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एनटीआर की बेटी ने की खुदकुशी:हाउस वाइव्स में सुसाइड रेट ज्यादा, हर 25 मिनट में एक महिला दे रही जान

नई दिल्ली4 महीने पहलेलेखक: संजय सिन्हा
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आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एनटी रामा राव की बेटी उमा माहेश्वरी का शव पंखे से लटका मिला। जब उनकी मौत हुई तब उनके पति घर पर नहीं थे। पुलिस का कहना है कि आशंका है कि सुसाइड का कारण डिप्रेशन रहा हो। इस इस घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले डिप्रेशन अधिक होता है?

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घरेलू महिलाओं में डिप्रेशन अधिक

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों की अपेक्षा 50 प्रतिशत अधिक महिलाएं अवसाद से ग्रसित होती हैं। सुसाइड का बड़ा कारण डिप्रेशन है। चिंताजनक बात यह है कि 15 से 39 वर्ष की उम्र की महिलाओं में खुदकुशी करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। पूरे विश्व में इस एज ग्रुप में होने वाले सुसाइड में 36 प्रतिशत भारतीय महिलाएं होती हैं।

नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के अनुसार, प्रति लाख जनसंख्या पर 70.9 पुरुष तो 29.1 महिलाओं ने वर्ष 2020 में सुसाइड किया। रिपोर्ट में बताया गया है कि 22,372 हाउस वाइफ ने जान दे दी। यानी हर दिन 61 महिलाएं सुसाइड कर रहीं। 1,53,000 सुसाइड में से 14.6 प्रतिशत हाउस वाइव्स ही हैं।

फैमिली से जुड़े मुद्दे जड़ में

सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ साइकेट्री की एसोसिएट प्रोफेसर डा. संघमित्रा गोडी बताती हैं कि महिलाओं में डिप्रेशन अधिक है लेकिन पुरुषों में सुसाइड करने का ट्रेंड ज्यादा है। भारत में आत्महत्या करने वाली महिलाओं में से 50 प्रतिशत हाउस वाइव्स होती हैं। इसके पीछे फैमिली से जुड़े मुद्दे अधिक होते हैं। साथ ही दहेज और बीमारी भी से जुड़े इश्यूज भी होती हैं।

सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ साइकेट्री के डायरेक्टर डॉ. बासुदेव दास बताते हैं कि महिलाओं में सुसाइड का बड़ा कारण घरेलू हिंसा भी है। हाल में सरकार के ही एक सर्वे के अनुसार, 30 प्रतिशत से अधिक महिलाएं किसी न किसी तरह की घरेलू हिंसा से पीड़ित होती हैं। घरेलू हिंसा से शिकार महिलाओं की शादीशुदा जिंदगी इससे बुरी तरह प्रभावित होती है। तलाक होने की स्थिति में महिला को आर्थिक ही नहीं, मानसिक रूप से उत्पीड़न झेलना पड़ता है। इस स्थिति में महिलाएं सुसाइड करने की कोशिश करती हैं।

घर और आफिस के बीच संतुलन बिठाना हो रहा मुश्किल

डॉ. बासुदेव बताते हैं कि महिलाओं पर एक साथ कई जिम्मेदारी होती है। वर्किंग वुमन की बात करें तो वो घर के साथ-साथ आफिस को भी संभालती हैं। खाना बनाना, बर्तन साफ करना, घर की साफ-सफाई, बच्चों की देखभाल..ये सभी चीजें वो करती हैं। विरोधाभास यह है कि उनपर कई बंदिशें लगी होती हैं। उन्हें फ्रीडम नहींं मिलती जितना उन्हें चाहिए। कुल मिलाकर ये चीजें महिलाओं को डिप्रेशन की ओर ले जाती हैं।

साइकेट्रिस्ट डॉ. वरुण एस मेहता बताते हैं कि महिलाओं पर जब तरह-तरह की पाबंदी लग जाती है तब उनकी शिक्षा धरी की धरी रह जाती है। उनके सपने मरने लगते हैं। उनका जीवन उद्देश्यहीन होने लगता है। इस तरह उन्हें निराशा और हताशा घेरने लगती है।

किशोरावस्था में लड़कियों को कई तरह की समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। इस उम्र में डिप्रेशन भी होता है।
किशोरावस्था में लड़कियों को कई तरह की समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। इस उम्र में डिप्रेशन भी होता है।

कर्नाटक के पूर्व सीएम की नातिन ने की थी आत्महत्या

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की नातिन सौंदर्या ने भी सुसाइड कर लिया था। सौंदर्या का शव 28 जनवरी 2022 को बेंगलुरु में उनके अपार्टमेंट में पंखे से लटकता मिला था। सौंदर्या बेंगलुरु के एमएस रमैय्या अस्पताल में डॉक्टर थीं। पुलिस से अनुसार, सौंदर्या पोस्ट प्रेग्नेंसी डिप्रेशन से जूझ रही थीं।

दक्षिण के राज्यों में सुसाइड रेट अधिक

देश में होने वाले सभी सुसाइड में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश और कर्नाटक में ही 50 प्रतिशत से अधिक है। प्रति लाख जनसंख्या पर बात करें तो दक्षिण के राज्यों में आत्महत्या की दर अधिक है। नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के अनुसार, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु राज्य में सुसाइड रेट के मामले में टॉप 10 में हैं। जहां भारत में सुसाइड रेट 10.4 है वहीं केरल में 24.3, तेलंगाना 20.6, तमिलनाडु 17.8 और कर्नाटक में 17.1 है। इसका मुख्य कारण फैमिली इश्यूज और बीमारी है।

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