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महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल बोलीं:हर कदम पर चुनौती झेलती हैं महिला खिलाड़ी, फिर भी सामने आती हैं और खुद को साबित करती हैं

नई दिल्ली5 दिन पहले
भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्ता
  • शुरुआत में खेलने की आजादी नहीं मिलती है
  • महिलाएं खेल के दम पर खुद को साबित करती हैं
  • काफी सारा संघर्ष महिलाओं के लिए होता है
  • महिलाओं में चुनौतियों का सामना करने का हौसला भी ज्यादा

भारतीय महिला हॉकी टीम टोक्यो ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने से चूक गई, लेकिन उसने देशवासियों का दिल जीत लिया। पहली बार भारतीय महिला टीम ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। इस पूरी यात्रा को लेकर टीम की कप्तान रानी रामपाल ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि महिला खिलाड़ियों को यहां तक पहुंचने में कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा और आगे की रणनीति भी साझा की।

महिलाओं को करना पड़ता है खुद को साबित

रानी रामपाल ने कहा कि महिला खिलाड़ियों की यात्रा पुरुषों से काफी अलग होती है। महिला खिलाड़ी अलग-अलग बैकग्राउंड और धर्मों से आती हैं। जरूरी नहीं होता है कि सबके माता-पिता या समाज से समर्थन नहीं मिलता है। सबसे बड़ी चुनौती तो वही होती है। शुरुआत में खेलने की आजादी नहीं मिलती है। इसके बावजूद वे सामने आती हैं और अपने खेल के दम पर खुद को साबित करती हैं। काफी सारा संघर्ष महिलाओं के लिए होता है, लेकिन मुझे लगता है कि महिलाओं में इसका सामना करने के लिए काफी हौसला भी होता है। वे काफी मजबूत भी होती हैं। इसलिए बतौर महिला मुझे बहुत गर्व है कि मैं देश के लिए परफॉर्म कर पा रही हूं।

भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल
भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल

ओलिंपिक में हो गए थे भावुक

टोक्यो ओलिंपिक के बारे में बताते हुए रानी रामपाल ने कहा कि यह सफर उनके लिए बहुत अच्छा रहा। टीम ने टूर्नामेंट के लिए काफी तैयारी की थी। हम ब्रॉन्ज मेडल मैच मामूली अंतर से हार गए। इसके बाद सभी खिलाड़ी काफी भावुक हो गई थीं। जब हम भारत वापस आए तो फैंस का प्यार और सपोर्ट देखकर हमें बहुत अच्छा लगा। यह जानकर काफी खुशी हुई कि लोगों ने सुबह 6 बजे उठकर भी हमारा मैच देखा। लोग हॉकी को लेकर जागरूक हुए हैं और महिला हॉकी को भी तरजीह देने लगे हैं।

ब्रॉन्ज मेडल खोकर भी भारत का दिल जीता
ब्रॉन्ज मेडल खोकर भी भारत का दिल जीता

प्रदर्शन से पॉजिटिविटी लाना मकसद

असल में, दैनिक भास्कर समूह ने रविवार को गाजियाबाद में मौजूद CISF कैंपस में ओलिंपिक में शानदार प्रदर्शन करने वाली भारतीय टीम को सम्मानित किया और 26 लाख रुपये देकर प्रोत्साहित किया। इसी दौरान बातचीत में कप्तान रानी रामपाल ने ओलिंपिक के लिए रवाना होने से पहले के हालात के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि रवाना होते समय हमारे दिमाग में यही चल रहा था कि हमें ओलिंपिक में सिर्फ पार्टिसिपेट नहीं करना है। कुछ हासिल करके आना है। मेडल जीतना है। यह ठीक है कि हम मेडल नहीं जीत पाए, लेकिन हमने इसके लिए पूरी कोशिश की। ओलिंपिक से पहले का समय बहुत अच्छा नहीं था। देश कोरोना से जूझ रहा था। हम भी बायो बबल में थे और एक ही जगह ट्रेनिंग की। हमारा मकसद था कि अपने प्रदर्शन से लोगों में पॉजिटिविटी लानी है।

फ्यूचर प्लानिंग के सवाल पर रानी रामपाल ने कहा कि एशिया कप वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाइंग टूर्नामेंट है और एशियन गेम्स ओलिंपिक के लिए क्वालिफाइंग इवेंट है। हमारी कोशिश है कि इन टूर्नामेंट में जीत कर क्वालिफाई करें। हम सभी का ध्यान अभी इन्हीं दोनों टूर्नामेंट पर है।

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