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लेस्बियन लड़कियों के सीक्रेट्स:150 साल पहले बना था यह शब्द, भारत-पाकिस्तान की महिलाओं को भी एक-दूजे से हुआ प्यार

नई दिल्ली3 दिन पहलेलेखक: ऐश्वर्या शर्मा
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प्यार, इश्क, मोहब्बत…ये ऐसे लफ्ज हैं जो इंसान को खास होने का एहसास कराते हैं और किसी खूबसूरत रिश्ते को शुरू करने की ताकत देते हैं। लेकिन अगर यह एहसास लड़की को लड़की के लिए हो जाए तो समाज इस रिश्ते को नहीं स्वीकारता। जबकि कानून की नजर में यह रिश्ता अब लीगल है फिर भी हमारी सोसायटी लेस्बियन रिश्ते को अजीब नजरों से देखती है।

आइए प्राइड मंथ में हम आपको बताते हैं लेस्बियन लड़कियों की दुनिया कैसी होती है। साथ ही यह जानकारी भी देते हैं कि इस शब्द का जन्म कब, कहां और कैसे हुआ।

ऐसे बना 'लेस्बियन' शब्द!

क्या प्यार लड़के-लड़की में ही हो सकता है? अगर आप ऐसा सोचते हैं तो आप गलत हैं। प्यार जेंडर, जाति, उम्र या धर्म देखकर नहीं, इंसान का खूबसूरत मन देखकर होता है। लेस्बियन कपल्स का प्यार भी कुछ ऐसा ही है। लेकिन लेस्बियन किसे कहते हैं?

इस शब्द का संबंध ग्रीक आइलैंड लेस्बोस से है। यहां छठी शताब्दी की ग्रीक कवयित्री ‘सेप्फो’ रहती थीं। उनकी कविताएं महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी, उनके रिश्तों और रीति-रिवाजों पर आधारित थीं। उन्होंने औरतों की खूबसूरती और उनके प्रति अपने प्यार को कविताओं में बुना।

19वीं शताब्दी के मध्य से पहले तक लेस्बोस आइलैंड में लेस्बियन शब्द कई चीजों से जुड़कर चलन में आ गया था। वहां बनने वाली मशहूर वाइन का नाम भी इसी पर था।

1875 में जॉर्ज सेंट्सबरी ने लेस्बियन पर अध्ययन करते वक्त बौडलेयर की कविताओं पर शोध किया। अपने अध्ययन में उन्होंने 'द पैशन ऑफ डेलफाइन' का उदाहरण दिया। इस कविता में 2 महिलाओं के बीच की मोहब्बत का जिक्र है। एक महिला को दूसरी महिला खूबसूरत लगने लगी थी।

लेस्बियन शब्द उस कपल के लिए इस्तेमाल होता है, जहां एक लड़की का दूसरी लड़की के साथ संबंध होता है। इस रिश्ते को 1970 में यह चिन्ह ⚢ मिला।

भारत में पहली बार 'इस्मत चुगताई' ने लिखी लेस्बियन रिश्ते पर कहानी

भारतीय इतिहास में पहली बार उर्दू की मशहूर लेखिका इस्मत चुगताई ने लेस्बियन रिश्तों पर कहानी लिखी। इसका नाम 'लिहाफ' था। 1942 में जब यह कहानी पहली बार अदब-ए-लतीफ में छपी तो उन्हें कोर्ट में केस तक लड़ना पड़ा, जिसमें उन्हें जीत भी मिली। उनकी कहानी जिसने भी पढ़ी, वह उनका मुरीद हो गया था।

इन्होंने बदली प्यार की परिभाषा

डेल मार्टिन और फील्लिस लेऑन: इनकी मोहब्बत ने बदला कोर्ट का फैसला

इस अमेरिकी लेस्बियन जोड़े की मुलाकात 1950 में हुई थी। 1952 में दोनों को मोहब्बत हुई। यह जोड़ा लेस्बियन एक्टिविस्ट बना। इन्होंने 1955 में सैन फ्रांसिस्को में अमेरिका की पहली लेस्बियन कम्यूनिटी के लिए सोशल ऑर्गेनाइजेशन खोला। उन्होंने 12 फरवरी 2004 में शादी की। सैन फ्रांसिस्को में इस तरह की पहली शादी थी। लेकिन कैलिफोर्निया सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया। लेस्बियन रिश्ते को कानूनी दर्ज मिलने के बाद इस कपल ने 16 जून 2008 में दोबारा शादी की।

डेल मार्टिन और फील्लिस लेऑन ने अमेरिका में अपने रिश्ते को मान्यता दिलाने के लिए जंग जीती ।
डेल मार्टिन और फील्लिस लेऑन ने अमेरिका में अपने रिश्ते को मान्यता दिलाने के लिए जंग जीती ।

एलेन डीजेनरेस और पोरटिया दे रोस्सी: पार्टी में हुई मुलाकात प्यार में बदली

हॉलीवुड एक्ट्रेस एलेन डीजेनरेस और पोरटिया दे रोस्सी की मुलाकात 2000 में हुई थी। दोनों के बीच तुरंत एक स्ट्रॉन्ग केमिस्ट्री बन गई। 2004 में एक फोटोशूट के दौरान ये दोनों दोबारा मिले और एहसास हुआ कि उनका प्यार सच्चा है। इस कपल ने 2008 में शादी की। पोरटिया दे रोस्सी ऑस्ट्रेलियन-अमेरिकन एक्ट्रेस और बिजनेस वुमन हैं।

एलेन डीजेनरेस और पोरटिया दे रोस्सी की एक फोटोशूट के दौरान हुई थी मुलाकात।
एलेन डीजेनरेस और पोरटिया दे रोस्सी की एक फोटोशूट के दौरान हुई थी मुलाकात।

सुंदास मलिक और अंजलि चक्र: पाकिस्तान और भारत नहीं आए बीच में

पाकिस्तान और भारत के बीच कैसे संबंध है, सब जानते हैं। लेकिन मोहब्बत सरहद नहीं देखती। पाकिस्तानी आर्टिस्ट सुंदास मलिक और भारतीय हिन्दू परिवार से ताल्लुक रखने वाली अंजलि चक्र ने इन तमाम बातों को पीछे छोड़कर एक दूसरे का हाथ थामा। दोनों एक डेटिंग ऐप पर मिले थे। इस लेस्बियन जोड़े के प्यार के चर्चे सोशल मीडिया की बदौलत पूरी दुनिया में हुए।

सुंदास मलिक और अंजलि चक्र एकसाथ न्यूयॉर्क में रहती हैं।
सुंदास मलिक और अंजलि चक्र एकसाथ न्यूयॉर्क में रहती हैं।

भारत में लेस्बियन कपल की शादी

22 जुलाई 2011 में हरियाणा के गुड़गांव डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में पहली लेस्बियन शादी हुई। सविता को पति और वीना को पत्नी माना गया। वहीं, 29 दिसंबर 2021 में पारोमिता मुखर्जी और सुरभि मित्रा ने नागपुर में सगाई की। दोनों ही डॉक्टर हैं।

6 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया

परिवार-समाज के डर और भेदभाव के चलते 2009 से पहले तक एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोग चुपचाप ऐसे रिलेशनशिप में थे। 6 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को कानूनी दर्जा दिया और एलजीबीटीक्यू को लीगल माना। ब्रिटिश काल में 1861 में भारतीय दंड संहिता लागू हुई थी। इसमें धारा 377 के तहत समलैंगिक यौन गतिविधियों को अपराध घोषित किया गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक माना।

हर सभ्यता में हुआ समलैंगिकता का जिक्र

दिल्ली विश्वविद्यालय में प्राचीन भारतीय इतिहास के प्रोफेसर अमरजीव लोचन ने बताया कि समलैंगिकता हर सभ्यता में देखी गई। रोमन, ग्रीक, मिस्त्र की सभ्यता में इसके उदाहरण हैं। भारत में 11वीं-12वीं शताब्दी में बने खजुराहों के मंदिरों में लड़की के लड़की से संबंध के चित्र दिखते हैं। वहीं, मनु स्मृति में लिखा गया कि एक युवती के साथ संबंध बनाने वाली महिला का सिर मुंडवाकर उसे गधे पर बैठाया जाता था। उसकी उंगली भी काटी जाती थी। इसका जिक्र तभी किया गया होगा क्योंकि उस समय ऐसा होता होगा जो स्वीकारा नहीं जाता होगा।

प्राइड मंथ में वुमन भास्कर की पूरी कवरेज यहां पढ़ें-

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