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नाभि खिसकने से बढ़ सकती है परेशानी:बच्चों में अम्बिलिकल हर्निया हो सकता है, महिलाओं में पीरियड्स हो सकते हैं डिस्टर्ब

3 महीने पहलेलेखक: मरजिया जाफर
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नाभि खिसकने को गोला खिसकना भी कहते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे भारी वजन उठाना, झुकना, सीढ़ियां चढ़ना आदि। पूर्व चिकित्सा प्रभारी, यूनानी डॉ. सुबास राय से जानते हैं नाभि खिसकने पर क्या करना चाहिए।

नाभि खिसकना क्या है

नाड़ी का ऊपर या नीचे की ओर खिसकना ही नाभि खिसकना कहलाता है। वजन उठाने, ज्यादा मसालेदार खाना खाने या कुछ मामलों में यौन गतिविधियों की वजह से भी ऐसा होता है। एक पैर पर ज्यादा देर तक दबाव डालकर खड़े रहने से भी नाभि खिसक सकती है। नाभि और पेट की मसल्स में मरोड़ आती है। ऐसा होने पर नाभि अपनी जगह से हटकर ऊपर या नीचे चली जाती है।

नाभि खिसकने से पीरियड्स डिस्टर्ब होता है

नाभि नीचे की ओर खिसकती है तो दस्त और डाइजेशन में गड़बड़ी होती है। वहीं ऊपर की और खिसकने पर उल्टी, जी मिचलाना, घबराहट या कब्ज हो जाता है। आगे-पीछे खिसकती है तो पेट में दर्द होता है। महिलाओं की नाभि खिसकने पर पीरियड डिस्टर्ब हो सकता है।

जानें नाभि खिसकी है या नहीं

नाभि खिसकी है तो इसके लिए घर पर ही कुछ तरीकों से जान सकते हैं।

नाभि से पैर के अंगूठे नापना

नाभि से पैर के अंगूठे की दूरी नापते हैं। पीठ के बल सीधा लेटें और फिर एक रस्सी से नाभि से पैरों के अंगूठे की दूरी किसी को नापने को कहें। दोनों पैरों के अंगूठों की दूरी में कितना अंतर है, इससे नाभि खिसकने के संकेत मिलते हैं।

नाभि में नाड़ी ढूंढना

पीठ के बल लेटे हुए हाथ का अंगूठा नाभि के स्थान पर रखें। अंगूठे पर नाभि हिलने का एहसास हो तो सही जगह है वरना नाभि खिसक गई है।

मालिश कर सही जगह ला सकते हैं नाभि

नाभि पर मालिश कर इसे सही जगह लाया जाता है। एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर दबाव डालकर दर्द से काफी राहत मिल जाती है। लेकिन यह मसाज नार्मल मसाज की तरह नहीं है बल्कि इसे किसी जानकार से ही करवाना चाहिए। इस तरह की परेशानी हो तो भारी चीजें उठाने से परहेज करें वरना परेशानी बढ़ सकती है।

सरसों का तेल

नाभि खिसकने पर सरसों का तेल काफी फायदेमंद होता है। नाभि खिसक जाए तो तीन से चार दिन खाली पेट सरसों के तेल की कुछ बूंदे नाभि में डालें। जल्द ही फर्क दिखायी देगा और धीरे-धीरे नाभि अपनी जगह पर आ जाएगी।

नाभि पर मसाज करके इसे बैठाया जाता है। एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर दबाव डालकर दर्द से राहत मिलती है।
नाभि पर मसाज करके इसे बैठाया जाता है। एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर दबाव डालकर दर्द से राहत मिलती है।

नाभि खिसकने का दीए से करें इलाज

दीए का इस्तेमाल करके नाभि को सही जगह ला सकते हैं। जमीन पर लेटें और जलते दिए को नाभि के बीच में रखें। इसके ऊपर कांच का गिलास रखकर हल्का दबाव डालें ताकि हवा बाहर न आएं। दीए के अंदर बनी भाप से गिलास नाभि से चिपक जाएगी। इसे हल्के हाथ से उठाने पर स्किन भी ऊपर उठेगी। हवा बाहर आएगी और नाभि की स्किन नार्मल हो जाएगी। नाभि पर दबाव पड़ने से यह सही जगह आ जाएगी।

बच्चों की नाभि खिसकना

जन्म से पहले बच्चे के विकास के लिए जरूरी न्यूट्रीशन मां के जरिये गर्भनाल से मिलते हैं। ये गर्भनाल बच्चे के पेट पर नाभि वाली जगह से जुड़ा होता है। जन्म के बाद बच्चे के साथ ये गर्भनाल भी बाहर आता है। जन्म के बाद नाल काट दिया जाता है। चूंकि इस नाल में कोई नस नहीं होती है इसलिए शिशु दर्द नहीं होता है।

बच्‍चे की बाहर निकली नाभि की देखभाल

बच्चों की नाभि बाहर को निकली होती है या सामान्य से ज्यादा उभरी है। इसका कारण अम्बिलिकल हर्निया हो सकता है। नॉर्मली बच्चों में ये प्रोब्लम अपने आप ठीक हो जाती है। मगर 3-4 साल की उम्र तक भी बच्चों की नाभि उभरी हुई और बड़ी हो, तो ये अम्बिलिकल हर्निया का संकेत हो सकता है।

क्यों होता है अम्बिलिकल हर्निया

जन्म के 3 साल बाद तक शिशु के तमाम अंदरूनी अंगों का विकास होता है। ऐसे में अगर कोई आंतरिक अंग शिशु के पेट में कमजोर हिस्से पर दबाव बनाता है, तो वो हिस्सा उभर आता है। ऐसे में अम्बिलिकल हर्निया हो सकता है। बच्चों में ये नॉर्मल है लेकिन बड़ों को भी ये समस्या हो सकती है। शुरुआती दिनों में 10 प्रतिशत बच्चों में ये समस्या होती है, जिनमें से ज्यादातर बच्चों में ये अपने आप ठीक हो जाती है।

कैसे कराएं जांच

शिशु की नाभि देखकर अम्बिलिकल हर्निया के बारे में पता लगाते हैं। कई मामलों में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड से जांच की जाती है कि अम्बिलिकल हर्निया के कारण शरीर में कोई परेशानी या किसी अंदरूनी अंग का दबाव तो नहीं है। इसके अलावा ब्लड इंफेक्शन या इस्केमिया की आशंका होने पर खून की जांच भी की जाती है।

ये है इलाज

शिशु की उभरी हुई नाभि 3-4 साल की उम्र में ठीक नहीं होती तो सर्जरी की जरूरत पड़ती है। कई बार बच्चे को इसके कारण दर्द होता है या ब्लड सर्कुलेशन में परेशानी आती है, तो भी सर्जरी की जरूरत पड़ती है। कई बार बच्चों के पेट में दर्द का कारण आंत में मरोड़ भी हो सकता है।

आंवला और गिलोय

नाभि खिसकने पर एक चम्मच आंवला पाउडर में नींबू का रस मिलकर नाभि के चारों ओर इस पेस्ट को लगाएं और कुछ देर तक लेटे रहें। दिन में दो बार नाभि पर आंवले का पेस्ट लगाने से नाभि अपनी जगह पर आ जाती है। इसके अलावा नाभि खिसकने पर दर्द से राहत पाने के लिए गिलोय भी काफी लाभकारी है।

चाय पत्ती है फायदेमंद

नाभि खिसकने के बाद दस्त होने लगता है। ऐसी स्थिति में एक गिलास पानी में एक चम्मच चायपत्ती मिलाकर उबाल लें और छानकर गुनगुना चाय पीएं। इससे दर्द तो कम होगा ही साथ में नाभि अपनी जगह पर आ जाएगी।

योगासनों से भी राहत पा सकते हैं

योगा एक्सपर्ट वीना गुप्ता कहती हैं नाभि खिसकने पर कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसके लिए योगासनों के अभ्यास से छुटकारा पा सकते हैं।

योगासन के माध्यम से नाभि को अपने यथा स्थान पर लाया जा सकता है। आइए जानते हैं उन योगासनों के बारे में।

उत्तानपादासन

योगा मैट पर पीठ के बल सावधान मुद्रा में लेट जाएं और फिर अपनी दोनों आंखों को बंद कर लें। अब सांस भरते हुए अपनी दोनों टांगों को एक साथ ऊपर की तरफ उठाएं और 30 डिग्री के कोण तक ले जाकर रोक दें। कुछ देर इसी स्थिति में रहने के बाद धीरे-धीरे अपनी आंखें खोलें और फिर सांस छोड़ते हुए आसन को छोड़कर कुछ मिनट विश्राम करें। इस प्रक्रिया को दोहराएं।

मंडूकासन

योगा मैट पर वज्रासन की अवस्था में बैठ जाएं और फिर अपने दोनों हाथों से मुठ्ठी बनाकर इन्हें अपनी नाभि के पास रख लें। अब सांस छोड़ते हुए आगे की ओर इस तरह से झुकें कि नाभि पर मुठ्ठी का ज्यादा से ज्यादा दबाव पड़े। इस दौरान सिर और गर्दन ऊपर उठाए रखें। धीरे-धीरे सांस लेते और छोड़ते हुए जब तक हो सके इस स्थिति को बनाए रखें। धीरे-धीरे आसन छोड़ दें और विश्राम करें।

नौकासन

योगा मैट पर बिल्कुल सीधे लेट जाएं। अब अपने दोनों पैरों के पंजों को आपस में जोड़ते हुए उन्हें सांस भरते हुए 45 डिग्री तक उठा लें। इसके बाद अपने दोनों हाथों को कंधे की सीध में उठाते हुए घुटनों की तरफ एकदम सीधा रखें। इसी अवस्था में अपने सिर और पीठ को भी उठाएं और नाव का आकार ले लें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे योगासन को छोड़ें।

मकरासन

योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं और अपने दोनों हाथों को मोड़कर कोहनियों की नोक को जमीन पर टिकएं। सिर को थोड़ा आगे झुकाकर अपनी ठुड्डी को अपनी दोनों हाथों की हथेलियों पर रखें। इसके बाद सांस भरते हुए अपने दाएं पैर को मोड़ें और फिर सांस को छोड़ते हुए इसे सीधा कर लें। इस प्रक्रिया को दूसरे पैर से भी इसी तरह दोहराएं। फिर कुछ मिनट बाद धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं।

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