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मंकीपॉक्स का गे कनेक्शन ढूंढ रहे अमेरिका-ब्रिटेन:डॉक्टर बोले-इसका कोई तुक नहीं, चेचक की रिश्तेदार इस बीमारी की फैमिली के पिरामिड में मिले थे सबूत

6 महीने पहलेलेखक: ऐश्वर्या शर्मा
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अमेरिका में पहला मंकीपॉक्स का मामला सामने आया है। वह मरीज हाल ही में कनाडा से आया था। स्पेन और पुर्तगाल में इसके 40 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। मई से उत्तरी अमेरिका और यूरोप में भी कई संदिग्ध मामले आ चुके हैं। यह बीमारी कनाडा और अफ्रीका में भी फैल रही है। इन सभी देशों में इसे लेकर डर बना हुआ है।

हालांकि, भारत में इसका अभी तक कोई मामला सामने नहीं आया। यह भी दावा किया जा रहा है कि यह बीमारी उन पुरुषों में ज्यादा देखी जा रही है जो गे हैं। वहीं, गर्भवती महिलाओं को भी इससे सावधान रहने की जरूरत है। आइए आपको बताते हैं क्या होता है मंकीपॉक्स?

बुखार जैसे लक्षण, दो से तीन हफ्ते तक रहती है बीमारी

सर गंगाराम हॉस्पिटल में डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर एस.सी. भरेजा ने वुमन भास्कर को बताया कि यह एक दुर्लभ वायरल संक्रमण है। इसके लक्षण फ्लू जैसे होते हैं। यह चेचक की तरह होता है। यह छाले से निकलने वाले तरल पदार्थ के संपर्क में आने से हो सकता है। इसके लक्षण बुखार, सिरदर्द, घबराहट से शुरू होते हैं। स्मॉलपॉक्स और मंकीपॉक्स में सबसे बड़ा अंतर यह कि मंकीपॉक्स में लसीका ग्रंथियां यानी लिम्फ नोड्स में सूजन हो जाती है। यह ग्रंथि पूरे शरीर में फैली होती है जो चेन की तरह होती है।

यह इंफेक्शन 7-14 दिन तक रहता है, लेकिन कुछ मामलों में यह 5 से 21 दिन तक भी रहता है। इसके होने के 1 से 3 दिन बाद ही शरीर पर रैशेज होने लगते हैं। अफ्रीका में इस बीमारी से 10 में से 1 इंसान की मौत हो जाती है।

यह बीमारी गे कपल में क्यों ज्यादा देखने को मिल रही है, इस बारे में डॉक्टर से जानिए।

गे संबंधों से हो रही बीमारी, यह कहना जल्दबाजी

मंकीपॉक्स पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के दौरान WHO की असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल डॉक्टर सोस फॉल ने बताया कि यह बीमारी पुरुषों में समलैंगिक संबंध बनाने से फैल रही है। यह एक नई जानकारी है। UK हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी (UKHSA) के अनुसार पहले इसे सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज के तौर पर पहचाना नहीं गया था। यह संबंध बनाने के दौरान सीधे संपर्क में आने से हो सकती है।

संबंध बनाने से नहीं, लेकिन इस दौरान हो सकता है मंकीपॉक्स

डॉक्टर एस.सी. भरेजा ने वुमन भास्कर को बताया कि भारत में इस तरह का अब तक कोई मामला सामने नहीं आया है। यह सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज नहीं है। हां, अगर किसी को मंकीपॉक्स हो और उसके छाले से तरल पदार्थ संबंध बनाते हुए उसके पार्टनर से टच कर जाए तो उसे भी मंकीपॉक्स हो सकता है। यह स्किन से स्किन कॉन्टैक्ट पर होता है।

प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए चिकनपॉक्स और स्माॅलपॉक्स खतरनाक है। मंकीपॉक्स से क्या हो सकता है। आइए जानते हैं।

प्रेग्नेंट महिलाओं को अलर्ट रहने की जरूरत

गायनोकोलोजिस्ट डॉक्टर माला ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को संक्रमण ज्यादा होने की संभावना रहती है। अगर गर्भावस्था में चिकनपॉक्स हो जाए तो उन्हें फीटल वेरिसेला सिंड्रोम होने भी संभावना रहती है। इससे बच्चे को आंखों, मस्तिष्क, आंतों और यूरीन से जुड़ी समस्या हो सकती है। प्रेग्नेंसी के 13 और 20 सप्ताह के बीच इस सिंड्रोम का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। हालांकि मंकीपॉक्स में ऐसा कुछ होता है, इस बारे में कोई स्टडी सामने नहीं आई है। इसलिए अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन गर्भवती महिलाओं को यह बीमारी होने से इसका असर बच्चों में भी हो सकता है, इसलिए सावधानी जरूरी है।

1958 में पहली बार सामने आया था मंकीपॉक्स

मंकीपॉक्स ऑर्थोपॉक्सवायरस परिवार से संबंधित है। 10,000 ईसा पूर्व स्मॉलपॉक्स का जिक्र पाया गया है। इसका पहला सबूत मिस्र में ममी में शवों में मिलता है। चिकनपॉक्स 16 वीं शताब्दी में मिला, लेकिन मंकीपॉक्स पहली बार 1958 में सामने आया था। बंदरों में इस बीमारी को देख, इसका नाम मंकीपॉक्स रखा गया। 1970 में पहली बार यह कांगो में इंसानों में पाई गई। यह बीमारी भी जानवरों से इंसानों में फैलती है। WHO के अनुसार मंकीपॉक्स वायरस गिलहरी, बंदर और चूहों में पाया गया है।

डॉक्टरों-रिसर्चर के लिए सिरदर्द बनी नई बीमारी

6 मई तक ब्रिटेन में इसके 9 मामले सामने आ चुके हैं। इस बीमारी को ठीक होने में कई हफ्ते लग जाते हैं। इससे मध्य और पश्चिमी अफ्रीका में इस बीमारी से हजारों लोग संक्रमित हो चुके हैं। WHO भी इस पर नजर रख रहा है। कनाडा के क्यूबेक में इसके 13 संदिग्ध मामले सामने आए हैं।

अभी कोई इलाज नहीं मिला, स्मॉल पॉक्स का टीका लग रहा

मंकीपॉक्स वायरस के लिए अब तक कोई ट्रीटमेंट नहीं है। इसे कंट्रोल करने के लिए मरीज को स्मॉल पॉक्स का टीका, एंटी वायरल और वैक्सीनिया इम्यून ग्लोबिन (VIG) दिया जाता है।

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