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स्ट्रेस दूर करने का नया तरीका:ड्रॉइंग और पेंटिंग से हो रहा रेप विक्टिम और मेंटल ट्रॉमा का इलाज, एक्सपर्ट से जानें इसके फायदे और जरूरी बातें

नई दिल्ली7 महीने पहलेलेखक: राधा तिवारी
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डिप्रेशन और स्ट्रेस की वजह से लाइफस्टाइल बिल्कुल निराशा भरी हो रही है । कई बार लोग अपने साथ हुए बुरे हादसे को भूल नहीं पाते, वे डिप्रेशन में चले जाते हैं। कई तो सुसाइड करने की कोशिश भी करते हैं। ये प्रॉब्लम्स हर उम्र के लोगों में देखी जाती है। ऐसे में उनके इलाज के लिए एक्सप्रेसिव आर्ट थेरेपी बेहतर तरीका है।यह जानकर हैरानी होगी कि भारत में रेप विक्टिम और मेंटल ट्रॉमा का भी इलाज आर्ट थेरेपी से किया जा रहा है।

देश में 2.7 फीसदी लोग डिप्रेशन के शिकार
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस (NIMHANS) के एक सर्वे के अनुसार देश में कुल आबादी का 2.7 फीसदी हिस्सा किसी न किसी वजह से डिप्रेशन जैसे कॉमन मेंटल डिसऑडर का शिकार है। 5.2 प्रतिशत आबादी कभी न कभी इस तरह की समस्या से पीड़ित हुई है। 12 राज्यों में किए गए गए सर्वे के मुताबिक भारत में 15 करोड़ लोग किसी न किसी मेंटल प्रॉब्लम से पीड़ित हैं और उन्हें तत्काल डॉक्टरी मदद की जरूरत है। इसमें 10 जरूरतमंद लोगों में से सिर्फ एक व्यक्ति को डॉक्टरी मदद मिल पाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार दुनिया भर में 10 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं और मां बनने के बाद 13 प्रतिशत महिलाएं डिप्रेशन से गुजरी हैं। बच्चे भी डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं।

आर्ट थेरेपी से दिल की बात कहना आसान
जब इंसान किसी वजह से डिप्रेशन या तनाव में रहता है और वह कुछ बोलने की अवस्था में नहीं होता है, वह अपनी बातों को अच्छे से एक्सप्रेस नहीं कर पाता है। ऐसे में उसकी भानवाओं को आर्ट के जरिए व्यक्त किया जाता है। इसका वैज्ञानिक आधार भी है। इस थेरेपी में पेंटिंग, स्केचिंग, कोलाज मेकिंग, कलरिंग, मूर्ति कला आते हैं। इनके जरिए दिल की बातों को एक्सप्रेस किया जाता है। मेंटल ट्रॉमा झेल रहे लोगों और रेप विक्टिम के इलाज के लिए यह थेरेपी काफी कारगर है। इसमें वर्कशॉप के जरिए क्रिएटिव तरीके से तनाव, अनसुलझे सवलों को दूर किया जाता है और बुरी यादों को निकाला जाता है।

क्रिएटिव तरीके से होगा इलाज
दिल्ली की मनोचिकित्सक आकृति सिंह कहती हैं, आर्ट के माध्यम से खुद को व्यक्त करना सदियों से चला रहा है, लेकिन मानसिक रोग में पेंटिंग, कलरिंग की मदद से खुद को एक्सप्रेस करने का तरीका काफी प्रभावशाली माना जाता है। रिसर्च से पता चलता है कि मानसिक दबाव महसूस कर रहे लोगों को आर्ट थेरेपी से आराम मिलता है। यह एक क्रिएटिव तरीका है जिसमें मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक तरीकों से पेशेंट खुद की मदद करते हैं। हर उम्र के लोग चाहे वो बच्चे हों या बड़े, यह थेरेपी लेते हैं। इसमें पेशेंट 70-80% ठीक हो जाता है।

फ्री राइटिंग थेरेपी से भी इलाज मुमकिन
आर्ट इन माइंड एकेडमी, जोधपुर के आर्ट थेरेपिस्ट नकुल सचदेवा बताते हैं, जो हुआ, उसे तो आप बदल नहीं सकते, लेकिन आप फिर से सामान्य जीवन जीने के लिए प्रयास तो कर ही सकती हैं। ऐसा करना न केवल आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए, बल्कि सामाजिक जीवन के लिए भी बहुत जरूरी है। एक्सप्रेस आर्ट थेरेपी हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है। फिजिकल ट्रॉमा , रेप, ऑटिज्म , डिसेबिलिटी से गुजरने वाले लोगों को डांस थेरेपी दी जाती है। इसके अलावा अगर कोई युवा या टीनएजर किसी रिलेशनशिप की वजह से मेंटल ट्रॉमा से गुजर रहा होता है, तो उसे फ्री राइटिंग थेरेपी दी जाती है।

हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद
नकुल सचदेवा ने बताया, कई बार छोटे बच्चे अपने साथ हुई किसी घटना को डर या संकोच से बता नहीं पाते, ऐसे में वह कला के माध्यम से एक्सप्रेस कर सकते हैं। हर उम्र के लोगों पर यह बात लागू होती है। कई बार रेप विक्टिम अपने साथ हुए हादसे को किसी से शेयर नहीं कर पाती है, वह अंदर से घुटते रहती हैं। धीरे-धीरे वे डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं, उनके लिए आर्ट थेरेपी बेस्ट है।

आर्ट थेरेपी से बूस्ट होगा मेंटल हेल्थ
मेंटल हेल्थ आर्ट थेरेपी, हैदराबाद की एक्सप्रेस आर्ट थेरेपिस्ट सुनैना सिंह बताती हैं कि कई बार लोग अपनी जिंदगी में फेल महसूस करते हैं। इसकी वजह से वह डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। वे नया काम करने में घबराते हैं। उन्हें लगता है कि वह लाइफ में कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे। ऐसे में आर्ट प्रोग्राम के जरीए उनके मन के डर को दूर किया जाता है। ऐसे लोगों को आर्ट बेस्ड थेरेपी दी जाती है। उनके टैलेंट को बाहर निकालने के लिए कलर्स और स्कैच दिया जाता है, ताकि वह अपने अंदर चल रहे तूफान को पेपर पर दिखाएं। इसका लक्ष्य लोगों को डिप्रेशन से बाहर निकालकर खुश रहने के लिए प्रोत्साहित करना होता है।

पेंटिंग के जरिए बतायी दिल की बात
सुनैना बताती हैं कि दो साल पहले एक 14 साल की लड़की को एक एनजीओ वाले लेकर हमारी संस्था में आए थे। एक सप्ताह से वह लड़की कुछ भी बोल नहीं पा रही थी।उसकी हालत देखकर ऐसा लग रहा था कि उसके साथ कुछ बहुत बुरा हुआ है। वह अपना घर चलाने के लिए किसी घर में काम करती थी। गरीब होने की वजह से उसके पेरेंट्स भी काम करने जाते थे। एक दिन अचानक वह लड़की पेंटिंग करते समय उसने सारे कलर्स फेंक दिए।सारे पेंट उठाकर अपने ऊपर डालने लगी।काफी समझाने के बाद उसने बताया कि जिस घर में वह काम करने जाती है वहां एक दिन अकेले देखकर मालिक ने उसके साथ गलत किया और किसी को यह न बताने की धमकी दी। किसी के सामने मुंह खोलने पर जान से मारने को भी कई बार कह चुका है।

शादी के बाद हर दिन हुई मैरिटल रेप की शिकार
सुनैना ने बताया कि इसी तरह हैदराबाद के गांव से एक महिला हमारे पास लायी गई थी, जिनके दो बच्चे हैं। वह बहुत बुरे दौर से गुजर रही थीं। वह सही से न खाना खा पा रही थीं और न ही सही से बात कर पा रही थीं। एक साल तक लगातार वह हमारे संस्था में आती रहीं लेकिन अपने साथ हुए हादसे को वह किसी को कुछ भी नहीं बता पा रही थीं।

सुनैना ने बताया कि लगभग एक साल बाद डांस क्लास के दौरान वह बिना रुके 4 घंटे तक डांस करती रहीं। उस वक्त उनका गुस्सा साफ दिख रहा था। फिर जब वह थक कर बैठ गईं तो उन्होंने बताया कि उनकी शादी कम उम्र में कर दी गई थी। शादी के पहले गरीबी की वजह से वह खेत में काम करने जाती थीं। वहां कई बार उसके साथ रेप हुआ। वह यह बात डर से अपने घर वालों को कभी नहीं बता पाईं। जब शादी हुई तो वह काफी खुश थीं कि अब वह उस जिल्लत की जिंदगी से आजाद हो जाएंगी। लेकिन ससुराल में जाने पर उनके पति ने भी हर दिन उनका रेप किया। इस वजह से वह धीरे-धीरे मेंटल ट्रॉमा में चली गईं। अब उनका इलाज चल रहा है और किसी एनजीओ में वह हैंडीक्राफ्ट बनाने का काम कर अपने बच्चों की देखभाल कर रही हैं।

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