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बेघरों के ठिकाने रैन बसेरे:महिलाओं के लिए अलग से नहीं है कोई व्यवस्था, सर्द हवाओं के बीच सड़कों पर सोने को मजबूर आधी आबादी

नई दिल्ली10 दिन पहले
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हाड़ कंपाने वाली ऐसी ठंड, जिसमें मोटे-मोटे गरम कपड़े भी बेअसर साबित हो रहे हैं। कड़ाके की ठंड उन लोगों पर कहर बरपा रही है, जिनके पास सिर छुपाने के लिए छत नहीं है। सरकारों ने बेघर लोगों के लिए रैन बसेरे बनाए हैं, लेकिन ज्यादातर राज्यों में महिलाओं के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। रैन बसेरे सिर्फ पुरुषों के लिए रात बिताने के ठिकाने हैं, जबकि महिलाओं को खुले आसमान के नीचे सड़क या बस स्टैंड पर रात गुजारनी पड़ रही है। रैन बसेरों में महिलाओं के लिए क्या इंतजाम हैं? पढ़िए, भास्कर वुमन की रिपोर्टर दीप्ति मिश्रा और पारुल रांझा की पड़ताल रिपोर्ट...

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में सरकारों ने बेघरों को शीतलहर और कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए जगह-जगह रैन बसेरे बनाए हैं। इन रैन बसेरों में पेयजल समेत तमाम सुविधाएं भी की गई हैं। कोविड महामारी से बचाव संबंधित गाइडलाइन्स का पालन भी किया जा रहा है, लेकिन कुछ रैन बसेरों में महिलाओं को रुकने की अनुमति नहीं है, तो कहीं इंतजामात नाकाफी हैं। कुछ शहरों में महिलाओं के रुकने की व्यवस्था की गई है, लेकिन वे सहज महसूस नहीं करतीं। ऐसे में ज्यादातर महिलाएं खुले आसमान के नीचे फुटपाथ, बस स्टैंड व अन्य जगहों पर रात बिता लेती हैं, लेकिन रैन बसेरे में नहीं आतीं।

दिल्ली में फुल हुए बेघरों के ठिकाने
देश की राजधानी दिल्ली में रामलीला ग्राउंड, कश्मीरी गेट और आनंद विहार बस स्टैंड समेत ज्यादातर रैन बसेरे फुल हो गए हैं। दिल्ली सरकार की ओर से मयूर विहार में बनाए गए रैन बसेरे में जब भास्कर वुमन की टीम पहुंची तो वहां दो-चार ही लोग थे। रैन बसेरे के केयर टेकर से बात करने पर पता चला कि यह ठिकाना सिर्फ पुरुषों के लिए है। इसमें महिलाओं को रात गुजारने की अनुमति नहीं है। महिलाओं के लिए अक्षरधाम के पास रैन बसेरा बनाया गया है, लेकिन बेघर महिलाओं के लिए हर दिन कई किलोमीटर की दूरी तय करके वहां पहुंचना आसान नहीं है।

मयूर विहार के रैन बसेरे में सिर्फ दो-चार ही लोग थे।
मयूर विहार के रैन बसेरे में सिर्फ दो-चार ही लोग थे।

फुटपाथ पर ठिठुर रहे मां और बच्चे
इस रैन बसेरे से चंद कदम दूर एक महिला अपने बच्चों के साथ फुटपाथ पर ठिठुरती नजर आई। पूछने पर महिला ने बताया कि हम बहुत दूर से यहां आए हैं। हमारे आसपास कोई रैन बसेरा नहीं है। हमारे लिए सरकार ने जो व्यवस्था की है, वो बहुत दूर है। यहां से रात में वहां जाना और फिर सुबह लौटकर आना बहुत मुश्किल है। वहीं, आसपास के लोगों का कहना है कि रैन बसेरा के बारे में जानकारी न होने के कारण लोग कम ही आते हैं। कईयों को तो यहां के बारे में जानकारी ही नहीं है।

मयूर विहार में बनाया गया रैन बसेरा सिर्फ पुरुषों के लिए है। इसमें महिलाओं को रात गुजारने की अनुमति नहीं है।
मयूर विहार में बनाया गया रैन बसेरा सिर्फ पुरुषों के लिए है। इसमें महिलाओं को रात गुजारने की अनुमति नहीं है।

यूपी: यहां न महिलाओं की सुरक्षा का इंतजाम, न सफाई का
ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर सन्नाटा पसरा था। सेक्टर पी-3 सामुदायिक केंद्र में बने रैन बसेरा के बाहर कुछ निराश्रित, मजदूर और राहगीर अलाव की आंच से खुद को गर्माहट दे रहे थे। कमरे में एक चौकीदार बैठा था। पूछने पर बताया कि अभी ज्यादा लोग आते नहीं है। दो-चार यात्री ही आते हैं। यहां महिलाओं के लिए अलग कमरा था, लेकिन कोई महिला नहीं थी। न ही सुरक्षा का इंतजाम था, न सफाई का।

महिला शौचालय की हालत यह थी कि वहां एक मिनट ठहरना भी मुश्किल था। न तो रोशनी की व्यवस्था थी और न ही पानी की। गंदगी से लबालब शौचालय की जर्जर दीवारें किसी भूतिया बंगले से कम नहीं थी। गार्ड ने बताया कि कुछ दिनों पहले केवल एक ही महिला यहां ठहरने के लिए आई थी, उसके बाद से अब तक कोई महिला नहीं ठहरी। रैन बसेरा में अव्यवस्थाओं से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शायद बदहाली और असुरक्षित माहौल के चलते किसी भी महिला के लिए यहां रात गुजारना चुनौती से कम नहीं होगा।

ग्रेटर नोएडा सेक्टर पी-3 सामुदायिक केंद्र में बने रैन बसेरे में गंदगी से लबालब शौचालय।
ग्रेटर नोएडा सेक्टर पी-3 सामुदायिक केंद्र में बने रैन बसेरे में गंदगी से लबालब शौचालय।

नोएडा: महिलाओं के बेड खाली, इक्का-दुक्का ही आती हैं
नोएडा में नोएडा स्टेडियम, सेक्टर-135, ममूरा, कोण्डली और सेक्टर-62 के बारातघरों में बेघर लोगों को ठंड से बचाने के लिए रैन बसेरे बनाए गए हैं। भास्कर वुमन की टीम जब स्टेडियम स्थित रैन बसेरे में पहुंची तो वहां करीब 7 से 8 लोग जमीन पर गद्दा बिछा रहे थे। पूछने पर केयर टेकर ने बताया कि यहां महिलाओं के लिए व्यवस्था नहीं है, जबकि नोएडा अथॉरिटी के जनरल मैनेजर पी. के. कौशिक का कहना है कि महिलाओं के लिए व्यवस्था है, लेकिन महिलाएं आती नहीं हैं। महिलाओं के लिए स्टेडियम में ही एक हॉल में भी व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा, सर्दी से बचाने के लिए शहर में 52 जगहों पर अलाव जलाए जा रहे हैं।

नोएडा अथॉरिटी की सीईओ रितु माहेश्वरी का कहना है कि कम्युनिटी सेंटर में जो रैन बसेरे बने हैं, वहां महिलाओं के लिए व्यवस्था की गई है, लेकिन इक्का-दुक्का ही महिलाएं आती हैं। ऐसे में उनके बेड खाली पड़े रहते हैं। संख्या बढ़ने पर महिलाओं के बेड पुरुषों को दे दिए जाते हैं।

नोएडा स्टेडियम स्थित में बेघरों के लिए बनाया गया रैन बसेरा।
नोएडा स्टेडियम स्थित में बेघरों के लिए बनाया गया रैन बसेरा।

मप्र: इंतजाम हैं, लेकिन ठहरने में सहज नहीं महिलाएं
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 15 रैन बसेरे हैं। नादरा बस स्टैंड के पास बनाए गए रैन बसेरे को छोड़कर बाकी 14 में महिलाओं के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। जबलपुर और ग्वालियर में पुरुषों के लिए करीब 10-10 रैन बसेरे हैं, लेकिन महिलाओं के लिए दोनों शहरों में एक-एक ही ठिकाना है। वहीं, इंदौर में करीब 13 रैन बसेरे हैं, इन सभी में महिलाओं के लिए इंतजाम हैं, लेकिन महिलाएं यहां रात में सोने नहीं आती हैं।

राजस्थान: पुरुषों के लिए हैं कई ठिकाने, महिलाओं के लिए सिर्फ दो
राजस्थान की राजधानी जयपुर में करीब डेढ़ दर्जन से ज्यादा रैन बसेरे हैं, लेकिन यहां भी महिलाओं के लिए केवल 2 में ही व्यवस्था है। अन्य कई शहरों की भी कमोबेश यही स्थिति है।

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