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इंदिरा की हुई थी जबरदस्त जीत:कांग्रेस की तेज लहर में डूब गए थे बाकी दल, कई की जमानत जब्त हुई, विपक्ष का दर्जा भी छिना

नई दिल्ली16 दिन पहले
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7 जनवरी का दिन एक महिला का भारत की राजनीति में पूरी तरह स्थापित होने वाला दिन था। नेहरू युग के बाद किसी ने सोचा भी नहीं था कि देश को स्थायित्व देने का काम उनकी बेटी ही करेगी। जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री हुए मगर अकस्मात निधन ने देश का नेतृत्व किसे सौंपा जाता है। असमंजस की स्थित बनी हई थी। आखिर सत्ता नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी के हाथों में दी गई। लेकिन शुरुआती दौर में जनता को भी ऐसा लगा था कि इंदिरा गांधी से बेहतर भी और कोई प्रधानमंत्री हो सकते है। बाद में जनता पार्टी के हाथों में कमान आई। जनता को देश का नेतृत्व ढुलमुल नजर आया।

आखिरकार, 1980 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी की जोरदार जीत के साथ इंदिरा गांधी ने आज ही के दिन धमाकेदार अंदाज में सत्ता में वापसी की थी। 3-6 जनवरी 1980 को हुए सातवीं लोकसभा चुनाव के नतीजे 7 जनवरी को घोषित होना शुरू हुए और पहले ही दिन कांग्रेस की प्रचंड जीत साफ नजर आने लगी।

आखिरकार इन चुनावों में कांग्रेस ने 350 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करते हुए सत्ता में फिर से वापसी कर ली। कांग्रेस को इन चुनावों में उन हिंदी प्रदेशों में भी जोरदार सफलता मिली, जहां 1977 में उसे मुंह की खानी पड़ी थी।

हार के बाद जीतकर दिखाने वाली महिला

भारतीय राजनीति में इंदिरा गांधी ऐसी महिला हुई हैं जिन्होंने शासन किया, हारीं और फिर जीतकर दिखलाया। 1977 की ये जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि महज तीन साल पहले 1977 में हुए चुनावों में कांग्रेस को आजादी के बाद सबसे करारी शिकस्त मिली थी और पार्टी महज 154 सीटें ही सिमट गई थी। हालांकि, 1977 के चुनावों में देश की जनता की इंदिरा द्वारा लगाए गए आपातकाल को लेकर नाराजगी दिखी थी, जो कांग्रेस की सबसे करारी शिकस्त की वजह बनी थी।

7 जनवरी, 1980 को आए चुनाव परिणामों में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस शानदार बहुमत हासिल किया था
7 जनवरी, 1980 को आए चुनाव परिणामों में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस शानदार बहुमत हासिल किया था

उस हार के महज तीन साल बाद ही 1980 में हुए लोकसभा चुनावों में इंदिरा गांधी की जबरदस्त वापसी हुई। 1977 में इंदिरा गांधी की हार की वजह बनी जनता पार्टी को 1980 के चुनावों में जनता ने नकार दिया।

किसी को विपक्षी पार्टी बनने का भी नहीं मिला था मौका

कांग्रेस की जीत कितनी बड़ी थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोई भी अन्य पार्टी इतनी सीटें भी नहीं जीत पाई थी कि उसे आधिकारिक तौर पर विपक्षी पार्टी का भी दर्जा मिल पाता। कांग्रेस की दो मुख्य विरोधी पार्टियों, जनता पार्टी और लोकदल, को इतनी सीटें भी हासिल नहीं हुईं कि उन्हें राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल सके।

जनता दल ने 433 सीटों पर चुनाव लड़ा था पर उसे 31 पर ही जीत हासिल हुई थी। वहीं चौधरी चरण सिंह की जनता दल (सेक्युलर) को महज 8 सीटें ही मिल पाई थीं। जनता दल (सेक्युलर) ने 1980 के चुनावों से पहले अपना नाम लोकदल रख लिया था, लेकिन चुनाव आयोग ने उसे जनता दल (S) के रूप में ही मान्यता दी।

चुनावों में शानदार जीत के बाद इंदिरा गांधी 14 जनवरी 1980 से 31 अक्टूबर 1984 तक प्रधानमंत्री पद पर रहीं। PM रहते हुए ही 31 अक्टूबर 1984 को उनके बॉडीगार्ड्स ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। इंदिरा गांधी के बाद उनके पुत्र राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने।

1980 के चुनावों में इंदिरा गांधी के आगे विपक्ष पूरी तरह धराशायी हो गया था
1980 के चुनावों में इंदिरा गांधी के आगे विपक्ष पूरी तरह धराशायी हो गया था

भारत और दुनिया में 7 जनवरी की महत्वपूर्ण घटनाएं :

2017: पुर्तगाल के पूर्व राष्ट्रपति मारियो सोरेस का निधन हुआ।

2015: पेरिस में दो बंदूकधारियों ने चार्ली आब्दो के कार्यालय पर हमला किया, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई और 11 अन्य लोग घायल हो गए।

2009: IT कंपनी सत्यम के चेयरमैन रामालिंगम राजू ने अपने पद से इस्तीफा दिया।

2008: राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने विनोद राय को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के पद की शपथ दिलाई।

2003: जापान ने विकास कार्यों में मदद के लिए भारत को 90 करोड़ डॉलर की मदद की घोषणा की।

2000: जकार्ता (इंडोनेशिया) में हजारों मुसलमानों ने मोलुकस द्वीप समूह में ईसाइयों के विरुद्ध जेहाद की घोषणा की।

1999: अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के विरुद्ध महाभियोग की कार्रवाई शुरू हुई।

1989: जापान के सम्राट हिरोहितो का देहावसान, आकिहितो नए सम्राट घोषित।

1987: कपिल देव ने टेस्ट क्रिकेट में तीन सौ विकेट पूरे किए।

1972: स्पेन के इबीसा क्षेत्र में विमान दुर्घटना में चालक दल के छह सदस्यों समेत 108 यात्रियों की मौत।

1959: संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्यूबा में फिदेल कास्त्रो की नई सरकार को मान्यता प्रदान की।

1953: अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने हाइड्रोजन बम बनाने की घोषणा की।

1859: सिपाही विद्रोह मामले में मुगल शासक बहादुरशाह जफर (द्वितीय) के खिलाफ़ सुनवाई शुरू।

1761: पानीपत की तीसरी लड़ाई में अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली ने मराठों को हराया।

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