• Hindi News
  • Women
  • These Are The Lioness Of The Capital, Dragging The Men By The Collar And Taking Them To The Police Station.

सड़कों पर निकलती हैं तो लोग बोलते हैं 'लेडी सिंघम':ये हैं राजधानी की शेरनियां, मनचलों को कॉलर से घसीटते हुए थाने ले जाती हैं

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: सुनाक्षी गुप्ता
  • कॉपी लिंक

अरे तुम तो लड़की हो अपराधियों के पीछे क्या भागोगी... ऑफिस में हेल्प डेस्क संभालो ये तुम लड़कियों के लिए ठीक है।... अरे लड़कियां इन्वेस्टिगेशन में क्या काम करेंगी इनके लिए तो स्टोर रूम की ड्यूटी ही सही है।.. रात हो जाएगी तो आप लड़कियों को घर जाना होगा पेट्रोलिंग कैसे करोगी।... ये वाक्य शायद आम जनता ने कभी नहीं सुने हो लेकिन पुलिस थाने के अंदर एक महिला पुलिसकर्मी के लिए ऐसे वाक्य सुनना आम बात होती है। पुरुष प्रधान देश में महिलाओं को भले ही आरक्षण के दम पर बराबर के पद पर नौकरी मिल गई हो। मगर खुद को साबित करने के लिए उन्हें जिम्मेदारियां और मौके बहुत कम ही मिलते हैं।

महिलाओं के प्रति इस सोच को हर दिन गलत साबित करने का जिम्मा देश की राजधानी दिल्ली के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र की 'तेजस्विनी' टीम ने उठाया है। 52 महिला पुलिसकर्मियों की इस टीम ने एक साल में 100 से ज्यादा अपराधियों को पकड़कर उन्हें सबक सिखाया है। ये दिल्ली में 'लेडी सिंघम' की टीम बनकर उभर रही हैं।

पिछले साल 10 जुलाई को दिल्ली पुलिस के नॉर्थ-वेस्ट जिले में 11 थानों में शुरू हुई इस मुहिम में महिला कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल को जोड़ा गया है। पहली बार महिला कांस्टेबल को डेस्क ड्यूटी से हटाकर ग्राउंड ड्यूटी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब ये महिला कांस्टेबल ऑफिस में फाइलें तैयार करने के बजाए गुंडे-बदमाशों को पकड़ने का काम करती हैं।

एक साल में ये 'लेडी सिंघम' 183 शिकायतों का निपटारा कर चुकी हैं।
एक साल में ये 'लेडी सिंघम' 183 शिकायतों का निपटारा कर चुकी हैं।

दफ्तर पहुंची तो देखा लड़कियां सिर्फ रजिस्टर पलटती थी, तभी सोच ये बदलना होगा
लेडी सिंघम की टीम तैयार करने वाली नॉर्थ-वेस्ट जिले की डीसीपी उषा रंगनानी भास्कर वुमन से बातचीत में बताती हैं कि जब मैं सबसे पहली बार ऑफिस पहुंची तो देखा ज्यादातर लड़कियां डेस्क ड्यूटी में शामिल थीं। फील्ड में कैसे काम करना है इस बारे में ज्यादा जानती नहीं थी। तभी मन में ख्याल आया कि हमें इन लड़कियों से रीयल फील्ड पुलिसिंग करानी चाहिए। इसी तरह तेजस्विनी की शुरुआत हुई।

कई लड़कियां इस स्कीम में अपने मन से शामिल हुई बाकी हर थाने से एक से दो महिला कांस्टेबल को फील्ड ड्यूटी की जिम्मेदारी सौंपी गई। आज इन महिला कांस्टेबल ने साबित कर दिखाया कि वे किसी पुरुष से कम नहीं। इन महिला पुलिसकर्मियों के जज्बे को देख बाकी लड़कियां भी इस अभियान का हिस्सा बनना चाहती हैं।

नॉर्थवेस्ट जिले की डीसीपी उषा रंगनानी बताती हैं - अपने काम के बल पर कई महिला कांस्टेबल प्रमोशन लेकर हेड कांस्टेबल भी बनी हैं।
नॉर्थवेस्ट जिले की डीसीपी उषा रंगनानी बताती हैं - अपने काम के बल पर कई महिला कांस्टेबल प्रमोशन लेकर हेड कांस्टेबल भी बनी हैं।

सीनियर्स को समझाना कि 'लड़कियां भी काम कर सकती है' किसी चुनौती से कम नहीं
जब मुझे जिले की कमान सौंपी गई तो ये नहीं देखा गया कि मैं एक महिला हूं। मुझे सिर्फ एक पुलिस ऑफिसर की तरह देखा गया। ठीक उसी तरह मैंने भी यंग फीमेल कांस्टेबल को एक पुलिस ऑफिसर के रूप में देखा। मगर हां इन महिलाओं को काम करने में हमसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि सीनियर लेवल पर हमें घर-गाड़ी जैसी कई सुविधाएं मिलती हैं। लेकिन, जूनियर लेवल पर सबकुछ उतना आसान नहीं है।
ये महिला कांस्टेबल लंबे समय से डेस्क ड्यूटी कर रहीं थी। शुरुआत में इन्हें भी डर था कि वे काम कर पाएंगी या नहीं। इनके इंचार्ज भी जिम्मेदारी देने से डरते थे। हमने सीनियर्स की काउंसिलिंग कर समझाया कि 'लड़कियां भी उसी तरीके से काम करती हैं जैसे की पुरुष'।
आज ये लड़कियां फील्ड पुलिसिंग, बीट पेट्रोलिंग, क्राइम डिटेक्शन, क्रिमिनल्स को पकड़ना, बैड करेक्टर्स को पकड़ना, एंटी सोशल एलिमेंट्स के खिलाफ जंग लड़ना तमाम फील्ड एक्टिविटी में खुद को साबित करके दिखा रही हैं।

ये लड़कियां निडर होकर नाइट ड्यूटी भी करती हैं। एक दिन रात 3 बजे में सरप्राइज चैकिंग पर पहुंची और पिकेट चेकिंग में पहुंचकर उस वक्त राउंड लगा रही सभी बाइकों को बुलाया। मैं ये देखकर हैरान हो गई कि उस समय भी दो यंग महिला कांस्टेबल पेट्रोलिंग कर रही थीं।

आंकड़े जुलाई 2021 से जून 2022 तक के हैं। (सोर्स : दिल्ली पुलिस)
आंकड़े जुलाई 2021 से जून 2022 तक के हैं। (सोर्स : दिल्ली पुलिस)

आतंकवाद विरोधी गतिविधियों में लेती हैं हिस्सा, इन्वेस्टिगेशन कर केस सॉल्व करती हैं
देश की राजधानी दिल्ली आए दिन हाई अलर्ट पर रहती है। ऐसे में बीट पर ड्यूटी करते समय ये महिला कांस्टेबल सभी एंटी-टेरर रिलेटेड मेजर्स लेती हैं और लोगों की सुरक्षा में तैनात रहती हैं। डीसीपी उषा रंगनानी बताती हैं कि 15 अगस्त के लिए भी ये लड़कियां आतंकवाद विरोधी तैयारी में लगी हुई हैं। ये लड़कियां केस की इन्वेस्टिगेशन में सहयोग करती हैं। सड़कों पर मनचलों को पकड़ने के लिए अपनी स्कूटी और बाइक से जाती हैं। पुलिस के सभी ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल होती हैं।

घर-घर जाकर महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाया, स्ट्रीट क्राइम में लाई 37% की कमी
महिलाओं के साथ आमतौर पर दो तरह के अपराध होते हैं, पहला स्ट्रीट क्राइम और दूसरा घरेलू हिंसा। स्ट्रीट क्राइम में राह चलते मनचलो द्वारा लड़कियों को छेड़ने और पीछा करने की घटनाएं दर्ज की जाती हैं। दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक तेजस्विनियों के आने से बीते एक साल में ऐसी घटनाओं में 37% की गिरावट आई है। जबकि घरेलू हिंसा की शिकार हुई ज्यादातर महिलाएं डर व शर्म के कारण इस बारे में किसी से बात करने से बचती थीं। मगर महिला कांस्टेबल से जुड़ने के बाद पीड़ित महिलाएं बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी परेशानी उन्हें बताने लगी हैं। अब वे चुपचाप हिंसा सहने के बजाए अपनी बात सामने रखती हैं।

आंकड़े जुलाई 2021 से जून 2022 तक के हैं। (सोर्स : दिल्ली पुलिस)
आंकड़े जुलाई 2021 से जून 2022 तक के हैं। (सोर्स : दिल्ली पुलिस)

डोर स्टेप पुलिसिंग कर पूरा कर रहीं सुरक्षा का वादा, लोग खिचवाते हैं सेल्फी
महिला कांस्टेबल को खासकर उन इलाकों में तैनात किया गया है, जहां महिलाओं के प्रति अपराध की घटनाएं ज्यादा होती हैं। या जिन इलाकों में पुरुष प्रधान सोच लोगों पर हावी है जैसे कि दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्र। यहां यंग फीमेल कांस्टेबल बीट ड्यूटी करती हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों से मिलकर डोर-स्टेप पुलिंसिंग पर काम करती हैं। ये लेडी सिंघम अपने इलाके में इतनी मशहूर हैं कि लोग उनके साथ सेल्फी लेने के लिए उत्सुक रहते हैं।

सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग ली अब स्कूल कॉलेज की बच्चियों को कर रहीं तैयार
तेजस्विनियों ने खुद सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग ली है। अब वे स्कूल, कॉलेज और लोकल एरिया, जेजे क्लस्टर्स में बच्चियों और महिलाओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देती हैं। बच्चियों को कैंप में इस तरह तैयार किया जाता है कि अगर वे ऐसी स्थिति में फस जाएं जहां से उन्हें कोई मदद नहीं मिल सकती तो कम से कम वो अपना बचाव खुद कर सकती हैं।

आंकड़े जुलाई 2021 से जून 2022 तक के हैं। (सोर्स : दिल्ली पुलिस)
आंकड़े जुलाई 2021 से जून 2022 तक के हैं। (सोर्स : दिल्ली पुलिस)

महिला पुलिसकर्मी को मिलते थे ये काम
16 वर्षों से पुलिस में सेवा दे रहीं अनुराधा चौधरी आदर्श नगर थाने में तैनात हैं। वे बताती हैं कि तेजस्विनी स्कीम आने से पहले महिलाओं को पुलिस में रिकॉर्ड ब्रांच, डीओ रूम है, हेल्प डेक्स और संतरी ड्यूटी में भेजा जाता था। मगर आज हमें बीट ड्यूटी दी जाती है, हम अपराधियों को पकड़ते हैं, खुद में कॉन्फिडेंस महसूस करते हैं।

लेडी सिंघम के बहादुरी के किस्से

10 वर्षों से ज्यादा समय की दिल्ली पुलिस में डेस्क ड्यूटी, अब फील्ड पुलिसिंग कर हेड कांस्टेबल बनीं ये तेजस्विनियां।
10 वर्षों से ज्यादा समय की दिल्ली पुलिस में डेस्क ड्यूटी, अब फील्ड पुलिसिंग कर हेड कांस्टेबल बनीं ये तेजस्विनियां।

सड़क से गुजरती हूं तो लोग आशा की किरण के नाम से पुकारते हैं
बीट कांस्टेबल किरण बताती है कि मैं अपने एरिया में पेट्रोलिंग कर रही थी। तब दो मनचले सड़क पर तेज स्पीड में स्कूटी चलाकर मेरे पास से गुजरे। मुझे उन लड़कों पर शक हुआ, मैंने कुछ दूर उनका पीछा किया और देखा कि वो लड़के एक व्यक्ति का मोबाइल छीनकर भाग रहे थे। स्नैचर स्कूटी पर थे और मैं भी स्कूटर पर ही उनका पीछा कर रही थी, थोड़ा दूर उनका पीछा करने के बाद मैंने बदमाशों को अकेले ही पकड़ लिया। फिर उन्हें संबंधित थाने में आगे की कार्रवाई के लिए भेजा। उस दिन से इलाके के लोग मुझे आशा की किरण के नाम से पुकारते हैं।

आदर्श नगर थाने में ड्यूटी कर रहीं वंदना दुबे ने स्नैचरों को धर पकड़ा।
आदर्श नगर थाने में ड्यूटी कर रहीं वंदना दुबे ने स्नैचरों को धर पकड़ा।

छेड़खानी करने वाले को कॉलर पकड़कर दबोचा
दिल्ली पुलिस में 13 साल से सर्विस कर रही वंदना दुबे बताती हैं कि वे छोटे-छोटे बच्चों को गुडटच-बैडटच के बारे में सिखाने के साथ ही लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देती हैं। मगर साथ में मनचलो और स्नैचर को भी पकड़ना जानती हैं। हाल ही में हुई घटना का जिक्र करते हुए वंदना कहती हैं कि मैं अपनी बीट पर ड्यूटी कर रही थी कि एक दिन वहां मौजूद फल बेचने वाले ने हमें बताया कि एक मनचला लड़की को काफी परेशान कर रहा है। पता लगते ही सबसे पहले हम उस लड़की को पुलिस बूथ लेकर आए, वहां उसे पानी पिलाया उसकी घबराहट कम होने पर लड़के के बारे में पूछा। मैं अपनी साथी हेड कांस्टेबल अनुराधा के साथ उस मनचले को ढूंढने के लिए निकली। मनचले को कॉलर से पकड़ते हुए पुलिस बूथ तक लेकर आए। एएसआई को बुलाकर आरोपी को आदर्श नगर थाने भेजा, जहां उसपर आगे की कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट दर्ज हुई।

पुरुषों की तरह फील्ड ड्यूटी करने पर खुश हो जाती हैं हेड कांस्टेबल कविता।
पुरुषों की तरह फील्ड ड्यूटी करने पर खुश हो जाती हैं हेड कांस्टेबल कविता।

अवैध व्यापारियों के दिमाग ठिकाने लगाए
भरतनगर थाने में तैनात हेड कांस्टेबल कविता पिछले 13 वर्षों से दिल्ली पुलिस में ड्यूटी कर रही हैं। कविता कहती हैं कि तेजस्विनी ने उनकी जिंदगी ही बदल दी है। पहले लड़कियों की छवि ये थी कि वे ऑफिस में ही ड्यूटी करेंगी, मगर नई स्कीम आई और हमें फील्ड में जाने का मौका मिला। इससे हमें खुद कुछ सीखने का अवसर मिला और कॉन्फिडेंस भी बढ़ा है। मैंने अपने थाना क्षेत्र में मौजूद जेजे क्लस्टर से कई अवैध व्यापारियों को पकड़कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है।