्त ईशनिंदा कानून लागू किए जाते हैं, उनका उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण किया जाता है। पाकिस्तान को इतिहास नहीं भूलना चाहिए और याद रखना चाहिए कि 1971 में उसने अपने ही लोगों का ही नरसंहार किया था।

2009 में ट्रेनिंग के दौरान विदिशा को बेस्ट ट्रेनिंग ऑफिसर के लिए गोल्ड मेडल भी मिला था।
2009 में ट्रेनिंग के दौरान विदिशा को बेस्ट ट्रेनिंग ऑफिसर के लिए गोल्ड मेडल भी मिला था।

विदिशा मैत्रा साल 2009 बैच की भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी हैं। विदिशा ने साल 2008 में सिविल सविल सर्विसेज की परीक्षा पास की थी। विदिशा ने सिविल सर्विसेज परीक्षा में पूरे देश में 39वां रैंक हासिल किया था।

पौलोमी त्रिपाठी ने दिखाई थी पाकिस्तान की असलियत

2017 की बात है, जब UNGA में भारतीय मिशन की प्रथम सचिव पौलोमी त्रिपाठी ने पाकिस्तान की एक फर्जी तस्वीर का पर्दाफाश किया था। उन्होंने बताया था कि पाकिस्तान गाजा की एक तस्वीर दिखाकर उसे कश्मीर की तस्वीर बता रहा है और वहां के हालत पर दुख जता रहा है। पौलोमी ने कहा था कि पाकिस्तान आतंक पर दुनिया को गुमराह कर रहा है और उसके द्वारा भेजे आतंकी कश्मीर में बर्बरता कर रहे हैं। वहीं 2018 में उन्होंने UN में पाकिस्तान की दूत मलीहा लोधी द्वारा उठाए गए कश्मीर मुद्दे और अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद बच्चों की दयनीय हालत के दावे को खारिज किया था।

कोलकाता की रहने वाली पौलोमी ने JNU से MA और M Phil किया है। सेंटर फॉर स्टडी ऑफ रीजनल डेवलपमेंट की छात्रा रहीं।उन्होंने साल 2006 में वह रेवेन्यू सर्विस में और साल 2007 में विदेश सेवा के लिए चुनी गईं। 2009 से 2013 के बीच उन्होंने दूतावास में अपनी जिम्मेदारी निभाई।

पौलोमी त्रिपाठी संयुक्तराष्ट्र में भारत के परमानेंट मिशन की सदस्य रह चुकी हैं।
पौलोमी त्रिपाठी संयुक्तराष्ट्र में भारत के परमानेंट मिशन की सदस्य रह चुकी हैं।

ईनम गंभीर ने UN असेंबली में पाकिस्तान को कहा था टेरेरिस्तान

2005 बैच की IFS अधिकारी ईनम गंभीर ने 2016 में UN महासभा में तत्कालीन पाकिस्तानी PM नवाज शरीफ की कश्मीर पर झूठी दलीलों को अपने तरीके से मुंहतोड़ जवाब दिया था। वहीं 2017 में उन्होंने UN में पाकिस्तान को टेररिस्तान कहा था।

ईनम गंभीर UN में देश की सबसे कम उम्र की स्थायी सचिव बनने वाली अधिकारी हैं।
ईनम गंभीर UN में देश की सबसे कम उम्र की स्थायी सचिव बनने वाली अधिकारी हैं।

ईनम गंभीर भारत की UN में परमानेंट मिशन की पहली सेक्रेटरी है। 2008 से 2011 तक अर्जेंटीना में भारतीय दूतावास के लिए काम कर चुकीं गंभीर की पहली विदेशी पोस्टिंग मैड्रिड में हुई थी, जहां उन्होंने स्पेनिश भाषा पर अपनी पकड़ बनाई। उन्हें भारत-पाकिस्तान रिश्तों की एक्सपर्ट के रूप में जाना जाता है।