क्या आपका बच्चा भी मुंह से लार टपकाता है:सांस की नली में जाने से निमोनिया का हो सकता है खतरा

6 महीने पहले
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बच्चों की बहती लार कुछ मामलों में सामान्य है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ विशेष परिस्थितियों में बच्चों का लार टपकाना किसी समस्या की ओर इशारा भी हो सकता है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि सभी मां को बच्चों में लार आने के कारण और उनसे जुड़ी अच्छी और बुरी दोनों ही बातों की पूरी जानकारी हो।

बच्चों की बहती लार किसी समस्या की ओर इशारा
बच्चों की बहती लार किसी समस्या की ओर इशारा

आम है बच्चों का लार टपकाना

पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटोलॉजिस्ट, डॉ. मेजर मनीष मन्नान कहते हैं बच्चों में दो साल की उम्र तक लार का टपकना बहुत ही नॉर्मल है। ऐसा होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें शारीरिक और मानसिक विकास के साथ-साथ दांतों का निकलना भी शामिल है। वहीं कुछ असामान्य कारण भी हैं, जिनकी वजह से बच्चों में लार गिरने की समस्या हो सकती है। बच्चा दो साल से कम उम्र का है तो ऐसे में आपको बच्चों में लार आने को लेकर किसी तरह की फिक्र करने की जरूरत नहीं है। डॉ. मेजर मनीष मन्नान बताते हैं कि बच्चों का मुंह में ज्यादा लार इकट्ठा होने से सांस की नली में जाने का खतरा बना रहता है जिससे निमोनिया हो सकता है।

बच्चे लार टपकाना कब शुरू करते हैं?

जन्म के 22 हफ्ते बाद यानी पांचवें महीने से बच्चों में सलाइवरी ग्लैंड तेजी से विकसित होती हैं, जिससे बच्चों में लार बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इस वक्त बच्चों में बिलकुल भी दांत नहीं होते हैं, ऐसे में बच्चे लार को मुंह में रोक नहीं पाते। वहीं इस दौरान उनमें लार को निगलने की क्षमता भी नहीं होती।

क्या लार टपकाना बच्चे के विकास में मदद करता है

बच्चों में लार का टपकना सामान्य है। लेकिन लार का टपकना बच्चे के विकास में मदद करता है, यह कहना गलत होगा। डॉ. मनीष मन्नान के मुताबिक, बच्चे के मुंह में मौजूद लार दूध के साथ मिलकर उसे पचाने में आसान बनाती है और दूध में मौजूद जरूरी पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करती है, जिससे बच्चे के शरीर को पोषण मिलता है। साथ ही लार दूध के कारण मुंह में पैदा होने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करने में भी मदद करती है।

लार में होते हैं एंटी बैक्टीरियल गुण

लार में कई एंटी-बैक्टीरियल गुण से भरपूर कुछ तत्व पाए जाते हैं, जो मुंह के संक्रमण से बचाव करते हैं। वहीं जब बच्चे ठोस आहार लेने लगते हैं, तो ऐसे समय में लार खाद्य पदार्थों को नर्म करने के साथ उसे निगलने में आसान बनाता है। साथ ही मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया को सक्रिय कर न्यूट्रिशन के साथ-साथ शरीर में इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करती है, जो बच्चे के विकास के लिए जरूरी है।

बच्चों के लार टपकाने के कारण

सामान्य कारण

  • बच्चे के जन्म के बाद धीरे-धीरे सलाइवा ग्लैंड विकसित होता है । वहीं मानसिक और शारीरिक विकास की कमी के चलते बच्चा लार को मुंह में न तो रोक पाता है और न ही उसे निगल पाता है। नतीजतन बच्चों में लार बाहर आती है।
  • दांत निकलना के दौरान शारीरिक बदलाव में से एक यह भी है कि सलाइवा ग्लैंड नॉर्मल के मुकाबले ज्यादा सक्रिय हो जाती है। यही कारण है कि दांत निकलने के दौरान बच्चों में ज्यादा लार टपकती है।
  • मसालेदार खाना लार बनने की प्रक्रिया को तेज कर देते हैं। ऐसे में ठोस डाइट लेने वाले बच्चे जब इस तरह का खाना खाते हैं तो उनमें लार टपकने लगती है।

असामान्य कारण

  • नर्वस सिस्टम और मसल्स डिसऑर्डर
  • मानसिक विकास की कमी
  • मुंह में घाव
  • एसिडिटी
  • दवाओं का प्रभाव
  • रिले-डे सिंड्रोम
  • विल्सन रोग (शरीर में कॉपर की अधिकता का कारण बनता है)
  • रेट सिंड्रोम (जेनेटिक ब्रेन डिसऑर्डर )
  • टॉन्सिलाइटिस (टॉन्सिल्स में संक्रमण)
  • दांतों में कैविटी
  • सांस नाली के ऊपरी भाग (थ्रोट, लैरिंगक्स और ट्रेकिया) में संक्रमण
दांतों और मुंह की सफाई रखकर लार बहने की समस्या को कम किया जा सकता है
दांतों और मुंह की सफाई रखकर लार बहने की समस्या को कम किया जा सकता है

ज्यादा लार टपकाने पर डॉक्टर के पास जाएं

अगर आपका शिशु दो साल से छोटा है तो आपको इस मामले में बिलकुल भी फिक्र करने की जरूरत नहीं है, लेकिन इस बात को जरूर जान लेना चाहिए कि बच्चे को ओरल अल्सर या कैविटी की समस्या न हो। वहीं, दो साल की उम्र के बाद बच्चा लार टपकाए, तो संभव है कि इसके कुछ असामान्य कारण भी हो सकते हैं। इन दोनों ही स्थितियों में आपको बच्चे को डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

बच्चों के लार टपकाने का इलाज

शुरुआती समय में ज्यादा लार आने के कारण मुंह के आसपास के हिस्से पर लाल चकते पड़ सकते हैं। ऐसे में हीलिंग या बैरियर क्रीम जैसे–पेट्रोलियम जेली का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह बच्चे की त्वचा और लार के मध्य सीधा संपर्क नहीं होने देगी। इस तरह लार से त्वचा को होने वाले दुष्प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही यह बच्चे की त्वचा पर जलन को खत्म कर आराम पहुंचाते हैं।

बच्चों के व्यवहार में बदलाव के प्रयास के तौर पर उनके बैठने, सिर को कंट्रोल करने और लार को निगलने जैसी प्रक्रियाओं को सिखाने की कोशिश करें।

बच्चों की लार को रोकने के घरेलू उपाय

बच्चों में लार रोकने के और त्वचा संबंधी समस्याओं को रोकने के लिए कुछ सावधानियां जरूर बरतें

टीथिंग टॉय की मदद से बच्चे में लार आने की प्रक्रिया को कुछ हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। कई लोग लार से होने वाली त्वचा संबंधी समस्याओं से बच्चों को बचाने के लिए ड्रूल बिब का इस्तेमाल करते हैं। ड्रूल बिब लार को सोक लेते हैं, जिससे बच्चों के कपड़े सूखे रहते हैं और लार त्वचा के सीधे संपर्क में नहीं आती। बेबी टिशू की मदद से बहती हुई लार को समय-समय पर पोंछते रहें और प्रयोग किए हुए टिशू को दोबारा इस्तेमाल में न लाएं। ऐसा करके भी बच्चों को लार से होने वाली त्वचा संबंधी समस्याओं को होने से रोका जा सकता है। ओरल हेल्थ भारत में ज्यादातर केस में बच्चों के ओरल हेल्थ को नजर अंदाज कर दिया जाता है। इसलिए, दांतों और मुंह की नियमित सफाई का ध्यान रखकर लार बहने की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।