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ब्रेस्ट कैंसर मरीज में सोते समय एक्टिव होता है ट्यूमर:उछल कर खून में पहुंच जाती हैं कोशिकाएं, दूसरे अंगों में बना देती हैं गांठ

3 महीने पहले
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जब मनुष्य का शरीर एक्टिव रहता है तब कैंसर की कोशिकाएं सामान्य रहती हैं। लेकिन सोते समय ये कोशिकाएं शरीर के अंदर उथल-पुथल मचाती रहती हैं। यही कारण है कि किसी एक जगह पर ट्यूमर डिटेक्ट होने पर दूसरी जगह पर ट्यूमर बनने की आशंका रहती है।

‘द नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित एक शोध की रिपोर्ट में बताया गया है कि किसी दूसरे कैंसर के मुकाबले ब्रेस्ट कैंसर में ऐसी कोशिकाएं अधिक होती हैं। कैंसर की ये कोशिकाएं जब ब्लड में पहुंचती हैं तो दूसरे अंगों में भी ट्यूमर बनने में देर नहीं लगती। मेडिकल साइंस में इन कोशिकाओं को सबसे खतरनाक माना जाता है। इस प्रक्रिया को मेटास्टैसिस कहते हैं।

स्विटजरलैंड के ज्यूरिक स्थित स्विस फेडेरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के कैंसर बायोलॉजिस्ट और शोधकर्ताओं में से एक निकोल एक्टो ने बताया कि दिन के मुकाबले रात में कैंसर कोशिकाएं ज्यादा सक्रिय रहती हैं। शोध इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि कोशिकाएं किस दिशा में घूम रही हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, शरीर में आंतरिक घड़ी होती है जो जीन से नियंत्रित होती हैं। इससे शरीर में होने वाली सभी तरह की प्रक्रिया का पता चलता है जिसमें मेटाबॉलिज्म और नींद भी है। वैज्ञानिकों ने पहले अनुमान लगाया था कि कैंसर की कोशिकाएं इतनी मैच्योर होती हैं उन्हें इस बॉडी क्लॉक से फर्क नहीं पड़ता। लेकिन चूहों पर हुए रिसर्च ने इस सोच को पलट दिया। दिन है या रात, यानी समय के हिसाब से कैंसर कोशिकाएं भी बढ़ती हैं।

इस शोध के बाद वैज्ञानिकों ने ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित 30 महिलाओं को चुना। दो बार ब्लड सैंपल लिए गए। सुबह 4 बजे और सुबह 10 बजे। जांच में पता चला कि सुबह 4 बजे वाले सैंपल में 80 प्रतिशत सीटीसी लेवल बढ़े हुए थे। यानी सुबह 4 बजे कैंसर कोशिकाएं तब बढ़ रही थी जब लोग सो रहे थे।

कैंसर डिटेक्शन में यह शोध महत्वपूर्ण

शोधकर्ताओं का कहना है कि फिजिशियन जब कैंसर को ट्रैक करते हैं तब उन्हें ज्यादा सावधानी बरतनी होगी। यदि दिन में ब्लड सैंपल लिए जाते हैं तो हो सकता है कि कैंसर की कोशिकाएं पकड़ में न आएं। डॉक्टर कैंसर डिटेक्ट करने के लिए सीटीसी लेवल की जांच करते हैं जो कि एक तरह की बायोप्सी है। इससे पता चलता है कि कैंसर कोशिकाओं से ट्यूमर बना है या नहीं।

नींद लेना जरूरी

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस शोध का रिजल्ट यह नहीं है कि ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं को नींद कम लेनी चाहिए। बॉडी के मेटाबॉलिज्म के लिए 8 घंटे की नींद जरूरी है। हाल के कुछ शोधों ने यह स्पष्ट किया है कैंसर से पीड़ित लोग जो कम नींद लेते हैं उनमें समय से पहले मरने का रिस्क अधिक होता है।

भारत में तेजी से बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर के मामले

29 अलग-अलग टाइप के कैंसर में सबसे ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। पहले शहरी इलाकों में ही ब्रेस्ट कैंसर के केस अधिक आते थे, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं इससे पीड़ित हो रही हैं। चिंताजनक बात यह है कि 20 से 22 साल की युवतियां भी ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हो रही हैं। विकसित देशों के मुकाबले भारत में कम उम्र में ही ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। लेकिन जागरूकता की कमी, लास्ट स्टेज में डॉक्टर के पास पहुंचना, स्क्रीनिंग सेंटरों की कमी आदि भी प्रमुख कारण हैं।

एक लाख महिलाओं में 25 को ब्रेस्ट कैंसर

2017 के एक डाटा के अनुसार, प्रति एक लाख भारतीय महिलाओं में 25 ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हो रहीं हैं। इनमें आधे से अधिक महिलाओं की मौत भी हो जाती है। ब्रेस्ट कैंसर के लिए विशेष तरह की जीन BRCA1 और BRCA2 की पहचान की गई है। हालांकि लाइफस्टाइल में गड़बड़ी और मोटापा, इन दो कारणों को भी ब्रेस्ट कैंसर से जोड़ कर देखा जा रहा है। भारतीय महिलाओं में होने वाले सभी तरह के कैंसर में सबसे अधिक घातक ब्रेस्ट कैंसर ही है।

लैंसेट जर्नल के एक रिसर्च के अनुसार, 2010 से 2014 के बीच जो भारतीय महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हुईं थीं उनमें से 66 प्रतिशत ही बच पाईं। यानी भारत में सर्वाइवल रेट 66 प्रतिशत है जबकि अमेरिका और आस्ट्रेलिया में यह 90 प्रतिशत के ऊपर है।

तीसरे-चौथे स्टेज में आती हैं महिलाएं

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रीवेंशन एंड रिसर्च के अनुसार, भारत में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं के सर्वाइवल रेट कम होने का मुख्य कारण कैंसर के प्रति जागरूकता की कमी और इलाज में देरी है। पश्चिमी देशों के मुकाबले, भारतीय महिलाएं तीसरे या चौथे स्टेज में स्क्रीनिंग के लिए आती हैं तब तक ट्यूमर काफी बढ़ जाता है।

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