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महिलाओं का 'दिल' जिन पर आया, सत्तासुख उनको भाया:ट्रेंड बताते हैं- UP में 15 साल से जिस पार्टी पर लगाई मुहर, उसकी बनी सरकार

नई दिल्ली7 महीने पहलेलेखक: पारुल रांझा
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यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। राजनीतिक दल इस बार महिला वोटरों को लुभाने के लिए वादों में वह सब कुछ कवर करने की कोशिश कर रहे हैं, जिनके बारे में मतदाताओं ने सोचा भी नहीं था। पार्टियां नई-नई स्‍कीम और ऑफर का ऐलान कर एक दूसरे को पीछे छोड़ने की होड़ में लगी हैं। ऐसे में यह साबित हो गया है कि यूपी की सियासत में हार-जीत और वोटिंग पैटर्न सिर्फ 'जाति-धर्म-क्षेत्र'... इन तीन शब्दों पर नहीं, बल्कि 'आधी आबादी' की ताकत पर निर्भर करता है। आखिर ये आधी आबादी इतनी जरूरी क्यों है? इसे जानने के लिए विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की महिला वोटर्स का मिजाज समझना जरूरी है।

जिसे मिला महिलाओं का साथ, उसी पार्टी की बनी सरकार
UP में महिला वोटों की स्टडी करें तो पता चलता है कि 2007 विधानसभा चुनाव से अब तक महिलाओं ने जिस दल पर भरोसा जताया है, उसी के सिर पर जीत का सेहरा बंधा। शायद यही वजह है कि इस बार के चुनाव में लगभग सभी दल महिला वोटरों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।

सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डिवेलपिंग सोसाइटी (CSDS) के आंकड़ों के अनुसार 2007 के बाद से अब तक हुए सभी विधानसभा चुनावों में महिला मतदाताओं के वोटों के आधार पर जो आंकड़े इकट्ठा किये, वे बड़े दिलचस्प हैं। मतलब अभी तक जिस भी पार्टी को महिलाओं ने किया पसंद, उसी को सत्ता की कमान हाथ लगी।

क्या कहते हैं आंकड़े

  • 2007 में बीएसपी को 32%, सपा को 26 %, बीजेपी को 16% और कांग्रेस को 8% महिलाओं ने वोट किया था। 2007 में मायावती को सत्ता की कमान मिली थी।
  • 2012 के चुनाव में सपा को 31%, बीएसपी को 25%, बीजेपी को 14% और कांग्रेस को 12% महिलाओं ने वोट किया था। तब आखिलेश यादव सूबे के सीएम बने थे।
  • 2017 में बीजेपी को रिकॉर्ड 41% महिलाओं ने वोट किया था। जबकि बीएसपी को 23%, सपा को 20% और कांग्रेस को महज 5% महिलाओं ने वोट दिया था।

आधी आबादी को लेकर मुकाबला
इन आंकड़ों से साफ है कि यूपी में इस बार आधी आबादी की लड़ाई है लेकिन महिला वोटरों का आशीर्वाद किसे मिलेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। महिला वोटर्स की ताकत को बिहार चुनाव में भी देश ने देखा था। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते नजर आए थे कि साइलेंट वोटर यानी महिलाएं ही बिहार में बीजेपी की जीत की वजह हैं। इस बार भी यूपी में महिलाओं से अच्छे मतदान की उम्मीद है। विभिन्न जिलों में अफसर भी इसी हिसाब से तैयारी कर रहे हैं। तमाम तरह के अभियान चलाए जा रहा है। डीएम-एसएसपी समेत अन्य सभी अफसर गांव-गांव भ्रमण कर रहे हैं।

यूपी में इस बार महिला वोटरों का आशीर्वाद किसे मिलेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
यूपी में इस बार महिला वोटरों का आशीर्वाद किसे मिलेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

महिलाओं तक अपनी बात पहुंचाना चुनौती
बता दें कि राजनीतिक गहमा-गहमी में महिलाएं को लेकर अलग ही माहौल प्रदेश में चल रहा है। हर दल यह बताने में लगा है कि उसे महिलाओं की कितनी फिक्र है। लेकिन कोविड-19 की तमाम गाइडलाइन के चलते महिलाओं से मात्र डोर टू डोर जाकर ही प्रत्याशी संपर्क कर पा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में रहने वाली कई महिलाएं इंटरनेट मीडिया से दूर रहती हैं। ऐसे में उन तक अपनी बात पहुंचाना सभी के लिए चुनौती से कम नहीं। युवा मतदाता अपनी फैमिली की महिलाओं को अपने हिसाब से वोट डालने के लिए प्रेरित करेंगे। इस वजह से महिला वोटर कहीं ना कहीं अपना वोट युवा वोटर्स के भरोसे डाल सकती हैं।

महिलाएं करती हैं बड़ी तादाद में वोट
पुरुषों की तुलना में महिलाएं बड़ी तादाद में वोट करती हैं। 2012 के विधान सभा चुनाव में पोलिंग बूथ तक जहां 58.68% पुरुष पहुंचे पाए थे, वहीं 60.28% महिलाओं ने अपने मत का प्रयोग किया। इस बार महिला वोटर्स की तादाद बढ़ने के साथ ही वे वोट से चोट करेंगी।

ग्रामीण इलाकों में रहने वाली कई महिलाएं इंटरनेट मीडिया से दूर रहती हैं। उन तक बात पहुंचाना सभी दलों के लिए चुनौती से कम नहीं।
ग्रामीण इलाकों में रहने वाली कई महिलाएं इंटरनेट मीडिया से दूर रहती हैं। उन तक बात पहुंचाना सभी दलों के लिए चुनौती से कम नहीं।

क्या गिफ्ट कॉम्पिटिशन बदलेगा महिला वोटर्स का मूड?
अब तक यूपी चुनावों में फ्री में चीजें बांटने का दांव काम नहीं आया है। हालांकि, अन्य राज्यों में राजनीतिक पार्टियों को ऐसे ऐलान से फायदा मिला है। राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यूपी की महिला वोटर्स लोकलुभावन में नहीं पड़ती हैं। फ्री गिफ्ट्स युवाओं को आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन एक जागरूक मतदाता चुनावी वादों के बजाय तरक्की की रफ्तार पर विश्वास रखता है।