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सर्जरी के बाद विदेशी जुबान में बतियाने लगी महिला:जिस देश कभी नहीं गई, वहां का एक्सेंट सुन डॉक्टर्स भी चकराए, निकली दुर्लभ बीमारी

कैनबराएक महीने पहले
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ऑस्ट्रेलिया की एक डेंटिस्ट टॉन्सिल की परेशानी से जूझ रही थी। महिला डॉक्टर ने दर्द से निजात पाने के लिए टॉन्सिल की सर्जरी कराई। सर्जरी के बाद जब डॉक्टर एंजी येन को होश आया तो वह विदेशी एक्सेंट में बात करने लगीं।

इसे सुनने के बाद वहां मौजूद डॉक्टर और उसके परिवार वाले हैरान रह गए, जबकि जिस एक्सेंट में महिला डॉक्टर बात कर रही है, उस देश वह कभी नहीं गईं। उस देश से दूर-दूर तक उसका कोई नाता नहीं रहा है।

29 वर्षीय दंत चिकित्सक एंजी येन का जन्म ताइवान में हुआ। आठ साल की उम्र में एंजी ऑस्ट्रेलिया आ गईं। यहीं पढ़ाई-लिखाई और डॉक्टर बन गईं। साथ ही ऑस्ट्रेलिया की नागरिक बन गईं। अप्रैल, 2021 की बात है, वह टॉन्सिल की दिक्कत से जूझ रहीं थीं। उन्होंने टॉन्सिल की सर्जरी कराई, जिसके बाद से वह विदेशी एक्सेंट बोलने लगीं।

हैरानी की बात यह है कि सर्जरी के बाद होश में आते ही एंजी येन आइरिश एक्सेंट में बात करने लगीं, जबकि उनका यूरोपीय देश आयरलैंड से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। न कभी एंजी वहां गईं और न वहां किसी से कभी संपर्क हुआ। सर्जरी के आठ दिन बाद भी उनका विदेशी एक्सेंट नहीं बदला, जिसके चलते डॉक्टर और उनके परिवार वाले भी परेशान हो गए। डॉक्टर एंजी येन ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

दंत चिकित्सक एंजी येन। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल से इस सिंड्रोम से जूझ रहीं हैं। दरअसल, यह दुर्लभ चिकित्सा स्थिति है, जिसे फॉरेन एक्सेंट सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है।
दंत चिकित्सक एंजी येन। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल से इस सिंड्रोम से जूझ रहीं हैं। दरअसल, यह दुर्लभ चिकित्सा स्थिति है, जिसे फॉरेन एक्सेंट सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है।

दुनिया भर में अब इस बीमारी के 100 मरीज मिले
वैज्ञानिक कार्ल क्रुजेलनिकी ने बताया कि फॉरेन एक्सेंट सिंड्रोम एक तरीके से मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी है। दुनिया भर में अब तक इस तरह के करीब 100 मामले ही दर्ज किए गए हैं। वैज्ञानिक कार्ल ने उन आलोचकों को भी फटकार लगाई, जिन्होंने दावा था किया कि एंजी का एक्सेंट नकली या बनावटी लग रहा है। उन्होंने कहा कि एंजी जो बोल रही हैं, वह वास्तविक एक्सेंट नहीं है, बल्कि रोगी की मौजूदा भाषा का बिगड़ा हुआ रूप है।

कई बार बन जाती है शर्मनाक स्थिति
एंजी कहती हैं, ''पेशेवर लाइफ में मरीजों को सलाह देते वक्त कभी-कभी मुझे कुछ शब्दों को बोलने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। कई बार बेहद शर्मनाक स्थिति बन जाती है। मरीज जब मेरी बात नहीं समझ पाते हैं और मुझे दोहराना पड़ता है, तब हताश महसूस करती हूं। वह कहती हैं कि इस सिंड्रोम का कोई ज्ञात इलाज नहीं है, इसलिए यह ऐसी बीमारी नहीं है, जो एक बार में ठीक हो जाएगी।''

वह आगे कहती हैं, 'इस बीच कई बार ऐसा भी होता है कि मैं ऑस्ट्रेलियाई एक्सेंट में भी बात करती हूं, लेकिन कितनी देर कर पाऊंगी, यह नहीं पता होता है। शुरुआत में घबराहट होती थी, लेकिन अब आदत हो गई है। मैं अपने नए-नए एक्सेंट के साथ टिक टॉक पर वीडियो बनाती हूं और उन्हें लोगों के साथ शेयर करती हूं।'

क्या है फॉरेन एक्सेंट सिंड्रोम?
फॉरेन एक्सेंट सिंड्रोम एक दुर्लभ विकार है। इससे पीड़ित इंसान को अपनी भाषा या बोली बोलने में दिक्कत होती है। वह किसी अन्य एक्सेंट में बात करने लगता है। यह आमतौर पर सिर या मस्तिष्क की चोट के चलते होता है। फॉरेन एक्सेंट सिंड्रोम महीनों, वर्षों या फिर जिंदगी भर के लिए रह सकता है। फॉरेन एक्सेंट सिंड्रोम का पहला मामला साल 1907 में आया था। उसके बाद से अब तक 100 मरीज मिले हैं।

इस सिंड्रोम से पीड़ित लोगों को अंग्रेजी शब्द S-T-R जैसे साउंड का उच्चारण करने में दिक्कत होती है। इसके अलावा, उन अक्षरों को बोलने में भी परेशानी होती है, जिन्हें बोलने के लिए जीभ को ऊपरी तालु में छुआना पड़ता है। कुछ शब्दों को बोलते हुए अचानक ही साउंड गायब हो जाती है या फिर कुछ नई साउंड जुड़ जाती है। अचानक पिच और टोन बदल जाती है।

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