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पेट के बल सोते हैं तो ये जान लें:रीढ़ की हड्डी में दर्द, शरीर में अकड़न, चेहरे पर झुर्रियां आ सकती हैं

6 महीने पहलेलेखक: मरजिया जाफर
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सोने का तरीका सीधा हमारी सेहत पर असर डालता है। कुछ लोग पीठ के बल तो कुछ लोग पेट के बल सोना पसंद करते हैं। वहीं कुछ लोग करवट होकर सोना पसंद करते हैं। ये सभी पॉश्चर बॉडी की कंडीशन को प्रभावित करते हैं। पेट के बल सोने से आराम से सांस ली जाती है, लेकिन लगातार इस तरह से सोने की आदत परेशानी में डाल सकती है। आयुर्वेदाचार्य डॉ. सिद्धार्थ सिंह के मुताबिक, कुछ स्थितियों जैसे गर्भावस्था या पेट की सर्जरी की स्थिति में तो इस तरह से बिल्कुल नहीं सोना चाहिए।

पेट के बल सोने का असर

डॉ. सिद्धार्थ कहते हैं कि पेट के बल सोने से पीठ और रीढ़ पर दबाव पड़ता है, ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर वजन शरीर के बीच में होता है। जब आप सो रहे हों तो इसमें रीढ़ की एक स्थिति बनाए रखना मुश्किल होता है। रीढ़ पर तनाव और दबाव बढ़ने का असर शरीर के दूसरे अंगों पर भी होता है। रीढ़, शरीर की नसों के लिए एक पाइपलाइन है, ऐसे में रीढ़ की हड्डी में होने वाली दिक्कत के कारण इसका बॉडी के कई हिस्सों में दर्द के रूप में प्रभाव देखने को मिल सकता है।

दर्द-झनझनाहट की परेशानी

पेट के बल सोने वाले लोगों की बॉडी के अलग-अलग हिस्सों में दर्द, झन्नाहट और सुन्न रहने की शिकायत रहती है। कुछ अंगों में ऐसा महसूस हो सकता है कि जैसे वह बिल्कुल काम नहीं कर रहे। पेट के बल सोने की आदत के कारण सिर और रीढ़ की अलाइंमेंट पर भी असर हो सकता है। अक्सर इसी तरह सोने की आदत वाले लोगों को गर्दन में दर्द और झुकाव की समस्या हो सकती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान करवट ही सोएं, नींद पूरी करना भी जरूरी है।
प्रेग्नेंसी के दौरान करवट ही सोएं, नींद पूरी करना भी जरूरी है।

प्रेग्नेंसी में रखें ख्याल

प्रेग्नेंसी के दौरान नींद और सोने के तरीके को लेकर सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है। प्रेग्नेंसी में उल्टा सोने से बच्चे पर इसका गलत असर हो सकता है। बेबी बंप नजर आने लगता है तो पेट के बल सोना नामुमकिन है। प्रेग्नेंसी के दौरान नींद पूरी करना भी जरूरी है।

बेहतर सेहत के लिए सोने की पोजीशन ठीक रखें

ऐसा नहीं है कि पेट के बल सोने के सिर्फ नुकसान ही हैं, कुछ मामलों में इसके फायदे भी हैं। जैसे खर्राटे या स्लीप एप्निया जैसी नींद की दिक्कत है तो इस तरह से सोने से आराम मिलता है। इसके अलावा सोते समय अगर आपको सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है तो भी इस तरह से सोना लाभप्रद माना जाता है, क्योंकि यह स्थिति स्वाभाविक रूप से सांस की नली को खुला रखती है।

स्लीप एप्निया क्या है

सोते समय सांस लेने में रुकावट आना एक ऐसी बीमारी है जिसमें नींद में सांस रुक जाती है। यह तकलीफ कुछ सेकंड्स से लेकर 1 मिनट तक हो सकती है। स्लीप एप्निया से ग्रस्त लोग ज्यादातर जोर से खर्राटे लेते हैं, लेकिन हर कोई खर्राटे लेने वाला व्यक्ति स्लीप एप्निया बीमारी से ग्रस्त नहीं रहता। इस बीमारी में सांस लेने वाली नली के ऊपरी मार्ग में रुकावट होने की वजह से एयर पास नहीं होती। सांस लेने में रुकावट देर तक रहती है तो खून में ऑक्सीजन लेवल कम हो जाता है।

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया - इस समस्या में सोते समय वायु मार्ग में रुकावट के दौरान सांस लेने में परेशानी होती है, जिसके कारण अधिकतर लोग जोर से खर्राटे लेते हैं।

सेंट्रल स्लीप एप्निया - इसमें दिमाग सांस को कंट्रोल करने वाली मसल्स को संकेत देने में विफल होता है। इस कारण सांस लेने में कठिनाई होती है।

ऑब्सट्रक्टिव-सेंट्रल स्लीप एप्निया का एक साथ होना- किसी रोगी में स्लीप एप्निया की यह दोनों समस्याएं एक साथ हो जाती हैं तो उसे मिक्स स्लीप एप्निया कहा जाता है।

स्लीप एप्निया से बचाव

मोटापा कम करना

स्लीप एप्निया को कम करने व बचाव के लिए शरीर का स्वस्थ होना जरूरी है। वजन बढ़ने के साथ साथ स्लीप एप्निया के बढ़ने की भी संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि अधिक वजन व मोटापा से गले के संकुचन में परेशानी होती है। स्लीप एप्निया के मरीज को सोते समय टंग रिटेनिंग और माउथपीस का प्रयोग करना चाहिए। यह सांस लेने वाली नली के ऊपरी वायु मार्ग में आने वाली रुकावट को कम करने में मदद करता है। मुंह और जीभ की थेरेपी मसल्स को मजबूत करती है। यह थैरेपी स्लीप एपनिया के इलाज के लिए कारगर है।

रीढ़ की हड्डी में दर्द

पेट के बल सोने की आदत है तो आपको कमर में दर्द व रीढ़ की हड्डी में दर्द जैसी समस्याओं का शिकार होना पड़ सकता है। अगली बार इस स्थिति में सोने से बचें।

डाइजेशन सिस्टम बिगड़ सकता है

लगातार पेट के बल सोने से डाइजेशन सिस्टम पर इसका असर पड़ता है। खाना खाने के बाद तुरंत पेट के बल सो जाते हैं तो अपच, गैस, कब्ज संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

मांसपेशियों में दर्द

रोजाना पेट के बल सोने वाले लोगों को मसल्स में दर्द की शिकायत रहती है। दरअसल पेट के बल सोने से पेट के आस-पास की मसल्स पर दबाव पड़ता है और इसमें दर्द होने लगता है इसलिए ऐसा करने से बचें।

पेट के बल सोने से मसल्स पर दबाव पड़ता है। इसलिए ऐसा करने से बचें।
पेट के बल सोने से मसल्स पर दबाव पड़ता है। इसलिए ऐसा करने से बचें।

शरीर में होती है अकड़न

लगातार पेट के बल सोने वाले लोगों के शरीर में अकड़न की समस्या भी रहती है। दरअसल, ऐसा खाना सही ढंग से नहीं पचा पाने के कारण होता है। इसलिए पेट के बल सोना हानिकारक माना जाता है।

चेहरे पर आती है झुर्रियां

पेट के बल सोने से चेहरा नीचे की ओर दब जाता है, जिससे चेहरे पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं। अगर आप कम उम्र में ही चेहरे पर झुर्रियों की समस्या से परेशान हैं तो पेट के बल सोना तुरंत बंद कर दें।

धूम्रपान और शराब का सेवन न करे

धूम्रपान और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए, इनकी वजह से सांस लेने की मांसपेशियां और गले के पिछला हिस्सा शिथिल हो जाता है।

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