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बसंती की 15 साल की उम्र में शादी:17वें साल में जुड़वां बच्चे, और इसी दौरान मृत्यु, 25 प्रतिशत महिलाओं की यही कहानी

नई दिल्ली5 दिन पहलेलेखक: मरजिया जाफर
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देश में बाल विवाह के बढ़ते मामले लड़कियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है। चाइल्ड मैरिज को रोकने के लिए काम कर रही सेंट्रल डायरेक्ट संस्था के प्रोग्राम ऑफिसर राजेश कुमार ने कुछ ऐसे केस बताए जिन्हें सुनकर आपकी भी रूह कांप जाएगी।

कम उम्र में शादी, डिलीवरी के वक्त मौत

केस नंबर-1-बिहार के नवादा जिले के मर्मो गांव की बसंती देवी की घरवालों ने 16 साल की उम्र में शादी कर दी। शरीर से कमजोर बसंती जल्द ही प्रेग्नेंट हो गई। उसके गर्भ में जुड़वां बच्चे पल रहे थे। कम उम्र होने की वजह से उसका शरीर डिलीवरी का दर्द झेल नहीं पाया। मां और जुड़वां बच्चों की मौत हो गयी।

केस नंबर-2- नवादा जिले की प्रीति कुमारी की 15 साल की कम उम्र में घर वालों ने जबरदस्ती शादी कर दी। शादी के बाद प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के समय 17 साल की उम्र में उसने दम तोड़ दिया, क्योंकि उसका शरीर प्रसव का दर्द सह नहीं सका।

कच्ची उम्र की शादी चिंता की बात।
कच्ची उम्र की शादी चिंता की बात।

शादी और मौत के बीच झूल रही लड़की की जान बचाई

केस नंबर-3-राजेश कहते हैं कि हमारी टीम ने शादी और मौत के बीच झूल रही उत्तर प्रदेश के चित्रकूट की रहने वाली ममता की जिंदगी बचा ली। दरअसल 11 साल की लड़की की शादी 24 साल के लड़के से सिर्फ इसलिए कराई जा रही थी, क्योंकि लड़के ने उसके परिवार का खर्च उठाया था। इसके एवज में वो उनकी बेटी से शादी चाहता था।

केस नंबर- 4- कई लड़कियां छोटी उम्र में बिना सोचे समझे ऐसे कदम भी उठा लेती हैं जिनके कारण उन्हें सिर्फ ठोकरें ही मिलती हैं। चित्रकूट के एक गांव की रहने वाली कविता ने एक लड़के के साथ मंदिर में शादी तो कर ली लेकिन नाबालिग होने के कारण परिवार ने कविता की पति को जेल पहुंचा दिया। अब कविता का एक बच्चा है। बच्चे को न ससुराल वाले अपनाने को तैयार हैं न मायके वाले। पति जेल में है। इस हालत में कविता शेल्टर में रहने को मजबूर है।

राजेश कहते हैं, "यह कहानी सिर्फ बसंती, प्रीति, कविता या ममता की नहीं, बल्कि आज भी कई ऐसे परिवार हैं जो लड़कियों को बोझ समझते हैं।" हाल ही में आई नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 की रिपोर्ट में भी कच्ची उम्र की शादी पर चिंता जताई है। ​​​​

सेक्सुअल इंफेक्शन से जननांग कैंसर का खतरा

गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. सबिता कुमारी कहती हैं, बचपन से जवानी की तरफ जाने वाली उम्र में फीमेल बॉडी में ओवेरी मेच्योर नहीं होती। बॉडी में हो रहे बदलाव के दौरान अगर किसी लड़की की शादी कर दी जाए और वो प्रेग्नेंट हो जाए, तो लड़की की सेहत को खतरा हो सकता है। क्योंकि उसकी बॉडी प्रग्नेंसी के लिए तैयार नहीं।

डॉ. सबिता कहती हैं, "शादी के बाद सेक्स रिलेशनशिप के दौरान भी कई तरह के इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, जो आगे चल कर यानी 50 की उम्र में जननांग कैंसर का रूप ले सकता है। शादी की सही उम्र 21 साल है, उस समय यूटरस एक नई जिंदगी को जन्म देने के लिए हो जाता है।"

शादी को सिर्फ रीत समझकर निभाना नासमझी है।
शादी को सिर्फ रीत समझकर निभाना नासमझी है।

कम उम्र में शादी के नुकसान

‘सेव द चिल्ड्रन’ संस्था की रिपोर्ट में कहा गया कि किशोरियों में मौत का सबसे बड़ा कारण कम उम्र में प्रेग्नेंट होना है। डिलीवरी के दौरान इन्फेक्शन से हर साल लाखों लड़कियों की मौत हो जाती है। रिपोर्ट यह भी कहा गया कि विकासशील देशों में 40 प्रतिशत जन्म गैर-इरादतन होते हैं। बच्चा कब पैदा करना चाहिए इनका फैसला महिलाएं नहीं ले पातीं। कच्ची उम्र में शादी के बहुत खतरे हैं। इन रस्मों से तन और मन दोनों अनजान होते हैं। इसलिए सिर्फ रीत समझ कर इसे निभाना नासमझी है। इस रिश्ते के महत्व को समझें और फिर अमल करें।