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इंदिरा-बेनजीर की हत्याओं से सहमी दुनिया:सत्ता के लिए पहला कत्ल भाई का, ऑस्ट्रियाई प्रिंस की हत्या ने ली 2 करोड़ की जान

नई दिल्ली3 महीने पहलेलेखक: मृत्युंजय कुमार
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आज 31 अक्टूबर है। आज से 38 साल पहले देश की पहली महिला प्राइम मिनिस्टर इंदिरा गांधी की उनके दो बॉडीगार्ड्स ने ही गोली मार दी थी। दिल्ली एम्स में डॉक्टरों की पूरी टीम कई घंटों तक उनकी जान बचाने की कोशिश करती रही। उन्हें इस दौरान 88 बोतल ओ-निगेटिव ब्लड चढ़ाया गया। लेकिन 31 गोलियों से छलनी इंदिरा गांधी को बचाया नहीं जा सका। 31 अक्टूबर 1984 को दोपहर 2 बजकर 32 मिनट पर इंदिरा गांधी की मृत्यु की आधिकारिक घोषणा की गई।

इस हत्या ने देश को झकझोर कर रख दिया। हत्या और इसके बाद भड़के सिख विरोधी दंगे का जख़्म हर साल इसी वक्त सालने लग जाता है।

पिछले दिनों ही जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। 2021 में कैरेबियाई देश हैती के राष्ट्रपति जोवेनल मौसे की हत्या उनके घर में घुस कर की गई। इसी साल अफ्रीकी देश चाड के राष्ट्रपति इदरिस डेबी की भी हत्या हुई।

अपने देश की बात करें तो प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी भी एक आत्मघाती हमले में मारे गए थे। लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु को लेकर भी तमाम तरह की कॉन्सिपिरेसी की कहानियां कही जाती हैं। पड़ोसी देश पाकिस्तान में पूर्व पीएम बेनजीर भुट्टो भी पॉलिटिकल असैसिनेशन का उदाहरण है। इनके अलावा भी देश के कई राष्ट्रपति और प्रधानमंत्रियों की हत्या की साजिश की बातें सामने आती रही हैं।

इंदिरा गांधी की डेथ एनिवर्सरी पर हम दुनिया भर में हुई हेड ऑफ स्टेट्स की हत्याओं की वजह, इसके पीछे की सोच और इससे उस देश और दुनिया में आने वाले राजनीतिक-सामाजिक बदलावों पर बात करेंगे। बता दें कि पहले विश्वयुद्ध के पीछे की एक बड़ी वजह एक राजनीतिक हत्या थी।

सबसे पहले मर्डर और असैसिनेशन के कॉन्सेप्ट को समझ लीजिए

जब इंसान बोलना, चलना और आग जलाना भी नहीं जानते थे तब भी वो एक-दूसरे को मारा करते थे। इंसान जब हथियारों के बारे में नहीं जानता था, तब मर्डर दांतों से काटकर या नाखूनों से नोंचकर किए गए थे। बाद में पत्थरों और हड्डियों से बने हथियारों का चलन आया।

‘न्यू वर्ल्ड इनसाइक्लोपीडिया’ की परिभाषा के मुताबिक गैर-कानूनी तरीके से सोच-समझकर एक इंसान का दूसरे इंसान की जान लेना ‘मर्डर’ है।

ये तो बात हुई ‘नॉर्मल मर्डर’ की। जो आदिम सभ्यता की शुरुआत में एक पके फल या गुफा में जगह पाने के लिए होता था। आजकल अफेयर, पैसों का लेन-देन और रोड-रेज जैसी वजहों से भी कत्ल हो रहे हैं।

‘असैसिनेशन’ की बात करें तो यह मर्डर से थोड़ा अलग है। मरियम-वेबस्टर डिक्शनरी के मुताबिक जब किसी चर्चित शख्स आमतौर पर लीडर का मर्डर हो तो वह ‘असैसिनेशन’ कहलाता है। राजनीतिक वजहों के लिए किसी जानी-मानी पॉलिटिकल हस्ती का घात लगाकर या अचानक गुप्त रूप से हमला करके हत्या करना असैसिनेशन कहलाता है। असैसिनेशन राजनीतिक या सैन्य कारणों से कराया जाता है। इसका मकसद राजनेता के साथ उसकी सोच को खत्म करने की कोशिश होती है।

असैसिनेशन करने वाले को ‘असैसिन’ या ‘हिटमैन’ कहा जाता है। यह अरबी भाषा के शब्द- ‘हशीश’ (hashish) से आया है। जिसे निजारी इस्माइली समूह राजनीतिक विरोधियों का सफाया करने में इस्तेमाल करता था। इस हिसाब से देखें तो इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, बेनजीर भुट्टो, प्रेमदासा, शिंजो आबे का असैसिनेशन हुआ था।

दुनिया के पहले परिवार में भाई की हत्या कर दूसरा भाई बना धरती का शासक

बाइबिल, ओल्ड टेस्टामेंट के मुताबिक आदम और हव्वा का परिवार धरती का पहला परिवार था। आदम और हव्वा के दो बेटे हुए-केन और हाबिल।

आगे चलकर हाबिल गड़रिया बना और केन किसान। एक दिन केन और हाबिल ने ईश्वर यहोवा को भेंट देने की सोची। केन अपना कुछ अनाज और हाबिल भेड़ लेकर यहोवा से पास पहुंचे। यहोवा ने हाबिल के भेड़ को तो स्वीकार कर लिया, लेकिन केन को पापी बताते हुए उसके अनाज को लेने से इनकार कर दिया। इससे केन हाबिल से जल-भुन गया और उसने हाबिल की हत्या कर दी और धरती का अकेला शासक हो गया। यानी सृष्टि के पहले परिवार में सत्ता के लिए भाई ने भाई की हत्या की।

असैसिनेशन की बात मन में क्यों और कैसे आती है?

समाजशास्त्र और ह्यूमन बिहेवियर के जानकार प्रोफेसर डॉ. बीएस निगम बताते हैं- हमारा समाज शुरू में स्वच्छंद था। कोई किसी पर राज नहीं करता था। लेकिन सोशल कॉन्ट्रैक्ट के तहत हमने अपने कुछ अधिकार राज्य को दिए, जिससे शासन और शासक का जन्म हुआ। लेकिन आम लोगों के मन में अक्सर किसी कारणवश राज्य को लेकर एक गुस्सा होता है। अमूमन यह गुस्सा राजनीतिक विरोध, भाषण वगैरह के रूप में दिखता है। लेकिन जब यह असंतोष हद से बढ़ जाता है और वह सोच के साथ वह व्यक्ति जनता की आंख में खटकने लगता है और बात ‘असैसिनेशन’ तक जा सकती है।

हजारों साल से हो रही है शासकों की हत्या

सत्ता हासिल करने या किसी को सत्ता से बेदखल करने के लिए हत्याएं हजारों साल से होती आई हैं। 1962 ई. पू. यानी आज से 4 हजार साल पहले मिस्र के फैरोहो अमेनेमहट प्रथम की हत्या उनके अपने सिपाहियों ने ही कर दी थी। कई सभ्यताओं में भी राजनीतिक हत्याओं का जिक्र मिलता है। विश्व विजेता कहलाने वाले सिकंदर महान के पिता की भी हत्या हुई थी।

साल 2021-22 में ही दुनिया भर के कई प्रमुख राजनेताओं की हत्याएं हुईं

चाणक्य ने चंद्रगुप्त को सिखाई नीति, अशोक ने 100 भाइयों को मारा

आपने ‘चाणक्य नीति’ के बारे में सुना ही होगा। ये नीतियां आचार्य चाणक्य अपनी किताब ‘अर्थशास्त्र’ में लिख गए थे। 2500 साल पुरानी इस किताब में राजकाज चलाने और दुश्मनों से निपटने की तरकीब बताई गई है।

चाणक्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के गुरु भी थे। आगे चलकर सम्राट चंद्रगुप्त के पोते अशोक महान मगध की गद्दी पर बैठे। शासक बनने के लिए सम्राट अशोक ने अपने 100 सौतेले भाइयों की हत्या करवा दी। उन्होंने सभी को एक कुएं में फिंकवा दिया। प्राचीन पाटलिपुत्र यानी पटना में यह ‘अगम कुआं’ आज भी मौजूद है।

एक असैसिनेशन के चलते 2 करोड़ लोगों की मौत और 2.2 करोड़ अपंग हुए

क्या आप यकीन करेंगे कि एक हत्या के चलते 2 करोड़ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और 2.2 करोड़ अपंग हो गए। जी हां; बिलकुल ऐसा ही हुआ था 1914 में।

28 जून 1914 को ऑस्ट्रिया के राजकुमार फ्रांसिस फर्डिनेंड अपनी पत्नी के साथ सर्बिया के दौरे पर गए थे। इसी दौरान किसी ने राजकुमार और उनकी पत्नी की हत्या कर दी।

फ्रांसिस फर्डिनेंड ऑस्ट्रिया के अगले राजा बनने वाले थे। इस हत्या से ऑस्ट्रिया के लोगों में काफी गुस्सा था।

जिसके बाद ऑस्ट्रिया ने हंगरी के साथ मिलकर सर्बिया पर हमला कर दिया। बाद में और भी देश दोनों तरफ से जुड़ते चले गए और पहला विश्वयुद्ध हुआ। 1918 तक चले इस युद्ध में 2 करोड़ से ज्यादा सिपाही और नागरिक मारे गए और करीब इतने ही घायल भी हुए।

दुनिया भर में हेड ऑफ स्टेट के मर्डर के कुछ चर्चित मामलों पर एक नजर-

नाटक देख रहे अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को जब नाटक के एक्टर ने ही मार दी गोली

14 अप्रैल 1865 को अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को वॉशिंगटन के ‘फोर्ड थिएटर’ में उस समय गोली मार दी गई, जब वो ‘अवर अमेरिकन कज़न’ नाटक देख रहे थे। गोली मारने वाला शख्स उसी नाटक टीम का हिस्सा था। उसने परफॉर्मेंस के दौरान ही अब्राहम लिंकन के सिर में गोली मारी।

लिंकन का हत्यारा जॉन बूथ अमीर परिवार का एक नामी एक्टर था। वह लिंकन की नीतियों से खफा था। अब्राहम लिंकन ने अमेरिका में गुलामी प्रथा को गैर-कानूनी कर दिया था। जिसके बाद गुलामों की खरीद-फरोख्त बंद हो गई। कई रसूखदार अमेरिकी इसी बात को लेकर लिंकन से काफी नाराज थे।

अमेरिका की आजादी के 250 साल के इतिहास में 45 राष्ट्रपति हुए। हर 10वें राष्ट्रपति की हत्या हुई। इनमें से 4 की हत्या पद पर रहते हुए कर दी गई।

चीन युद्ध में भारत की मदद करने वाले केनेडी की हत्या आज भी राज

जॉन एफ केनेडी की हत्या की गुत्थी आज भी अनसुलझी है। अमेरिका के 35वें राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी (JFK) 1962 के भारत-चीन युद्ध में भारत के मददगार साबित हुए थे। कहा जाता है कि उनकी कोशिशों के चलते ही चीन को जीते हुए इलाकों से पीछे हटना पड़ा था।

केनेडी भारत को सैन्य मदद देना चाहते थे। इसके लिए वो भारत की यात्रा करना चाहते थे। लेकिन इस योजना के अमल में आने से पहले ही अमेरिका के सबसे युवा राष्ट्रपति रहे केनेडी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

22 नवंबर 1963 को केनेडी का काफिला टेक्सस में डलास एयरपोर्ट से शहर की तरफ बढ़ रहा था। वे खुली गाड़ी में सवार थे, तभी उन पर एक इमारत से तीन गोलियां चलाई गईं। दो गोलियां उनके सिर और एक गले में लगी।

बाद में ली हार्वी ओसवाल्ड नाम के एक पूर्व अमेरिकी सैनिक को केनेडी की हत्या के जुर्म में गिरफ्तार किया गया। बताया गया कि वह एक ‘कम्युनिस्ट’ था; जिसने क्यूबा के नेता फिदेल कास्त्रो को खुश करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या की।

हालांकि वॉरेन कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया कि 'इस बात के कोई सबूत नहीं है कि ली हार्वे ओसवाल्ड या जेक रूबी किसी घरेलू या विदेशी साजिश का हिस्सा थे’। इस हत्या का कारण और हत्यारों की ठीक-ठीक संख्या का पता अभी भी नहीं चला है।

पड़ोसी देश पाकिस्तान के पहले ही पीएम की हत्या हुई

बंटवारे से पहले नेहरू मंत्रिमंडल में वित्त मंत्री रहे लियाकत अली खान बंटवारे के बाद पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने। वो जिन्ना की पहली पसंद थे। लेकिन पाकिस्तान की सेना और बाकी नेता उन्हें एक कमजोर पीएम समझते थे। जिन्ना की मौत के बाद उनको सत्ता से हटाने की कोशिश की जाने लगी। फौज के कुछ जनरलों ने तख्तापलट की कोशिश भी की; लेकिन उसे नाकाम कर दिया गया।

जिसके बाद 16 अक्टूबर 1951 को पाकिस्तान के रावलपिंडी में मुस्लिम लीग की सभा में सरेआम लियाकत अली खान की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

वहां मौजूद गार्ड्स ने उसी वक्त हत्यारे को भी गोली मार दी। जिसके चलते यह कभी साफ नहीं हो पाया कि लियाकत अली खान की हत्या की असल साजिश किसकी थी।

लिट्टे ने 2 साल में भारत के पूर्व पीएम और श्रीलंका के प्रेसिडेंट को मारा

लिट्टे यानी लिबरेशन टाइगर्स तमिल ईलम श्रीलंका में अलग तमिल राज्य की मांग करने वाला उग्रवादी संगठन है। श्रीलंका में 1983 से 2009 तक चले गृहयुद्ध में इस संगठन की प्रमुख भूमिका रही थी।

1990 के आस पास यह संगठन इतना मजबूत हो गया कि इसने दो साल के भीतर ही भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और श्रीलंका के राष्ट्रपति की हत्या कर दी। दोनों हत्याएं सुसाइड बॉम्बर्स की मदद से की गई।

21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में चुनाव प्रचार करने गए देश के पूर्व पीएम राजीव गांधी काे लिट्टे की एक महिला सुसाइड बॉम्बर ने माला पहनाने के बहाने आत्मघाती बम विस्फोट कर दिया।

इस घटना के 2 साल बाद 1 मई 1993 को कोलंबो में श्रीलंका के राष्ट्रपति राणासिंघे प्रेमदासा की भी हत्या लिट्टे के एक सुसाइड बॉम्बर ने उसी तरीके से कर दी।

पाकिस्तान की सबसे युवा और पहली महिला पीएम बेनजीर की हत्या

मात्र 35 साल की उम्र में पाकिस्तान की पीएम बनने वाली बेनजीर भुट्टो किसी भी इस्लामिक कंट्री की पहली महिला हेड ऑफ स्टेट थीं। वो दो बार पाकिस्तान की पीएम रहीं। 27 दिसंबर, 2007 की शाम उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस दिन बेनजीर रावलपिंडी से चुनाव प्रचार कर लौट रही थीं, तभी उनकी कार पर हमला हो गया।

इस घटना के 15 साल बीत जाने के बाद भी दोषियों को सजा नहीं मिली है। यह मामला अभी लाहौर हाईकोर्ट में है। हत्या के बाद कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। लेकिन पाक एजेंसियां किसी के खिलाफ ठोस सबूत पेश नहीं कर पाईं।

आप ने यह जाना कि किस तरह एक राजकुमार की हत्या ने विश्व युद्ध को भड़का दिया था। यहां हम यह बता रहे हैं कि असैसिनेशन से आने वाली पीढ़ियों की जिंदगी कितनी बदली।

सिख दंगे ने बसाया विधवाओं का मोहल्ला, जख़्म आज भी हरे

राजधानी दिल्ली में एक मोहल्ला है, जिसे विडो कॉलोनी यानी विधवाओं का मोहल्ला कहा जाता है। यह मोहल्ला 1984 के सिख दंगों के बाद अस्तित्व में आया। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में अपने हंसते-खेलते परिवार के साथ रहने वाली महिलाओं की जिंदगी इंदिरा गांधी की हत्या के साथ ही बदल गई।

सिखों को चुन-चुनकर मारा गया। दिल्ली में ही 3 हजार से ज्यादा सिखों की हत्याएं हुईं। दंगे के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं और किस्मत को रोती मांएं अपने आंसुओं के साथ रह गईं; उनका घर लूटा जा चुका था, पति और बच्चे मार दिए गए थे। हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सरकार को दंगा पीड़ितों के परिवारों के लिए तिलक नगर एक मोहल्ला बसाना पड़ा। जहां उन्हें सिर छुपाने के लिए छत दी गई। आज भी वहां 84 की विधवाएं रहती हैं।

इसी विडो मोहल्ले में पम्मी कौर रहती हैं। वो बताती हैं कि दंगे में उनके सामने उनके घर के एक-एक सदस्य को चुन-चुन कर मार डाला गया। अपने आंसुओं को किसी तरह रोकते हुए पम्मी आगे बताती हैं- ‘ मेरे मोहल्ले के ज्यादातर पुरुष दंगे में मारे गए; महिलाएं भी मारी गईं। कुछ का रेप हुआ और जो बचीं वो यहां(विडो कॉलोनी) में जिल्लत और तंगहाली की जिंदगी जी रही हैं।’

31 अक्टूबर 1984 को हुए उस एक असैसिनेशन की कीमत इस मोहल्ले की महिलाएं आज तक चुका रही हैं। उनके लिए दिल्ली 1984 से पहले जैसा शहर शायद ही कभी हो पाए।

ग्राफिक्स: सत्यम परिडा

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