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मौत का ऐसा 'नाच', 400 लोग मरे:खुशी थी या पागलपन अब तक नहीं चला पता, किसी ने बताया हिस्टीरिया तो कोई बोला-भूत-प्रेत का चक्कर

नई दिल्लीएक महीने पहले
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हमेशा से ही माना जाता है कि डांस करने से ख़ुशी मिलती है। ये फ़िटनेस का एक तरीक़ा है। साथ ही ख़ुद को एक्सप्रेस करने का भी बेहतर जरिया होता है। लेकिन 1518 में रोम साम्राज्य के एक शहर में लोगों के लिए डांस मौत बनकर आई। इतिहासकारों ने उस घटना को ‘डांसिंग प्लेग’ का नाम दिया।

बिना संगीत फ्राउ एक हफ़्ते तक लगातार नाचती रही

1518 का जुलाई महीना। फ्रांस का शहर स्ट्रासबर्ग (तब का रोमन साम्राज्य), जिसे दुनिया ‘द कैपिटल ऑफ क्रिसमस’ के नाम से भी जानती है। प्रचंड गर्मी के बीच फ्राउ ट्रोफिया नाम की एक महिला इस शहर की गलियों में डांस करना शुरू करती है। बिना संगीत, चेहरे पर बिना भाव वो एक हफ़्ते तक नाचती रही। वो नहीं रूकती। वो रूक भी नहीं सकती थी। पसीने से लथपथ होती, गिरती फिर उठकर बिना मतलब बस नाचने लगती। उसकी बॉडी पर भूख, दर्द सबका असर दिखने लगा था। शहर के लोग उसे देख रहे थे। लेकिन जब तक उसे रोका जाता, तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी। एक-एक करके लोग उसके साथ नाचने लगे। वो सारे लोग भी फ्राउ की तरह ख़ुद को रोक नहीं पा रहे थे। सबके पैर खून से लथपथ थे। अकेली फ्राउ से शुरू हुए डांस को पहले 34 लोगों ने ज्वाइन किया, फिर ये आंकड़ा सैकड़ों तक पहुंच गया। उसके बाद जो हुआ वो ‘डांसिंग प्लेग’ या ‘डांस प्लेग’ कहलाया।

इस अजीब घटना को लेकर कई कहानियां चलती हैं लेकिन असल में क्या हुआ वो किसी को नही पता।
इस अजीब घटना को लेकर कई कहानियां चलती हैं लेकिन असल में क्या हुआ वो किसी को नही पता।

400 लोग ‘डांसिंग प्लेग’ का शिकार हुए

फ्राउ के साथ हर रोज़ डांस करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही थी। लोग लहराते, एक-दूसरे पर गिरते-पड़ते और मरने तक नाचते जा रहे थे। सितंबर तक 400 लोग उस डांसिंग उन्माद का शिकार बन गए थे। कई रिपोर्ट के मुताबिक़ उस मास हिस्टीरिया की वजह से एक दिन में 15-15 लोग मर रहे थे। ज़्यादातर की मौत हीट अटैक, स्ट्रोक, कमजोरी से हो रही थी। स्थानीय ऑफिशियल को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि चल क्या रहा है। वो बस आश्चर्यचकित होकर नजारा देखते रहे। दो महीने तक चले इस पागलपन के बाद एक दिन सबकुछ ख़ुद ब ख़ुद ख़त्म हो गया।

डांस प्लेग की कई थ्योरियों में एक भूत-प्रेत की भी

'डांसिंग प्लेग' को लेकर कई सारी थ्योरी हैं। उस समय के डॉक्टरों का मानना था कि ये हॉट ब्लड की वजह मास हिस्टीरिया बना। तो वही मॉर्डन थ्योरी ने इसकी एक वजह फ़ूड पॉइजनिंग को माना। एक थ्योरी भूत-प्रेत तंत्र-मंत्र को लेकर भी चली। वेंडरबिल्ट मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर टिमोथी जोन्स के थ्योरी के मुताबिक़ 14वीं से 16वीं शताब्दी के बीच यूरोप और फ्रांस के देशों में मौसम में अचानक से कई परिवर्तन देखे गए। कभी यहां तेज गर्मी होती को कभी सूखे की मार, तो कभी तेज बारिश के साथ ओले गिरते। लोगों में मोतियाबिंद, सिफलिस, कुष्ठ रोग जैसी बीमारियां भी फैल रही थी।

कहा जाता है कि डांस प्लेग में जो बचे उन्हें ठीक करने के लिए माउंटेन पर बने धार्मिक स्थल ले जाया गया।
कहा जाता है कि डांस प्लेग में जो बचे उन्हें ठीक करने के लिए माउंटेन पर बने धार्मिक स्थल ले जाया गया।

आर्थिक और शारीरिक रूप से कष्ट झेल रहे लोगों के दिमाग़ पर काफी गहरा असर हुआ था। सबसे दिलचस्प बात ये थी कि इस बीमारी से निपटने के लिए भी डांस ही तरीक़ा था। शहर के अथॉरिटी ने स्टेज बनवाया, जहां म्यूजिशियन को रखा गया ताकि डांस प्लेग से पीड़ित नाच सके।

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