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'हिना' से सजी पाकिस्तान की नई कैबिनेट:शहबाज के मंत्रिमंडल में महिला शक्ति, खूबसूरती और समझदारी से भरपूर हैं ये 5 मंत्री

इस्लामाबाद10 महीने पहले
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लंबी खींचतान के बाद पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री बनने के लगभग एक सप्ताह बाद शहबाज शरीफ ने अपने कैबिनेट की घोषणा की है। पाकिस्तान के इस नए कैबिनेट में कुल 34 मंत्रियों को जगह दी गई है। इस कैबिनेट में 5 प्रभावशाली महिलाएं भी शामिल हैं। जिनमें हिना रब्बानी खार, मरियम औरंगजेब भी हैं। PPP की हिना रब्बानी खार को विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है जबकि PML- N के राना सनाउल्लाह को गृह मंत्रालय संभालने को मिला है। इसके अलावा अहसान इकबाल को योजना और विकास मंत्री नियुक्त किया गया है। मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट- पाकिस्तान के अमीनुल हक ने सूचना तकनीक और टेलीकॉम मंत्री का पद संभाला है।

मंत्री बनने वाली महिलाओं में हिना रब्बानी खार सबसे अहम चेहरा हैं। वो इससे पहले 2011-13 में भी पाकिस्तान की केंद्रीय मंत्री रह चुकी हैं।
मंत्री बनने वाली महिलाओं में हिना रब्बानी खार सबसे अहम चेहरा हैं। वो इससे पहले 2011-13 में भी पाकिस्तान की केंद्रीय मंत्री रह चुकी हैं।

हिना रब्बानी खार, जिनके भारत आने पर राजनीति की जगह ‘खूबसूरती’ के चर्चे होने लगे
पाकिस्तान के नए कैबिनेट में स्टेट मिनिस्टर के बतौर शपथ लेने वाली हिना इससे पहले भी केंद्रीय मंत्री रह चुकी हैं। 2011 से 2013 तक पाकिस्तान की विदेश मंत्री रही हिना इस इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला थीं। साथ ही वो मात्र 33 साल की उम्र में पाकिस्तान की राजनीति के अहम पद पर पहुंची थीं। यह भी अपने आप में एक रिकार्ड है।

विदेश मंत्री रहते हुए हिना रब्बानी खार ने 2011 में भारत का दौरा किया था। उनके दौरे से पहले उम्मीद की जा रही थी कि तानाशाह मुशर्रफ के जाने के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सुधरेंगे। लेकिन हिना जब भारत आईं तो राजनीति और कूटनीति की बातें नेपथ्य में चली गईं। भारत के मीडिया में चारों ओर उनकी ख़ूबसूरती के चर्चे होने लगे। हिना की नीली ड्रेस, गले में मोतियों की माला, उनके सात लाख के लग्जरी हैंडबैग और काले सन ग्लास को जितनी मीडिया कवरेज मिली। उतनी कवरेज तत्कालीन भारतीय विदेश मंत्री एस एम कृष्णा के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता को भी नहीं मिली।

खार का जन्म मुजफ्फरगढ़ जिले में हुआ था और उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका में शिक्षा प्राप्त की। वह मूल रूप से जनरल परवेज मुशर्रफ की सरकार में कैबिनेट सदस्य से राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के तहत सबसे लोकप्रिय मंत्रियों में से एक बन गईं। अपने दो साल के कार्यकाल के दौरान, खार ने भारत और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में सुधार पर केंद्रित रणनीति पर जोर देने के साथ, एक अभिनव विदेश नीति पर काम किया।

यह है हिना का इतिहास, अपनी पार्टी के प्रमुख नेता के साथ जुड़ा था नाम

हिना रब्बानी खार पाकिस्तान के एक प्रमुख जाट जमींदार परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता मलिक गुलाम नूर मोहम्मद खार भी सांसद रह चुके हैं। हिना के एक भाई राजा रब्बानी खार भी सांसद हैं। हिना पाकिस्तानी पीपल्स पार्टी की नेता हैं। वो पीपीपी चेयरमैन बिलावल भुट्टो की करीबी मानी जाती हैं। एक समय उनके और बिलावल भुट्टो के अफेयर के भी चर्चे थे। मीडिया में दावा किया गया था कि बिलावल से निकाह करने के लिए हिना अपने अरबपति शौहर फिरोज गुलजार को तलाक देने के लिए तैयार हो गई थीं। लेकिन बिलावल के पिता और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी इस रिश्ते के खिलाफ थे। उन्होंने दबाव डालकर इस प्रेम कहानी का अंत करा दिया।

मरियम औरंगजेब जो नवाज शरीफ की बेटी का ‘उतरन’ पहनती हैं

पाकिस्तान में मंत्री बनने वाली महिलाओं में मरियम औरंगजेब का नाम भी शामिल है। मरियम औरंगजेब नवाज शरीफ की पार्टी मुस्लिम लीग-नवाज की नेता और प्रवक्ता हैं। औरंगजेब पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी और मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भतीजी मरियम नवाज की अच्छी दोस्त मानी जाती हैं।

पाकिस्तान में कई लोगों का मानना है कि पार्टी और सरकार में औरंगजेब की इस तरक्की के पीछे मरियम नवाज से उनकी दोस्ती है।

हिना रब्बानी से इतर औरंगजेब को राजनीति पिता की जगह अपनी मां से विरासत में मिली थी। उनकी मां ताहिरा औरंगजेब भी पाकिस्तानी मुस्लिम लीग-नवाज की बड़ी नेता मानी जाती हैं। वो 2008 से लगातार नेशनल असेंबली मेंबर हैं। हालांकि मरियम की मां भले ही उनसे पहले राजनीति में आई हों वर्तमान में मरियम का राजनीतिक कद उनकी मां से कहीं बड़ा है।

मरियम औरंगजेब PML-N की प्रवक्ता हैं। उन्हें मरियम नवाज का करीबी माना जाता है।
मरियम औरंगजेब PML-N की प्रवक्ता हैं। उन्हें मरियम नवाज का करीबी माना जाता है।

मरियम नवाज और मरियम औरंगजेब में सिर्फ नाम की ही समानता नहीं
मरियम औरंगजेब को सूचना और प्रसारण विभाग सौंपा गया है। यूके से डेवेलपमेंट और इनवारमेंट पॉलिसी में मास्टर्स पूरा करने के तुरंत बाद, औरंगजेब ने अपने माता-पिता की तरह, 2013 में पीएमएल जॉइन की। इसके बाद वह पार्टी की आरक्षित महिला सीट दिए जाने के बाद नेशनल असेंबली की सदस्य बनीं। 2016 में, उन्होंने पहली बार तत्कालीन प्रधान मंत्री नवाज शरीफ के मंत्रिमंडल में प्रसारण, सूचना और नेशनल हेरिटेज मंत्री के रूप में पदभार ग्रहण किया।

मरियम नवाज और मरियम औरंगजेब में नाम के अलावा और भी बहुत समानताएं हैं। दोनों का ताल्लुक एक राजनीतिक खानदान से है, दोनों इमरान खान की कट्टर विरोधी हैं और एक ही पार्टी में हैं। और तो और कई मौकों पर मरियम औरंगजेब को मरियम नवाज के पुराने कपड़ों में भी देखा गया है। जिसके बाद पाकिस्तान में उनको मरियन नवाज की उतरन पहनने वाली और उनका पिछलग्गू कहा गया था।

शाज़िया मैरिक और डॉ. आयशा गौस पाशा भी बनीं मंत्री

पीपीपी की शाजिया मारी ने 2013 में पहली बार एक आरक्षित महिला सीट पर नेशनल असेंबली में प्रवेश किया। उनकी राजनीतिक जड़ें उनके दादा अली मोहम्मद मारी तक जाती हैं, जो ब्रिटिश भारत के विभाजन से पहले सिंध विधानसभा में एमपीए थे। उनके पिता अता मोहम्मद मर्री एक एमएनए और सिंध विधानसभा के डिप्टी स्पीकर थे। उनकी मां परवीन अता मारी भी एमपीए थीं।अपने एनए कार्यकाल से पहले, मैरी ने 2002 और 2008 में सिंध विधानसभा में एक आरक्षित महिला सीट पर कार्य किया। पीपीपी नेता को नामांकित किया गया और बाद में फौजिया वहाब की मृत्यु के बाद नेशनल असेंबली का सदस्य चुना गया। इससे पहले, उन्होंने सूचना और संस्कृति के लिए प्रांतीय मंत्री के रूप में कार्य किया।

शाज़िया मैरिक को पीपीपी कोटे से सरकार में मंत्री बनाया गया है।
शाज़िया मैरिक को पीपीपी कोटे से सरकार में मंत्री बनाया गया है।

पीपीपी के कोटे से मंत्री बनने वाली शाज़िया मैरिक का ताल्लुक कराची के एक राजनीतिक खानदान से है। उनके पिता सिंध असेंबली के डिप्टी स्पीकर थे।

डॉ. आयशा गौस पाशा को पहली बार केंद्रीय मंत्री बनाया गया है। इससे पहले वो पंजाब प्रांत में मंत्री हुआ करती थीं।
डॉ. आयशा गौस पाशा को पहली बार केंद्रीय मंत्री बनाया गया है। इससे पहले वो पंजाब प्रांत में मंत्री हुआ करती थीं।

वहीं कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने वाली PML-N की नेता डॉ. आयशा गौस पाशा पहले पंजाब प्रांत में मंत्री थी। मौजूदा पाक पीएम उस वक्त पंजाब के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि आयशा को महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी दी जाएगी।

शेरी रहमान जिम्मे जलवायु परिवर्तन मामला
शेरी रहमान मंत्री सत्ता के गलियारों के लिए कोई अजनबी नहीं है। पाकिस्तान की पहली महिला सीनेट विपक्षी नेता, पीपीपी की उपाध्यक्ष, शेरी रहमान को संघीय मंत्री के रूप में जलवायु परिवर्तन के लिए पाकिस्तान की प्रतिक्रिया का नेतृत्व करने का काम सौंपा गया है।

यूके से मास्टर्स पूरा करने के बाद, रहमान ने द डेली स्टार के साथ पत्रकारिता में अपना करियर शुरू किया और फिर द हेराल्ड के प्रधान संपादक बनी।
यूके से मास्टर्स पूरा करने के बाद, रहमान ने द डेली स्टार के साथ पत्रकारिता में अपना करियर शुरू किया और फिर द हेराल्ड के प्रधान संपादक बनी।

लगभग 20 वर्षों तक क्षेत्र में काम करने के बाद, रहमान ने 2002 में पीपीपी की आरक्षित महिला सीट पर विधायक नामित होने के बाद राजनीति में कदम रखा। अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने पार्टी में केंद्रीय सूचना सचिव, नीति नियोजन के अध्यक्ष और विदेश संबंध समिति के सदस्य जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। हालांकि, यह 2008 उन्हें सूचना और प्रसारण के लिए संघीय मंत्री नियुक्त किए जाने के बाद उनका राजनीतिक करियर सही मायने में शुरू हुआ था। रहमान ने 2011 से 2013 तक अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत के रूप में भी काम किया और सीनेट में पहली महिला विपक्षी नेता बनीं।

इसके अलावा, एक मंत्री के रूप में, उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी ऑर्डिनेंस में मार्शल लॉ के नेतृत्व वाले एंटी-मीडिया क्लॉज को निरस्त करने के लिए 2008 नेशनल असेंबली का पहला सरकारी बिल पेश किया। अगस्त 2008 में, प्रिंट और प्रकाशन अध्यादेश में इसी तरह के संशोधनों को निरस्त करने के रहमान के कदम ने प्रिंट मीडिया (आरटीआई विधेयक) के लिए संवैधानिक संरक्षण का मार्ग प्रशस्त किया।रहमान को मार्च 2013 में निशान-ए-इम्तियाज से भी सम्मानित किया गया था।

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