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प्यार का पोस्टमॉर्टम-4:बेटी के जाति-बिरादरी से बाहर शादी करने पर बाप ने दरांती से दामाद का गला कटवा दिया

नई दिल्ली8 महीने पहलेलेखक: दीप्ति मिश्रा
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प्यार का पोस्टमॉर्टम सीरीज-4 में आज बता रहे हैं कौशल्या और शंकर की कहानी, जिनके प्रेम को जाति की आग में जल रहे अपनों ने ही खाक कर दिया…

साल 2014 में कौशल्या 19 साल की थीं। वह तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले के गांव कुप्पमपलयम में एक सवर्ण और प्रभावशाली परिवार में पैदा हुईं। पिता पी. चिन्नासामी फाइनेंसर का काम करते। मां हाउस वाइफ। कौशल्या ने 12वीं में टॉप किया था। इसलिए उन्हें आगे पढ़ने की इजाजत मिल गई थी। कौशल्या ने पोलाची के पीए इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया। शंकर भी इसी कॉलेज में पढ़ते थे। दलित परिवार में जन्मे शंकर के पिता सी. वेलुचामी दिहाड़ी मजदूर थे और मां गुजर चुकी थीं।

कॉलेज में ही पहली बार कौशल्या और शंकर की मुलाकात हुई। दूसरे दिन कौशल्या बस से कॉलेज जा रही थीं। उसी बस में शंकर भी थे। वह पास आए और बस में ही कौशल्या को प्रपोज ​कर दिया। कौशल्या ने प्रपोजल रिजेक्ट कर दिया, लेकिन दोनों के बीच दोस्ती हो गई। धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल रही थी।

मां-बाप ने लगाई पाबंदियां, तब कौशल्या ने लिया शादी का फैसला
6 माह बीतने के बाद शंकर ने फिर प्रपोज किया। इस बार कौशल्या ना नहीं कह पाईं, क्योंकि वह भी शंकर से प्यार करने लगी थीं। दिन-ब-दिन दोनों के प्रेम का रंग और गहरा होता जा रहा था। इस बीच, किसी रिश्तेदार ने दोनों को साथ देख लिया और कौशल्या के पिता पी. चिन्नासामी और मां अन्नालक्ष्मी को बता दिया। शंकर की जाति जानने के बाद घर में काफी कलेश हुआ। कौशल्या पर कई पाबंदियां लगा दी गईं। तब कौशल्या ने शंकर को अपना जीवनसाथी बनाने का फैसला लिया।

शादी के बाद शंकर और कौशल्या। कौशल्या ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर शंकर से शादी कर की थी। यह बात कौशल्या के मां-बाप नागवार गुजरी।
शादी के बाद शंकर और कौशल्या। कौशल्या ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर शंकर से शादी कर की थी। यह बात कौशल्या के मां-बाप नागवार गुजरी।

पहले साजिश, फिर रिश्वत और बाद में करवा दिया कत्ल..
12 जुलाई, 2015 को कौशल्या ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर शंकर से शादी कर ली। दोस्तों ने सलाह दी कि वे दोनों राज्य से कहीं बाहर चले जाएं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। शंकर की पढ़ाई में कोई बाधा न आए, इसलिए कौशल्या कॉलेज छोड़कर खुद नौकरी करने लगीं।

पी. चिन्नासामी ने पहले अपने पिता की बीमारी का बहाना बना कौशल्या को घर बुलाया और फिर उन्हें वापस नहीं जाने दिया। शंकर ने पत्नी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस की मदद से कौशल्या पति के पास लौट पाईं। चिन्नासामी ने शंकर को यह रिश्ता खत्म करने लिए 10 लाख रुपए ऑफर किए। शंकर ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। इसके बाद चिन्नासामी ने दोनों को मारने की साजिश रची।

शंकर और कौशल्या की शादी को 8 महीने पूरे हो गए थे। उधर, शंकर की बीटेक की पढ़ाई भी पूरी होने को थी। शंकर को कॉलेज की फेयरवेल पार्टी में जाना था। 13 मार्च, 2016 को शंकर और कौशल्या उडुमलाई पट्टी बाजार गए थे, जहां से कौशल्या ने पति के लिए फेयरवेल में पहनने के लिए एक शर्ट खरीदी। दोपहर का समय था। शॉपिंग के बाद दोनों उडुमलाई पट्टी बस स्टैंड पर सड़क क्रॉस करने के लिए खड़े थे। तभी कुल्हाड़ी और दरांती लिए 6 हमलावर आए और दोनों पर पीछे से हमला कर दिया।

कौशल्या ने पहले शंकर को बचाने की कोशिश की। हमलावरों ने उन्हें भी बुरी तरह पीटा। घायल अवस्था में वह शंकर को बचाने के लिए चीखती-चिल्लाती रहीं। बीच सड़क पर यह सब हो रहा था, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। इलाज के दौरान कौशल्या के सिर में 36 टांके लगाने पड़े। पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट के मुताबिक, शंकर के शरीर पर 34 बार कुल्हाड़ी और दरांती से वार हुए थे। सारी घटना सड़क पर लगी सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई थी।

अपने पिता पी. चिन्नासामी और मां के साथ नीली साड़ी में कौशल्या। पिता ने कौशल्या को बाबा की बीमारी का बहाना बताकर ससुराल से अपने यहां बुलाया था।
अपने पिता पी. चिन्नासामी और मां के साथ नीली साड़ी में कौशल्या। पिता ने कौशल्या को बाबा की बीमारी का बहाना बताकर ससुराल से अपने यहां बुलाया था।

शंकर को न्याय दिलाने के लिए मां-बाप से लड़ीं
करीब 20 दिन बाद कौशल्या को होश आया, तब वह अस्पताल में थीं। उन्हें बताया गया कि किसी राहगीर ने दोनों को अस्पताल पहुंचाया था। अस्पताल आने से पहले ही शंकर की मौत हो चुकी थी। कौशल्या ने पुलिस को बताया कि शंकर की हत्या के लिए उनके पिता जिम्मेदार हैं। जांच शुरू हुई। एक हमलावर पकड़ा गया। उसने अपने कबूलनामा में कौशल्या के माता-पिता का भी नाम लिया। इसके बाद चिन्नासामी और अन्नालक्ष्मी को पुलिस ने गिरफ्तार किया। कुल 11 लोगों के खिलाफ हत्या और एसटी-एससी एक्ट के तहत मुकदमा चला। मामला सुर्खियों में बना रहा। कौशल्या इस केस की इकलौती मुख्य गवाह थीं, इसलिए उसकी जान को भी खतरा था, लेकिन वह डरी नहीं। शंकर को इंसाफ दिलाने के लिए वह लड़ीं। अब उनके अपने दुश्मन हो चले थे।

सबकुछ छोड़ जातिवाद विरोधी लड़ाई को बनाया हथियार
हालांकि, यह राह बिल्कुल भी आसान नहीं थी। शंकर को खोने के बाद कौशल्या की दुनिया उजड़ चुकी थी। वह जीना भूल चुकी थीं। वह खूब रोईं, चीखी, चिल्लाई और खुद को खत्म करने की कई कोशिशें कीं। शंकर के छोटे भाई और दोस्तों ने उन्हें संभाला। सदमे से बाहर निकालने में मदद की। एक रोज वह उठीं। लंबे-लंबे बालों को कटवाकर छोटा करा लिया। कंगन, बाली, मेकअप सब त्याग दिए। यहां तक कि अपनी पसंदीदा बिंदी भी लगानी छोड़ दी। सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा दी और अधिकारी बनीं। हालांकि, बाद में उन्हें सरकारी नौकरी छोड़नी पड़ी।

शंकर के मर्डर के बाद अपनी शादी के फोटो के साथ कौशल्या। शंकर के जाने के बाद कौशल्या बेहद अकेली हो गई। उसने आत्महत्या करने की भी कोशिश की।
शंकर के मर्डर के बाद अपनी शादी के फोटो के साथ कौशल्या। शंकर के जाने के बाद कौशल्या बेहद अकेली हो गई। उसने आत्महत्या करने की भी कोशिश की।

'तिरपुर अदालत ने लगाया मरहम, हाईकोर्ट ने छिड़क दिया नमक'
12 दिसंबर, 2017 को तिरपुर की स्थानीय अदालत ने शंकर मर्डर केस में कौशल्या के पिता समेत 6 दोषियों को मौत की सजा सुनाई। एक दोषी को उम्रकैद और एक अन्य को 5 साल की जेल की सजा दी। वहीं कौशल्या की मां अन्नालक्ष्मी, मामा पांडी थुरई और एक नाबालिग रिश्तेदार समेत तीन को बरी कर दिया। दो अन्य को कम सजा मिली। इससे कौशल्या और शंकर के परिवार को थोड़ी तसल्ली हुई, लेकिन अन्नालक्ष्मी ने स्थानीय अदालत के फैसले को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने 22 जून, 2020 को तिरपुर अदालत के फैसले को पलट दिया। मद्रास हाईकोर्ट ने कौशल्या के पिता पी. चिन्नासामी सहित सभी आरोपों से बरी कर दिया। स्थानीय अदालत में फांसी की सजा पाने वाले 5 अन्य दोषियों को उम्रकैद की सुनाई। उम्रकैद और 5 साल की सजा पाने वाले दोषियों की सजा भी कम कर दी। चिन्नासामी को बरी करने के हाईकोर्ट के फैसले से कौशल्या संतुष्ट नहीं थीं। उन्होंने 6 सितंबर, 2020 को हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

शक्ति संग दोबारा घर बसाया
कौशल्या ने शंकर के लिए न्याय लड़ाई लड़ने के साथ ही जातिवाद के खिलाफ भी जंग छेड़ी। आज वह राज्य में जाति विरोधी अभियानों का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। सुबह से शाम तक रोमांटिक गीत सुनने वाली लड़की अब जाति विरोधी किताबों के बीच घिरी रहती है। सभाएं संबोधित करती है। जाति और धर्म विरोधी रैलियां निकालती है। इस लड़ाई में शंकर के परिवार ने हर कदम पर उनका साथ दिया। 9 दिसंबर, 2018 को कौशल्या ने शंकर के पिता की मौजूदगी में पराई (ड्रम का पुराना रूप) कलाकार शक्ति से शादी कर ली।

कौशल्या और पराई कलाकार शक्ति की शादी। लेफ्ट से हल्के गुलाबी रंग की शर्ट में शंकर के पिता वेलुचामी ने दोनों को आशीर्वाद दिया।
कौशल्या और पराई कलाकार शक्ति की शादी। लेफ्ट से हल्के गुलाबी रंग की शर्ट में शंकर के पिता वेलुचामी ने दोनों को आशीर्वाद दिया।

ससुर ने फिर कराई बहू की शादी
शंकर के पिता ने बताया, 'मैं कौशल्या को अपनी बहू मानता हूं। हिंदू संगठनों ने मेरी बहू को बदनाम करने के लिए कई अभियान चलाए, उसके खिलाफ जगह-जगह पोस्टर चिपकाए। कौशल्या की शक्ति से शादी होने के बाद झूठ फैलाया गया। कहा गया कि कौशल्या ने पैसे और नाम के लालच में शंकर के परिवार को छोड़ दिया, जबकि हकीकत यह नहीं है। वह अकेली कब तक जिंदगी काटती। इसलिए उसकी दोबारा शादी कराने के लिए मैं साथ खड़ा रहा। हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद उसने मुझे फोन किया। बहुत रोई। उसे बमुश्किल चुप करा पाया।'

शंकर के दो छोटे भाई-विग्नेश्वरन और युवराज हैं। विग्नेश्वरन बेंगलुरु से एलएलबी कर रहे हैं और युवराज कंप्यूटर साइंस से बीएससी। युवराज ने बताया, ‘कौशल्या भाभी ने दूसरी शादी कर ली। वे नीलगिरी शिफ्ट हो गईं। इसके बावजूद वह मेरी और मेरे भाई की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाती हैं। साथ ही शंकर भैया को इंसाफ दिलाने की लड़ाई लड़ रहीं हैं। मेरा पूरा परिवार हर कदम पर उनके साथ है।’

इस सीरीज की पांचवीं किस्त अगले रविवार, 19 जून को आएगी। पढ़ने के लिए साथ बने रहें।