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गाउन और स्कर्ट में खेलती थीं महिला क्रिकेटर:पिच से छोटा होता था मैदान, बच्चा गिर जाएगा बोलकर 'क्रोकेट' खिलाते थे, आज तोड़ रहीं रिकॉर्ड

नई दिल्ली6 महीने पहलेलेखक: मृत्युंजय कुमार
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न्यूजीलैंड में 12वां विश्व महिला क्रिकेट का कप चल रहा। 8 देशों की महिला क्रिकेटर्स इस ‘इस जेंटलमैन’ गेम में अपना दम-खम दिखा रही हैं। तीन में से दो मैच जीत कर भारतीय महिला टीम भी वर्ल्ड कप के प्रबल दावेदारों में शामिल है। देश-दुनिया की निगाहें इस वर्ल्ड कप पर है। लेकिन महिलाओं का यहां तक पहुंचने का सफर बिलकुल भी आसान नहीं था।

आज भले ही क्रिकेट में ‘बैट्समैन’ की जगह ‘बैटर’ जैसे जेंडर न्यूट्रल शब्द लाए जा रहे हों। लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था। एक समय वह भी था जब महिलाओं को गाउन पहनकर पुरुषों की पिच से भी छोटे मैदान में ‘मिनी क्रिकेट’ खेलने को दिया जाता था। तब पुरुष क्रिकेटरों का मानना था कि यह ‘जेंटलमेन गेम’ मुश्किल और जोखिम भरा है, महिलाएं इसे नहीं खेल पाएंगी।

आगे बढ़ने से पहले महिला क्रिकेट पर अपनी राय देते चलें

आइए वुमन वर्ल्ड कप के बीच महिलाओं के क्रिकेट में रोचक सफर के बारे में जानते हैं। गाउन से लेकर, स्कर्ट और अब पुरुषों के ही जैसे कपड़े में ऐक जैसे नियमों के साथ खेला जाने वाला वुमन क्रिकेट समय के साथ किन बदलावों से गुजरा है...

1935 में क्रिकेट खेलती महिलाएं। तब मैच की ड्रेस सफेद होती थी लेकिन स्कर्ट में क्रिकेट खेला जाता था।
1935 में क्रिकेट खेलती महिलाएं। तब मैच की ड्रेस सफेद होती थी लेकिन स्कर्ट में क्रिकेट खेला जाता था।

कहां से आया ‘जेंटलमैन गेम’ का कॉन्सेप्ट

क्रिकेट को ‘जेंटलमैन गेम’ कहा जाता है, ये सब जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरुआत कहां से हुई? इतिहास को देखें तो इसकी शुरुआत के पीछे एक छोटा सा कारण नजर आता है, जो आज तक चला आ रहा है। विक्टोरियाई काल में ब्रिटेन के कुछ रईस शौकिया तौर पर क्रिकेट खेलते थे। वे आमतौर पर बल्लेबाजी किया करते थे। उन्हें ‘जेंटलमैन’ कहा जाता था। लेकिन फास्ट बॉलिंग और फील्डिंग जैसे कठिन काम रोजी-रोटी के लिए खेलने वाले पेशेवर खिलाड़ी करते थे। उन्हें ‘प्लेयर्स’ कहा जाता था। यही कारण है कि बैट्समैन और जेंटलमैन गेम जैसे शब्द प्रचलन में आए। क्रिकेट के ‘जेंटल’ होने का अलग से कोई वास्ता नहीं है।

क्रिकेट में महिलाओं ने एक से बढ़कर एक मुकाम हासिल किए हैं। वो इस खेल में खुद को पुरुषों के समान 'जेंटल' साबित कर चुकी हैं।
क्रिकेट में महिलाओं ने एक से बढ़कर एक मुकाम हासिल किए हैं। वो इस खेल में खुद को पुरुषों के समान 'जेंटल' साबित कर चुकी हैं।

महिलाओं के लिए क्रिकेट की जगह ‘क्रोकेट’ था

ब्रिटेन में 1850 के दौर में क्रिकेट अपना चोला बदल रहा था। महिलाओं ने भी इस खेल में रुचि लेनी शुरू की। लेकिन तब ब्रिटिश समाज में महिलाओं के लिए कठिन और प्रतिस्पर्धी खेलों को अच्छा नहीं माना जाता था। उस समय ऐसी सोच थी कि महिलाओं के ज्यादा खेलने-कूदने से उनकी मां बनने की क्षमता प्रभावित होती है। इसीलिए महिलाओं को क्रिकेट नहीं खेलने दिया जाता था। क्रिकेट की जगह उनके लिए ‘क्रोकेट’ का ईजाद किया गया।

इस खेल में महिलाएं हथौड़ीनुमा डंडों के सहारे गेंद को लुढ़काकर गोल करती थीं। जिसका उन्हें रन मिलता था। क्रोकेट का मैदान क्रिकेट की पिच से भी छोटा होता था। उच्च वर्गीय ब्रिटिश महिलाएं लंबे और भारी भरकम गाउन, झालर और टोपियां पहनकर इस खेल को खेलती थीं। यह खेल प्रतीकात्मक क्रिकेट जैसा था।

क्रोकेट खेलती ब्रिटिश महिलाएं। सोर्स- इलेस्ट्रेटेड लंदन न्यूज, 20 जुलाई 1872
क्रोकेट खेलती ब्रिटिश महिलाएं। सोर्स- इलेस्ट्रेटेड लंदन न्यूज, 20 जुलाई 1872

गाउन, स्कर्ट और फिर कॉमन जर्सी का दौर

महिला क्रिकेट का इतिहास ढाई सौ वर्षों से ज्यादा पुराना है। इस पूरे दौर में वुमन क्रिकेट ने ऐसे पड़ावों को पार किया है जैसे पुरुष क्रिकेटरों ने भी नहीं किए। इस बीच महिलाओं ने गाउन पहनकर छोटे से मैदान पर ‘क्रोकेट’ खेलने से लेकर क्रिकेट में पुरुषों का रिकॉर्ड तोड़ने का सफर तय किया है।

शुरुआती दौर में महिलाएं गाउन पहनकर क्रिकेट खेलती थीं। फिर आगे चल कर स्कर्ट और ढीली-ढाली शर्ट चलन में आई। इस दौर तक वुमन क्रिकेट की जर्सी पर फेमिनिन कपड़ों का प्रभाव साफ देखा जा सकता था। लेकिन 1980 के दशक के बाद के दौर में क्रिकेट में महिलाओं ने पुरुषों की जैसी ड्रेस पहननी शुरू की। खिलाड़ियों को यह ज्यादा कंफर्टेबल और सम्मानजनक भी लगा। आज महिला और पुरुष क्रिकेटर के कपड़ों में कोई अंतर नहीं है।

एक नजर में महिला क्रिकेट की अहम तारीखें
26 जुलाई 1745 को महिलाओं का पहला क्रिकेट मैच खेला गया था। लेकिन यह खेल मौजूदा क्रिकेट से काफी अलग होता था। इसके बाद 1887 में यार्कशायर में पहले महिला क्रिकेट क्लब की स्थापना हुई। 1958 में महिला क्रिकेट परिषद की स्थापना की गई। फिर 2005 में इसका ICC में विलय कर दिया गया। अब ICC ही महिला और पुरुष दोनों के क्रिकेट के नियमों को देखता है। भारतीय महिला टीम की बात करें तो उसने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच वेस्टइंडीज के खिलाफ 1976 में खेला था।

जेंडर न्यूट्रल शब्दों और महिला क्रिकेट का स्वर्णिम दौर

आज के दौर को महिला क्रिकेट के इतिहास का सबसे अच्छा दौर कहा जा सकता है। इस दौर में 'जेंटलमैन' की जगह 'जेंटलवुमन' और 'बैट्समैन' की जगह 'बैटर' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आज स्मृति मंधाना और मिताली राज जैसी भारतीय महिला क्रिकेटर किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं।

अब महिलाएं अंपायर और कमेंटेटर जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में भी नजर आने लगी हैं।
अब महिलाएं अंपायर और कमेंटेटर जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में भी नजर आने लगी हैं।

आज महिला क्रिकेटर 'जेंटलमैन गेम्स' कहे जाने वाले इस खेल में खुद को ‘जेंटल’ साबित कर रही हैं।

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