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मुकाम पर महिलाएं:कभी बेहद खुश तो कभी डिप्रेशन में डूबीं, बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित अपर्णा ने अब लिखी दिमाग की परतें उधेड़ने वाली किताब

3 महीने पहले
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अपर्णा पिरामल राजे बिजनेस, डिजाइनिंग और वर्कप्लेस में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने वाली महिला के तौर पर उभर कर आई हैं। हाल ही में उनकी नई पुस्तक 'केमिकल खिचड़ी' प्रकाशित हुई है जो काफी चर्चा में है। अपर्णा की पहली पुस्तक 'वर्किंग आउट ऑफ द बॉक्स : 40 स्टोरीज ऑफ लीडिंग सीईओ' साल 2015 में आई थी उसके बाद से अपर्णा ने बिना रुके, बिना थके काम किया है। बता दें कि अपर्णा हावर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए और फिर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स, पॉलिटिक्स और फिलॉसफी में पढ़ाई कर चुकी हैं।

बाइपोलर डिसऑर्डर का रहीं शिकार

आज लेखिका के तौर पर मशहूर अपर्णा बिजनेस क्षेत्र के बारे में गहरी समझ रखती हैं। अपर्णा कहती हैं कि वे बाइपोलर डिसऑर्डर का शिकार हैं। मिंट न्यूजपेपर में रेगुलर कॉलमनिस्ट के तौर पर पहचान बना चुकी अपर्णा ने वर्क प्लेस, वर्क स्टाइल समेत बिजनेस से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी राय रखी है।

अपर्णा ने शहरी मुद्दों पर भी अपनी खास राय रखी है। शहरी चुनौतियों से लेकर अर्बन प्लानिंग, मार्केट फोर्सेज और सरकारी नीतियों पर अपनी बेवाक राय दी है।

इससे पहले अपर्णा ने यूनाइटेड किंगडम के न्यूज पेपर फाइनेंशियल टाइम्स वीकेंड के लिए बिजनेस और डिजाइन विषयों पर कई बार स्तंभकार के तौर पर सहयोग किया है।

कई यूनिवर्सिटी में विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर लेक्चर दे चुकीं अपर्णा शुरू में खुद को बाइपोलर डिसऑडर की शिकार नहीं मानती थी, इस डिसऑर्डर की वह शिकार यह स्वीकार करने में उन्हें काफी वक्त लगा।

कई और भी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया ​​​​​​

अपर्णा ने कई और भी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है। वे सीआईआई नेशनल डिजाइन कमिटी, एडवाइजरी ग्रुप ऑफ मेकर्स एसाइलम की सदस्या रहीं और मुंबई व दिल्ली में काम कर रहे माताओं और शिशुओं से जुड़ी तकनीक के लिए नॉन-प्रोफिट संगठन अरमान में भी शामिल रही हैं। इन सबके साथ-साथ अपर्णा महिला-पुरुष समानता को लेकर काम कर रही हैं और वुमन प्रोफेशनल्स नेटवर्क को लीड भी कर चुकी हैं।