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फेसबुक-इंस्टाग्राम पर रास नहीं बॉस से फ्रेंडशिप:बीमारी के नाम पर लेते हैं छुट्टियां, पकड़े जाने के डर से बनाते हैं ऑफिस वालों से दूरियां

नई दिल्ली6 महीने पहले
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सोशल मीडिया का क्रेज हर वर्ग के लोगों में है। पुरुषों से ज्यादा महिलाएं एक्टिव रहती हैं। यहां महिला और पुरुष दोनों ही अपनी निजी जिंदगी से जुड़े अच्छे बुरे अनुभव शेयर करते हैं। यादगार तस्वीरें पोस्ट करते हैं। मजेदार बात यह है कि दोनों ही अपने बॉस और सीनियर्स से सोशल मीडिया पर कनेक्ट होने से बचते हैं। सोशल मीडिया पर बॉस से दोस्ती करना क्यों पसंद नहीं करते लोग? पढ़िए, इस सवाल का जवाब टटोलती भास्कर वुमन की रिपोर्ट...

हर एक्टिविटी पर रहती है बॉस की नजर
एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले सुमित कौशिक (बदला हुआ नाम) बताते हैं कि पिछले साल की बात है। हमारा वर्क फ्रॉम होम चल रहा था। इस बीच, मैंने खेत पर काम करने की एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसके कैप्शन में लिखा- ''वर्क फ्रॉम फील्ड''। पोस्ट को बमुश्किल 24 घंटे ही बीते थे। पहले बॉस का फोन आया। थोड़ी ही देर बाद एचआर का मेल आया।आखिरकार, मुझे सोशल मीडिया से वह तस्वीर डिलीट करनी पड़ी। उसके बाद से मैं ऑफिस के किसी सीनियर को अपनी फ्रेंड लिस्ट में एड नहीं करता हूं और जो पहले से एड हैं, पोस्ट करते वक्त उन लोगों को हाइड लिस्ट में डाल देता हूं।

पसंद नहीं प्रोफेशनल लोगों से पर्सनल इन्फॉर्मेशन शेयर करना ..
मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर अकाउंटेंट के तौर पर काम करने वाले शशांक ठाकुर (बदला हुआ नाम) कहते हैं कि फॉर्मल और इनफॉर्मल का मामला आ जाता है। मैं ऑफिस में अपने मैनेजर के पास ही बैठता हूं। नॉर्मल हमारी बातचीत भी होती है। लंच और डिनर भी साथ ही करते हैं, लेकिन जब फैमिली रिलेटेड बात होती है, तो हिचकते हैं। हम लोग सिर्फ प्रोफेशनल बाते करते हैं, पर्सनल नहीं। फेसबुक पर हम बहुत सारी पर्सनल इन्फॉर्मेशन शेयर करते हैं। इस वजह से पसंद नहीं है कि किसी भी ऑफिस वाले को अपनी फ्रेंड लिस्ट में एड किया जाए। जिस संस्थान में काम करता हूं। पूरी कोशिश रहती है कि उस संस्थान के किसी भी पर्सन को जब तक अपने साथ सोशल मीडिया पर एड न करूं, तब तक कि मैं संस्थान न बदल लूं।

अगर प्रोफेशनल लोगों को पर्सनल इंफॉर्मेशन पता होती है तो वे जज करना शुरू कर देते हैं। प्रतीकात्मक फोटो
अगर प्रोफेशनल लोगों को पर्सनल इंफॉर्मेशन पता होती है तो वे जज करना शुरू कर देते हैं। प्रतीकात्मक फोटो

सच-सच कहने पर छुट्टी नहीं मिलती
एक सरकारी दफ्तर में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाली अमिता शुक्ला (बदला हुआ नाम) बताती हैं कि हमारी पर्सनल लाइफ में क्या चल रहा है, अगर ये बात प्रोफेशनल लोगों को पता होती है, तो वे उसी आधार पर जज करने लगते हैं। दोस्त की शादी हो या फिर कहीं घूमने का प्लान सच-सच कहने पर छुट्टी ही नहीं दी जाती है। बीमारी का बहाना मारकर छुट्टी लेनी पड़ती है। ऐसे में अगर बॉस, सीनियर या फिर सहयोगी सोशल मीडिया पर जुड़े हैं, तो घूमने और शादी में जाने का फोटो पोस्ट नहीं कर सकते हैं। स्टेट्स नहीं लगा सकते हैं क्योंकि बॉस को पता चलने पर छवि खराब होती है। दफ्तर वालों से सिर्फ लिंकडिन पर ही कनेक्ट रहना पसंद करती हूं। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर नहीं।

मल्टीनेशलन एमएनसी में काम करने वाली आरती दीक्षित (बदला हुआ नाम) कहती हैं कि ऑफिस वाले इंस्टाग्राम और फेसबुक पोस्ट पर नजर गड़ाए बैठे रहते हैं। ऑफिस पहुंचते ही पूछा जाता है- अरे कैसी रही अंडमान निकोबार की यात्रा। तुमको वहां भी जाना चाहिए। तुमको ये नहीं करना चाहिए। इतनी एडवाइज मिलती हैं कि लगता है, हम तो फिजूल में पैसा खर्च करके आ गए हैं या फिर हमें इनको साथ लेकर जाना चाहिए था।

क्या कहते हैं बॉस?
एचसीएल टेक्नोलॉजी की असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट सीमा गोयल कहती हैं, ‘मैं और मेरी टीम लंबे समय से साथ में काम कर रहे हैं। एक-दूसरे को अच्छे से जानते हैं। उनके अच्छे-बुरे वक्त में शामिल होते हैं, तो फिर हमारे एम्प्लॉई हमको हाइड क्यों करेंगे।’ क्रोनोस की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट कहती हैं कि मुझे ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता है। मेरे सभी एम्प्लॉई फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर जुड़े हुए हैं।

ऑफिस वाले इंस्टाग्राम और फेसबुक पोस्ट पर रखते हैं कड़ी नजर, इसलिए भी सोशल मीडिया पर जुड़ना नहीं चाहते एम्प्लॉई। प्रतीकात्मक तस्वीर
ऑफिस वाले इंस्टाग्राम और फेसबुक पोस्ट पर रखते हैं कड़ी नजर, इसलिए भी सोशल मीडिया पर जुड़ना नहीं चाहते एम्प्लॉई। प्रतीकात्मक तस्वीर

एक कंपनी में वरिष्ठ पद पर कार्यरत विनय शर्मा बताते हैं कि किसी भी एम्प्लॉई का अपना पॉलिटिकल व्यू होता है। देश में रही गतिविधियों पर अपनी अलग राय होती है, लेकिन कई बार बॉस ये नहीं लिखना, वो शेयर नहीं करना..कहकर उस आवाज को कंट्रोल करने लगते हैं। इसलिए भी एम्प्लॉई अपने बॉस और सीनियर्स से सोशल मीडिया पर जुड़ना नहीं चाहते हैं।

इसलिए नहीं बनाते हैं सीनियर्स को सोशल मीडिया दोस्त..
रिलेशनशिप काउंसलर निशा खन्ना कहती हैं कि सोशल मीडिया पर बॉस से कनेक्ट न होने के कई कारण हैं। इनमें से साइबर हैरासमेंट और पर्सनल व प्रोफेशनल को अलग-अलग रखना अहम वजह हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि इंस्टाग्राम और फेसबुक पर फीमेल की तस्वीरें देख, ऑफिस के मेल कलीग साइबर सेक्सुअल हैरेसमेंट करने लगते हैं। लड़कियां इसलिए भी बचने की कोशिश करती हैं। कई सीनियर पर्सनल इन्फॉर्मेशन को जानने के बाद कमेंट करना शुरू कर देते हैं, जिससे एम्प्लॉई को ठेस पहुंचती है। इसलिए लोग प्रोफेशनल लोगों के साथ प्रोफेशनल और पर्सनल के साथ पर्सनल रहना चाहते हैं। कई लोग तो इसके लिए दो-दो सोशल मीडिया अकाउंट भी बनाते हैं।