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अकबर के हरम में 5 हजार औरतें ,सलीम में 3सौ:बादशाह की फेवरेट मलिका के हाथ होती थी सल्तनत की कुंजी

2 महीने पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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  • मुगल मलिकाओं में था ढेरों टैलेंट
  • ट्रांसजेंडर होते थे हरम के रखवाले

अकबर और जोधाबाई पर बयान देकर बीजीपी विधायक रामेश्वर शर्मा विवादों में आ गए हैं। बयान के अनुसार राजपूत योद्धा सत्ता बचाने के लिए मुगलों को बेटियां दे देते थे। बवाल के बाद विधायक ने राजपूत समाज से माफी तो मांग ली लेकिन उसके इस बयान से मुगल काल में महिलाओं के हालात पर सवाल जरूर उठ रहे हैं, खासकर शाही घराने की उन महिलाओं पर जो हरम में रहती थीं।

हरम हमेशा ही कौतूहल का विषय
हरम हमेशा ही कौतूहल का विषय

राजपूत रानी और मुगल शहजादी दोनों का सिक्का चलता था
मुगल बादशाह शाहजहां और औरंगजेब के शासन को करीब से देखने वाले वेनिस घुमक्कड़ मनूची के अनुसार हरम में करीब 2 हजार रानियां होती थीं। इसमें मुस्लिम के साथ-साथ हिंदू, राजपूत और क्रिश्चियन महिलाएं शामिल थीं। 'अकबरनामा' लिखने वाले अबू फजल के अनुसार अकबर के समय हरम में करीब 5 हजार महिलाएं थी। इसमें उनकी मलिकाओं के साथ वो महिलाएं भी थीं, जो बगैर शादी रखी जाती थीं। इनके अलावा बादशाह के परिवार की दूसरी स्त्रियां भी होती थीं।

टर्की सल्तनत में भी हरम काफी सम्पन्न
टर्की सल्तनत में भी हरम काफी सम्पन्न

औरंगजेब का हरम था सूना
इतिहासकार बेनी प्रसाद के अनुसार राजकुमार के रूप में जहांगीर के हरम में करीब 300 महिलाएं रहती थीं। मजेदार बात यह है कि अपनी क्रूरता के लिए बदनाम औरंगजेब के समय में हरम में औरतों की संख्या काफी कम थी। इतिहासकारों ने औरंगजेब का धर्म की ओर झुकाव होने को इसकी वजह माना। धार्मिक लगाव की वजह से औरंगजेब को जिंदा पीर भी कहा जाता था।

हरम की बिल्डिंग होती है बहुत आकर्षक
हरम की बिल्डिंग होती है बहुत आकर्षक

चलता था छल और प्रपंच का खेल
हरम में मलिका अपने स्टेट्स के हिसाब से दासियां रखती थी। कोई 10 तो कोई 20 दासियां भी रख सकता था। ये सभी वैसे तो एक-दूसरे के साथ बेहद प्यार और अदब से पेश आती थीं लेकिन असल शक्ल कुछ और ही थी। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की एक स्टडी बताती है कि इनके बीच छल और प्रपंच का खुला खेल होता था। इनमें हमेशा यह डर रहता था कि अगर किसी मलिका ने राजकुमार को जन्म दे दिया तो उसका ओहदा ऊपर हो जाएगा। वह सुल्तान की फेवरेट बेगम बन जाएगी। इस कारण कई बार हरम की प्रेगनेंट औरतों को छल से जहर दे दिया जाता था। हरम में रहने वाली महिलाओं को उनके ओहदे के हिसाब से सैलरी और पेंशन भी मिलती थी। हरम की रानियों पर इतना खर्च किया जाता था कि बिस्तर के खांचों में भी सोने और चांदी के तारों का इस्तेमाल होता। चांदी के चमचमाते और सोने की दमकते थालियों और गिलासों में खाना परोसा जाता था ।

अपने रखरखाव पर खूब खर्च करती थी मलिकाएं
अपने रखरखाव पर खूब खर्च करती थी मलिकाएं

ट्रांसजेंडरों की पकड़
महिलाओं की सुरक्षा के लिए हरम के गेट पर ट्रांसजेंडरों को रखा जाता था। टर्की सल्तनत के हरम में भी ट्रांसजेंडर इन राजसी महिलाओं के राजदार होते थे। हालांकि कई बार ये डबल-क्रॉस करते और रानियों के राज बादशाह तक पहुंचा देते थे ताकि इनाम मिल सके। ऐसे ट्रांसजेंडर सुल्तान के बहुत करीबी होते थे और कई बार उन्हें ऊंचे ओहदे भी मिलते।

हरम में महिलाओं की शिक्षा पर भी दिया जाता था ध्यान
हरम में महिलाओं की शिक्षा पर भी दिया जाता था ध्यान

हरम की महिलाएं सुल्तान को भी देती थीं सलाह
हरम की बुद्धिमान महिलाओं को बादशाह बड़ी जिम्मेदारियां भी सौंपते थे। व्यापार से जुड़ी जिम्मेदारियां इसी में शामिल थीं। हरम की कई शहजादियों ने किताबें भी लिखी। हुमायूं की बहन गुलबदन बेगम की हुमायूंनामा इसी की मिसाल है। जहांगीर की बेगम नूरजहां को भी बहुत पढ़ी-लिखी माना जाता है। वे राजनैतिक और साहित्यिक दोनों मामलों में स्मार्ट थीं। कविताएं लिखने का जुनून था नूरजहां को। अरबी और फारसी भाषा पर उनकी गहरी पकड़ थी। अकबर की दाई मां माहम अनगा का हरम में बहुत रुतबा था। शुरुआती दौर में अकबर उनसे राजनैतिक मसलों पर सलाह लिया करते थे। अकबर के 1560 से 1562 तक के काल में हरम की मजबूत स्थिति की वजह से इसे 'पेटीकोट शासन' भी कहा गया।

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