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'रेप बाद प्रेग्नेंसी महिलाओं के लिए मौका':रिपब्लिकन महिला का अजीबोगरीब तर्क, अर्बाशन बैन को ठहराया जायज, बोलीं-जिंदगी छीनने का आपको हक नहीं

नई दिल्ली7 महीने पहले
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अमेरिका महिला नेता जेनेट मैरी श्मिट ने अबॉर्शन बैन बिल के समर्थन में बेतुका बयान दिया है। उनका कहना है कि रेप के बाद प्रेग्रेंसी महिलाओं के लिए एक मौका है। वो बच्चे को पाल पोसकर एडॉप्शन के जरिए परिवारों को गोद दे सकती हैं। जेनेट ने ये सारी बात दो दिन पहले न्यू हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विस डिपॉर्टमेंट अबॉर्शन रूल पर न्यूज कॉफ्रेंस में बात करते हुए कही। वो इतने पर ही नहीं रुकीं। उन्होंने आगे कहा कि रेप बुरा है लेकिन इतना भी बुरा नहीं कि कोई अबॉर्शन कराया। रेप मुश्किल मुद्दा है और यह भावनात्मक रूप से इंसान को जीवन भर के लिए डराता है- ठीक वैसे ही जैसे चाइल्ड अब्यूज। लेकिन अगर महिला प्रेग्नेंट हो जाती है तो उसके अंदर एक इंसान पल रहा है। वो बच्चा ना भी रखे तो उसके घाव नहीं भरने वाले।

जेनेट ने बुधवार को ओहियो हाउस गर्वेमेंट और ओवरसाइट कमिटी के सामने अबॉर्शन रोकने का कानून पेश किया। बिल को 'HB 598' या 'ह्यूमन लाइफ प्रोटेक्शन' के नाम से भी जाना जाता है। अगर रियो वर्सेज़ वेड के मामले में आया फ़ैसला बदल जाता है तो अमेरिका के ओहियो समेत 19 राज्यों में अबॉर्शन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा जाएगा।

विवादों में रहना जेनेट के लिए कोई नई बात नहीं

जेनेट मैरी श्मिट अमेरिकी नेता हैं। ये रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से ओहियो की राज्य प्रतिनिधि हैं। वह 2005-2013 तक ओहियो के दूसरे जिले में कांग्रेस की प्रतिनिधि थीं। जेनेट पहली बार विवादों में नहीं हैं। साल 2005 में उन्होंने इराक से सैनिकों की वापसी का आह्वान करने के बाद वियतनाम युद्ध के दिग्गज जॉन पी मूर्ति को 'कायर' कहा था। इसके बाद उन्हें 'मीन जीन' यानी कि मतलबी इंसान जैसे निकनेम से बुलाया जाने लगा। इसके अलावा

अबॉर्शन के लेकर किए गए उनकी टिप्पणी के बाद वो उन्हें लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। जेनेट को 'रेप अपॉलिजिस्ट' बुलाया जा रहा है।

ओहियो के प्लांड पैरेंटहुड अधिवक्ताओं ने इस टिप्पणियों को 'घृणित' बताया है।
ओहियो के प्लांड पैरेंटहुड अधिवक्ताओं ने इस टिप्पणियों को 'घृणित' बताया है।

अबॉर्शन के अधिकार को को लेकर दुनिया भर बवाल

हर देश में अबॉर्शन को लेकर अलग-अलग नियम हैं। इसे लेकर कईं देशों में बहुत सख्त नियम है। पिछले साल विदेशों में अबॉर्शन के कानून को लेकर महिलाएं सड़क पर उतरी थीं। दरअसल पौलेंड में 30 साल की इजाबेला की 22 हफ्ते की प्रेग्रेंसी के बाद मौत हो गई। वो फिट्स डिफेक्ट नामक की बीमारी से ग्रसित थी। पौलेंड में साल 2020 में कांस्टीट्यूशनल ट्रिब्यूनल ने अबॉर्शन से जुड़े कानून में बदलाव किया। उस नए नियम के मुताबिक भ्रूण में दिक्कत भी तो महिला अबॉर्शन नहीं करा सकती। ये पूरी तरीके से असंवैधानिक होगा। अगर कोई महिला अबॉर्शन कराती है तो डॉक्टर के साथ उस पर भी कार्रवाई की जाएगी।

पौलेंड में नया कानून लागू होने से पहले महिलाएं तीन स्थितियों में अबॉर्शन करा सकती थीं। पहला, जब गर्भ रेप के कारण ठहरा हो। दूसरा यदि महिला की जान खतरे में हो। और तीसरा, भ्रूण में गंभीर विकृतियां हों। पिछले साल, टेक्सास ने 'हार्टबीट एक्ट' पेश किया। इसके अनुसार सिर्फ 6 हफ्ते तक ही अबॉर्शन की इजाजत है। इस पर भी खूब बवाल हुआ था। महिलाओं और एक्सपर्ट का मानना था कि 6 हफ्ते में तो कई बार प्रेग्रेंसी का पता ही नहीं चलता है। यूएन के रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में 48% यानी कि 12.1 करोड़ प्रेग्रेंसी अनचाही होती है।

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