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1857 में डूबे जहाज से मिली मां-बच्चे की तस्वीर:समुद्री तूफान में फंसकर डूबा, इसमें लदा सोना अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े खजाने का हिस्सा

नई दिल्ली8 महीने पहले
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साल 1857 में एसएस सेंट्रल अमरीका नाम का जहाज समुद्री तूफान में फंसने के बाद डूब गया था। यह जहाज कैलीफोर्निया के करीब 425 लोगों और तीन टन सोने को पनामा से न्यूयॉर्क लेकर जा रहा था। तभी साउथ कैरोलिना के पास समुद्री तूफान में फंसने के चलते यह डूब गया।

इसी के साथ जहाज पर लदा हजारों पौंड का सोना समुद्र के गर्त में समा गया। हाल ही में एसएस सेंट्रल के मलबे से बरामद तस्वीरें पहली बार जनता के सामने आई हैं।

बेहद डरावनी ये तस्वीरें उन 425 लोगों के रिश्तेदारों की थी, जिन्हें जहाज डूबने की घटना के दौरान अपनी जान गंवानी पड़ी। समुद्र तल से एक मां और बच्चे की तस्वीर भी मिली है। ये तस्वीरें बेशक डरावनी है लेकिन लोगों के चेहरों को देखकर लगता है कि वे भी बिल्कुल हमारे जैसे ही थे, लेकिन कपड़े और फैशन बदल गए हैं। जानिए अमेरिका के समुद्री जहाज एसएस सेंट्रल की पूरी कहानी...

1990 के आसपास मलबे से पहली बार सोना बरामद हुआ

साल 1857 में पनामा से न्यूयॉर्क आ रहे एसएस सेंट्रल अमरीका नामक जहाज के समुद्र में 2.2 किमी गहराई में डूबने से इस पर सवार सभी 425 यात्रियों की मौत हो गई थी। जहाज पर लदा हजारों पौंड सोना समुद्र के गर्त में समाने के बाद देश में आर्थिक संकट शुरू हो गया। इस खजाने को हासिल करने के लिए कई लोगों ने कोशिश की लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली।

एसएस सेंट्रल अमरीका के मलबे से एक मां और बच्चे की तस्वीर मिली है। ये तस्वीरें बेशक डरावनी है लेकिन लोगों के चेहरे को देखकर लगता है कि वे भी बिल्कुल हमारे जैसे ही थे। (फोटो- कैलिफोर्निया गोल्ड मार्केटिंग ग्रुप के सौजन्य से)
एसएस सेंट्रल अमरीका के मलबे से एक मां और बच्चे की तस्वीर मिली है। ये तस्वीरें बेशक डरावनी है लेकिन लोगों के चेहरे को देखकर लगता है कि वे भी बिल्कुल हमारे जैसे ही थे। (फोटो- कैलिफोर्निया गोल्ड मार्केटिंग ग्रुप के सौजन्य से)

विशेषज्ञों के मुताबिक डूबने से पहले जहाज में 21 टन सोना मौजूद था। जहाज में इतनी मात्रा में सोना लाने के पीछे वजह यह थी कि न्यूयॉर्क में आर्थिक तंगी से जूझ रहे बैंकों की मदद की जा सके। लेकिन जहाज डूबने की घटना से देश में खलबली मच गई। इसके बाद सोना बरामद करने के लिए अभियान शुरू किया गया।

1990 के आसपास मलबे से पहली बार सोना बरामद हुआ। लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि सोने की कितनी मात्रा बची है। यह भी माना जाता है कि अब भी जहाज का 95 प्रतिशत मलबा नहीं खोजा सका है। बता दें एसएस सेंट्रल अमेरिका के अलावा विश्व के सबसे प्रसिद्ध जहाज़ के रूप में टाइटैनिक का नाम याद आता है। टाइटैनिक का डूबना भी अपने समय की सबसे बड़ी दुर्घटना साबित हुई, जिसमें 1,517 लोगों ने जिंदगी खोई।

थॉम्पसन ने लगाया था इस जहाज का पता
एसएस सेंट्रल जहाज का पता पहली बार साल 1988 में एक समुद्री विशेषज्ञ थॉमस थॉम्पसन ने लगाया था। उन्होंने ही सोना खोजने का शुरुआती अभियान चलाया था। थॉम्पसन ने अपने अभियान को सफल बनाने के लिए 160 से ज्यादा निवेशकों को फंडिंग के लिए तैयार किया। उन्होंने कड़ी मेहनत कर महासागर के गहरे पानी में उतरकर खजाने को आसानी से वापस लाने के लिए तकनीक ईजाद की। इसी के साथ वे 19वीं सदी के दुर्लभ सिक्के, डूबे हुए जहाज की बेल और सोने की रॉड पाने में कामयाब हुए।

ये तस्वीरें उन लोगों के रिश्तेदारों की थी, जिन्हें जहाज डूबने की घटना के दौरान अपनी जान गंवानी पड़ी। (फोटो- कैलिफोर्निया गोल्ड मार्केटिंग ग्रुप के सौजन्य से)
ये तस्वीरें उन लोगों के रिश्तेदारों की थी, जिन्हें जहाज डूबने की घटना के दौरान अपनी जान गंवानी पड़ी। (फोटो- कैलिफोर्निया गोल्ड मार्केटिंग ग्रुप के सौजन्य से)

सोना अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े खजाने का हिस्सा
1989 में थॉम्पसन ने कहा था कि यह सोना अमेरिका के इतिहास के सबसे बड़े खजाने का हिस्सा है। वहीं, अभियान में मदद करने वाले निवेशकों का कहना था कि थॉम्पसन मुनाफा बांटने में नाकामयाब रहे। साल 2000 में थॉम्पसन के धोखे से नाराज निवेशकों ने उन्हें कोर्ट में चुनौती दी। उनका आरोप लगाया कि थॉम्पसन ने सोना बेचकर सारा मुनाफा अपने पास ही रख लिया। 2012 में कोर्ट के सामने हाजिर न होने के बाद उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया।

गर्लफ्रेंड के साथ किराए पर रह रहे थे थॉम्पसन
थॉम्पसन फ्लोरिडा में अपनी गर्लफ्रेंड के साथ किराए पर रह रहे थे। इस बात की सूचना जब अधिकारियों को मिली तो, वे मौके पर पहुंचे। लेकिन उस वक्त तक थॉम्पसन फरार हो गए थे। लंबी तलाश के बाद 2015 में थॉम्पसन को पुलिस ने गिरफ्त में लिया। उन्हें जेल में तब तक रखने का आदेश दिया गया, जब तक कि वह 3 टन सोने का पता नहीं बता देते। माना जाता है कि करीब 2 शताब्दी से लापता अमेरिका के खजाने की जानकारी सिर्फ थॉम्पसन को है। इसलिए उन्हें जेल से बाहर रखना जोखिम भरा माना गया। अमेरिका में आज भी यही उत्सुकता है कि कब थॉम्पसन समुद्र में डूबे सोने के राज का खुलासा करेंगे।

टाइटैनिक ऐसा जहाज़ था, जिसे ‘द अनसिंकेबल' यानी कभी न डूबने वाले जहाज़ की संज्ञा दी गई थी। टाइटैनिक को विश्व प्रसिद्धि दिलाने के पीछे फिल्म निर्देशक जेम्स कैमरून का भी हाथ है।
टाइटैनिक ऐसा जहाज़ था, जिसे ‘द अनसिंकेबल' यानी कभी न डूबने वाले जहाज़ की संज्ञा दी गई थी। टाइटैनिक को विश्व प्रसिद्धि दिलाने के पीछे फिल्म निर्देशक जेम्स कैमरून का भी हाथ है।

टाइटैनिक का डूबना भी समय की सबसे बड़ी दुर्घटना
टाइटैनिक ऐसा जहाज़ था, जिसे ‘द अनसिंकेबल' यानी कभी न डूबने वाले जहाज़ की संज्ञा दी गई थी। टाइटैनिक को विश्व प्रसिद्धि दिलाने के पीछे फिल्म निर्देशक जेम्स कैमरून का हाथ है, जिनकी इस जहाज़ पर निर्मित फ़िल्म उस समय फ़िल्म इतिहास की सबसे अधिक कमाई करने वाली फ़िल्म साबित हुई थी।

आश्चर्यजनक रूप से टाइटैनिक के डूबने से 14 वर्ष पहले एक उपन्यास प्रकाशित हुआ था, जिसका नाम था ‘द रैक ऑफ़ टाइटन, ऑर फ्युटिलिटी'। इस उपन्यास की कथा और टाइटैनिक की घटना में कई समानताएं थीं। उपन्यास में टाइटन नामक जहाज़ एक हिमखंड से टकराया था। टाइटैनिक की गति थी 22.5 नॉटिकल मील, वहीं उपन्यास के जहाज़ टाइटन की गति थी 25 नॉटिकल मील। टाइटन में 2,500 यात्री सवार थे और टाइटैनिक में 2,200। दोनों ही जहाज़ अंग्रेज़ों के थे।