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महाराष्ट्र में रार के बीच चर्चा में रश्मि ठाकरे:मिडिल क्लास परिवार की बेटी बनी ठाकरे की बहू, पति की कुर्सी बचाने में जुटीं वहिनीसा​हेब

मुंबई7 महीने पहले
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महाराष्ट्र सरकार की सियासी संग्राम के बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे खासा चर्चा में हैं। दरअसल, जब शिवसेना के वरिष्ठ नेता और खुद सीएम उद्धव ठाकरे बागियों को मनाने में फेल हो गए तो रश्मि ठाकर ने मोर्चा संभाला। उन्होंने बागी विधायकों की पत्नियों से फोन पर बात की और उनके अपने पतियों को फोनकर वापस बुलाने को कहा है। पढ़िए, रश्मि ठाकरे का मिडिल क्लास से ठाकरे परिवार की बहू बनने और चर्चित चेहरा बनने तक का सफर..

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की राजनीतिक सफलता का श्रेय उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे को दिया जाता है। रश्मि ठाकरे को लोग प्यार 'वहिनीसाहेब' बुलाते हैं। वह शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के प्रमुख सलाहकारों में से एक हैं। रश्मि ठाकरे ज्यादातर सार्वजनिक कार्यक्रमों में पति उद्धव ठाकरे के साथ नजर आती हैं।

ऐसे शुरू हुई उद्धव और रश्मि की लव स्टोरी
रश्मि ठाकरे का जन्म डोंबिवली के एक मिडिल क्लास परिवार में हुआ। वह पढ़ने-लिखने में खास रुचि रखती थीं। वह मुंबई स्थित जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स में पढ़ाई कर रहीं थीं। इसी दौरान राज ठाकरे की बहन जयवंती से उनकी दोस्ती हो गई थी। जयवंती ने ही रश्मि की मुलाकात अपने भाई उद्धव ठाकरे से कराई थी। उस वक्त उद्धव एक फोटोग्राफर थे और एक एडवरटाइजिंग एजेंसी चलाते थे। दोनों की मुलाकात पहले दोस्ती और प्यार में बदल गई। बाद में 13 दिसंबर, 1988 को दोनों ने शादी कर ली।

एक सार्वजनिक कार्यक्रम में आदित्य ठाकरे, अमिताभ बच्चन, उद्धव ठाकरे, रश्मि ठाकरे और संजय राउत। (बाएं से दाएं)
एक सार्वजनिक कार्यक्रम में आदित्य ठाकरे, अमिताभ बच्चन, उद्धव ठाकरे, रश्मि ठाकरे और संजय राउत। (बाएं से दाएं)

रश्मि को मिलता है उद्धव की सफलता के श्रेय
राजनीतिक परिवार जन्मे उद्धव ठाकरे की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी। वे राजनीति को अपना करियर बनाना नहीं चाहते थे, लेकिन उद्धव के राजनीति में आने और मुख्यमंत्री बनने तक की सफलता का पूरा श्रेय उनकी जीवनसंगिनी रश्मि ठाकरे की दिया जाता है।

सामना की संपादक हैं रश्मि ठाकरे
रश्मि ठाकरे पेशे से पत्रकार हैं। वह मराठी समाचार पत्र 'सामना' की संपादक हैं। इसके अलावा, शिवसेना की वीकली मैगजीन मार्मिक का काम भी देखती हैं। बता दें कि सामना समाचार पत्र की शुरुआत बाल ठाकरे ने साल 1988 में की थी। उनके निधन तक यानी 12 नवंबर, 2012 तक बाल ठाकरे ही एडिटर थे।

बता दें कि उद्धव और रश्मि के दो बेटे हैं- आदित्य और तेजस। आदित्य ठाकरे शिवसेना की युवा शाखा युवा सेना के प्रमुख हैं। साथ ही वर्ली से विधायक भी हैं। वह महाराष्ट्र के पर्यटन और पर्यावरण मंत्री हैं। आदित्य के छोटे भाई तेजस ठाकरे वन्यजीव फोटोग्राफर, शोधकर्ता और संरक्षणवादी हैं।

राजनीति में हर कदम पर पति के साथ
साल 2010 में भी शिवसेना ने जोड़-तोड़ से सरकार बनाई थी। तब भी रश्मि ठाकरे खासा एक्टिव नजर आईं थीं। उस वक्त विधायकों को मुंबई के एक होटल में रखा गया था, तब भी उन्होंने शिवसेना के विधायकों से मुलाकात की थी।

एक कार्यक्रम में पति उद्धव ठाकरे का हाथ थामे रश्मि ठाकरे।
एक कार्यक्रम में पति उद्धव ठाकरे का हाथ थामे रश्मि ठाकरे।

साल 2019 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के साथ सीट बंटवारे को लेकर रश्मि ठाकरे अडिग थीं। रश्मि की ही राय थी कि शिवसेना को बराबर सीट और पावर शेयरिंग से कम पर समझौता नहीं करना चाहिए। इससे पहले भी कई फैसलों पति के साथ खड़ी रहीं। जैसे- नारायण राणे के पार्टी छोड़ने या उद्धव के चचेरे भाई राज ठाकरे को पार्टी से अलग करने में रश्मि ठाकरे ही थीं, जिन्होंने पार्टी की बातचीत में हिस्सा लिया था।

क्या है मामला?
बता दें कि महाराष्ट्र सियासी संग्राम जारी है। उद्धव की बागी विधायकों को मनाने की कोशिश नाकाम होती नजर आ रही है। आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी हुई। इस बीच, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे समेत बागी सभी 9 मंत्रियों के विभाग छीन लिए हैं। इन विभागों का काम दूसरे मंत्रियों को सौंप दिया गया है। शिंदे का विभाग सुभाष देसाई को सौंपा गया है। इधर, आज शाम 5 बजे भारतीय जनता पार्टी की कोर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सागर बंगले पर होने जा रही है।

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