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दिग्गजों को धूल चटा चुकी हैं सुधा-वनाथी:सुधा ने मोदी के कहने पर शाही परिवार के इंद्रजीत को तो वनाथी ने कमल हासन को हराया

नई दिल्लीएक महीने पहले
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बीजेपी ने अपने पार्लियामेंट्री बोर्ड और चुनाव समिति की घोषणा कर दी है। इसमें नितिन गडकरी, शिवराज सिंह चौहान, कैलाश विजयवर्गीय जैसे दिग्गजों को जगह नहीं मिल सकी। लेकिन दो महिला नेताओं ने इसमें अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। ये महिला नेता सुधा यादव और वनाथी श्रीनिवासन हैं। सुधा को दोनों समितियों में जगह मिली है और वनाथी को प्रचार समिति में।

मोदी के फोन पर पति की शहादत का गम भुलाकर चुनाव लड़ीं थीं सुधा यादव

सुधा यादव के राजनीति में आने की कहानी शुरू होती है 1999 की कारगिल जंग से। इस जंग में उनके पति और BSF में डिप्टी कमांडेंट सुखबीर सिंह यादव पाकिस्तानी घुसपैठियों को रोकने में शहीद हो गए थे। सुधा यादव की जिंदगी में आए इस दुख को बहुत समय नहीं हुआ था कि देश में लोकसभा चुनावों की घोषणा हो गई। ऐसे में उनके पास एक भाजपा नेता का फोन आता है कि वो महेंद्रगढ़ से कांग्रेस उम्मीदवार और शाही घराने से आने वाले राव इंद्रजीत सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ लें।

सुधा यादव ने आज के IIT रुड़की से पढ़ाई की थी। शहीद की विधवा के कोटे के तौर पर उनको लेक्चरर की नौकरी मिल गई थी। इसलिए सुधा ने उस बीजेपी नेता को विनम्रता से इनकार कर दिया। लेकिन उस नेता ने जब उनसे कहा कि आज आपकी जरूरत परिवार से ज्यादा देश को है तो सुधा चुनाव लड़ने को तैयार हो गईं। सुधा यादव को चुनाव लड़वाने वाले नेता थे मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो तब हरियाणा के चुनाव प्रभारी हुआ करते थे।

पहले मोदी ने दिए थे 11 रुपए फिर जमा हुए थे लाखों रुपए

अब मुश्किल ये थी कि उनके सामने खड़े राव इंद्रजीत सिंह दिग्गज कांग्रेसी नेता थे। शाही घराने से होने की वजह से ‘राज’ और ‘नीति’ उनके उनको विरासत में मिली थी। रेवाड़ी राजपरिवार के राव इंद्रजीत सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए एक शहीद की विधवा के पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। इसका भी हल नरेंद्र मोदी ने निकाला। उन्होंने स्थानीय कार्यकर्ताओं की एक मीटिंग बुलाई। इस मीटिंग में उन्होंने अपनी मां हीराबेन से मिले 11 रुपए सुधा यादव को चुनाव लड़ने के लिए दिए और वहां मौजूद सभी लोगों से मदद की अपील की। जिसके बाद अगले कुछ ही मिनटों में सुधा के चुनाव लड़ने के लिए साढ़े सात लाख रुपए जमा हो गए थे।

शानदार जीत दर्ज की, लेकिन आगे के दो चुनाव हारीं

आम चुनावों के नतीजे आए तो सुधा यादव ने अपनी जिंदगी के पहले चुनाव में दिग्गज कांग्रेसी नेता राव इंद्रजीत सिंह को करीब डेढ़ लाख वोटों से मात दे दी थी। आज वही सुधा यादव बीजेपी के सबसे पावरफुल संसदीय बोर्ड की एकमात्र महिला सदस्य चुनी गई हैं। उनसे पहले पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इस टीम की एकमात्र महिला सदस्य हुआ करती थीं।

इसके बाद 2004 महेंद्रगढ़ और 2009 में गुड़गांव सीट से लोकसभा चुनाव में सुधा यादव को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद पार्टी ने उन्हें संगठन में जगह दी। 2015 में उन्हें बीजेपी ओबीसी मोर्चा का प्रभारी बनाया गया।

52 साल की वनाथी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत विद्यार्थी परिषद से की थी। वनाथी और उनके पति संघ परिवार से लंबे समय से जुड़े हैं।
52 साल की वनाथी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत विद्यार्थी परिषद से की थी। वनाथी और उनके पति संघ परिवार से लंबे समय से जुड़े हैं।

दिग्गज अभिनेता कमल हासन को हरा चुकी हैं वनाथी श्रीनिवासन

संसदीय बोर्ड के अलावा बीजेपी ने अपनी चुनाव समिति की भी घोषणा की है। इस टीम में सुधा यादव के अलावा एक और महिला नेता वनथी श्रीनिवासन को शामिल किया गया है। वकालत में अपना सिक्का जमाने के बाद राजनीति में आने वाली वनाथी श्रीनिवासन ने पिछले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सिनेमा सुपर-स्टार कामल हसन को पटकनी दी थी।

फिलहाल बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष के रूप में काम कर रहीं वनाथी श्रीनिवासन तमिलनाडु के केवल 4 बीजेपी विधायकों में एक मात्र महिला विधायक हैं।

महिला और ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों के जेंडर टेस्ट के खिलाफ लड़ीं वनाथी

2014 में भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव और 2020 में महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनने वाली वनाथी श्रीनिवासन हमेशा से महिला और ट्रांसजेंडर्स के अधिकारों को लेकर मुखर रही हैं। उन्होंने खेलों में महिला और ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों के जेंडर टेस्ट के खिलाफ लड़ाई लड़ी। बीजेपी में रहते हुए 2014 में उन्होंने LGBTQ पर लिखी एक किताब को भी लॉन्च किया। ये बड़ी घटना थी, क्योंकि तब बीजेपी ने खुलकर समलैंगिकता का विरोध किया था। इस पर वनाथी का कहना था कि एक वकील के रूप में वो अपने मन को बांधकर नहीं रखना चाहती हैं।