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सूद चैरिटी की वंडर वुमन:सोनू सूद की फेम से दूर उनकी टीम की ये पांच महिलाएं, अपने दम पर संभाल रहीं ये बड़ी जिम्मेदारियां

नई दिल्लीएक महीने पहले
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  • इनमें कई महिलाएं संभाल चुकी हैं बड़ी कमान
  • मजदूरों की मदद के लिए सोनू सूद के साथ हुईं खड़ी

कोरोना काल में गरीब और अप्रवासी मजदूरों के लिए मसीहा बनकर उभरे बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद फिलहाल मुसीबत में हैं। हाल ही में उनके यहां चार दिन तक इनकम टैक्स की रेड चली। सोनू सूद पर 20 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी का आरोप है। हालांकि अभिनेता ने ट्वीट के जरिए आरोपों पर सफाई दी है।

बहरहाल, एक सवाल जो हर कोई जानना चाहता है वो ये है कि जब कोरोना संकट के दौरान सरकारी तंत्र फेल हो गया, तो सोनू सूद कैसे हर जरूरतमंद तक पहुंच पाएं? आज हम आपको मिलवाते हैं सूद चैरिटी फाउंडेशन की पांच वंडर वुमन से, जो फ्रंट पर तो नहीं दिखीं, लेकिन पर्दे के पीछे से इतना जबरदस्त मोर्चा संभाला कि लोगों के बीच सोनू सूद रियल लाइफ हीरो बनाकर उभरे।

नीति गोयल

नीति गोयल जानेमाने इंडस्ट्रियल एसके गुप्ता की बेटी हैं। उनकी अपनी पहचान की बात करें तो मुंबई के कीबा, ओस्ताद, मद्रास डायरी, मद्रास एक्सप्रेस, नोम जैसे रेस्तरां की मालिकन हैं। साल 2019 में पेरिस के एफिल टॉवर में रेस्टोरेंट ऑफ द ईयर अवार्ड से सम्मानित हो चुकी हैं। इनके दो रेस्तरां दुनिया के शीर्ष 50 रेस्तरां में शामिल हैं। कोविड-19 के दौरान अप्रवासी मजदूरों की मदद करने के लिए 'घर भेजो' और 'खाना चाहिए' जैसे पहल में की अहम मददगार रहीं।

सुमिता साल्वे

सुमिता एक सफल आंत्रपन्योर हैं। इन्होंने मार्किटिंग एंड फाइनेंस में एमबीए किया है। रिलायंस, विप्रो, एपटेक और सिटी केबल जैसे कॉरपोरेट्स के साथ काम का अनुभव है। सुमिता अपनी बेहतरीन संगठनात्मक कौशल, रणनीतिक और एनालिटिकल पावर के लिए जानी जाती हैं। सुमिता की ट्विटर हैंडल के मुताबिक वो एक सेलिब्रेटी फैशन डिजाइनर भी है।

मल्विका सूद साचर

मल्विका सोनू सूद की बहन हैं। ये और इनके पति एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। कोविड 19 के दौरान सोनू सूद 'घर भेजो' पहल में इनका बड़ा रोल रहा है। इन्होंने मोगा और लुधियाना के मजदूरों का जिम्मा संभाला था। इस दौरान इन्होंने जरूरतमंदों की सहायता के लिए मेडिकल और नगरपालिका अधिकारियों के बीच तालमेल का काम भी किया।

कमलेश सदरांगी

कमलेश कॉर्पोरेट और हेड पीआर के तौर पर ब्रह्मा कुमारी अस्पताल के साथ तीन दशक तक जुड़ी रही हैं। फिलहाल ये सूद चैरिटी फाउंडेशन में डायरेक्टर के साथ पीआर का काम भी देखती हैं। इनके बारे में कहा जाता है कि कठिन हालात को संभालने में महारथ हासिल है। ​​​​​

प्राशिका दुआ

ये सोनू सूद टीम की सबसे यंगेस्ट मेंबर हैं। प्राशिका पेशे से कंप्यूटर साइंस प्रोफेशनल हैं। इन्होंने कई जाने-मानी कंपनियों के साथ इंटर्नशिप की है। अप्रवासी मजूदरों के लिए शुरू की गई पहल 'घर भेजो' में इनका योगदान भी काफी सराहनीय रहा है।

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