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अब घर के पास लगेगा वैक्सीन का कैंप:दिल्ली हो या देश, कोरोना वैक्सीनेशन में हर जगह पीछे रहीं महिलाएं, वैक्सीन नीति बदलने से आ सकता है सुधार

नई दिल्ली4 महीने पहले
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महिलाएं वैक्सीनेशन में पीछे - Dainik Bhaskar
महिलाएं वैक्सीनेशन में पीछे
  • वैक्सीनेशन में महिलाएं पुरुषों से पीछे
  • नई नीति से बदलाव की उम्मीद बढ़ी

केंद्र सरकार ने वैक्सीन नीति को लोगों के लिए आसान करते हुए इसमें बदलाव किया है। जो लोग कुछ वजहों से कैम्प तक जाकर वैक्सीन नहीं लगवा पा रहे थे, अब उनके घर के पास ऐसे कैम्प लगवाए जाएंगे। देश में वैक्सीन का कवरेज बढ़ाने के लिए इस नीति में बदलाव किया गया है। इससे उम्मीद जगी है कि वैक्सीन नीति में महिलाओं को भी शामिल किया जाएगा, क्योंकि देश भर में महिलाएं वैक्सीन लगाने के मामले में पुरुषों से पीछे हैं।

कोरोना वैक्सीन लगवाने में राष्ट्रीय स्तर पर पीछे महिलाएं

देश भर में जहां पुरुषों और महिलाओं की आबादी का अनुपात 1000: 943 है। यानी 1000 पुरुषों के मुकाबले 943 महिलाएं हैं लेकिन वैक्सीन लगवाने के मामले में देश भर में 1000 पुरुषों के मामले महिलाएं केवल 900 ही हैं। cowin.gov.in के मुताबिक शुक्रवार दोपहर तक चालीस करोड़ से ज्यादा महिलाओं ने वैक्सीन लगवाईं जबकि वहीं 43 करोड़ से ज्यादा पुरुषों को टीके की खुराक दी जा चुकी है।

देश की राजधानी में और पीछे हो गई हैं महिलाएं

देश की राजधानी दिल्ली की वैक्सीनेशन ड्राइव ने 23 सितंबर को एक और पड़ाव पार कर लिया, जिसमें 18 से 44 साल की उम्र के लोगों को दी जाने वाली खुराक की संख्या 1 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई। दिल्ली में कुल 1.2 करोड़ लोगों को वैक्सीन की पहली खुराक दी जा चुकी है, जबकि 52 लाख लोगों को दूसरी डोज लग चुकी है। लेकिन दिल्ली में भी पुरुषों के मुकाबले महिलाएं वैक्सीनेशन में पीछे चल रही हैं। यहां 97 लाख से ज्यादा पुरुषों को कोविड-19 वैक्सीन लग चुकी है जबकि 70 लाख से ज्यादा से महिलाओं ने टीके की खुराक ली है। यानी यहां 1000 पुरुषों के मुकाबले केवल 720 महिलाओं ने ही टीके लगाए हैं। देश के दूसरे हिस्सों के मुकाबले मेडिकल सुविधाओं से लैस होने के बावजूद दिल्ली में महिलाओं का वैक्सीनेशन कम हो पा रहा है।

वुमन वैक्सीनेशन बढ़ाने की जरूरत
वुमन वैक्सीनेशन बढ़ाने की जरूरत

वैक्सीनेशन एट होम से जगी उम्मीद

केंद्र सरकार के वैक्सीनेशन एट होम के फैसले से उनके लिए उम्मीद जगी है जो किसी न किसी वजह से सेंटर पर जाकर कोरोना के टीके नहीं लगवा पा रहे हैं। यह सुविधा उन लोगों के लिए जो सेंटर पर जाने में सक्षम नहीं हैं। इसके लिए एडवाइजरी जारी की गई है। सभी राज्यों और केंद्र शासित राज्यों को इसके लिए खास इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है। मांग की जा रही है कि वैक्सीनेशन एट होम की सुविधा बुजुर्गों, प्रेग्नेंट महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं को भी दी जाए जो कोरोना के खतरे की वजह से वैक्सीन नहीं लगवा सके। बुजुर्ग, प्रेग्नेंट और फीडिंग कराने वाली महिलाओं में वैक्सीनेशन का रेट अभी कम है।

हिचक रहीं प्रेग्नेंट महिलाएं!

दिल्ली में गर्भवती महिलाओं में वैक्सीनेशन की दर काफी कम है। इसकी असली वजह भीड़ में जाने से कोरोना संक्रमण का डर है। हालांकि दिल्ली में महिलाओं के लिए स्पेशल अरेंजमेंट किया गया है। दिल्ली के कई जिलों में पिंक बूथ की शुरुआत की गई है। यह बूथ सिर्फ महिलाओं के लिए है। यहां पर वुमन स्टाफ की व्यवस्था की गई है जहां सभी तरह की महिलाओं का वैक्सीनेशन हो रहा है। इनमें गर्भवती महिलाएं, दूध पिलाने वाली महिलाएं और सामान्य महिलाओं को टीका लगाया जा रहा है। हालांकि प्रेग्नेंट महिलाओं की संख्या काफी कम है।

कोरोना काल में जन्मे सबसे ज्यादा बच्चे

यूनिसेफ ने अपनी रिपोर्ट में कोरोना काल में दुनियाभर में 11.6 करोड़ बच्चों का जन्म होने का अनुमान जाहिर किया था। इसमें दो करोड़ बच्चों के साथ भारत पहले नंबर पर था। भारत समेत दुनिया भर में प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए वैक्सीन की गाइडलाइन काफी देर में जाकर बन सकी थी। इससे भी कई महिलाएं भीड़भाड़ वाले सेंटर में जाकर वैक्सीन लेने में हिचक रही हैं। यही वजह है कि अब तक टीका लगाने के मामले में महिलाएं पीछे हैं। उम्मीद की जा रही है कि वैक्सीनेशन की नीति में महिलाओं का भी ध्यान रखा जाएगा। दिल्ली के मयूर विहार में प्रैक्टिस करने वालीं डॉ. भवानी कहती हैं कि उनके क्लीनिक में जिन महिलाओं की डिलीवरी हुई है, उनमें से कुछ ने अभी तक वैक्सीन नहीं ली है। छोटा बच्चा के साथ होने की वजह से उनको लगता है कि रिस्क फैक्टर ज्यादा है। अगर किसी ने किसी भी वजह से वैक्सीन नहीं ली है तो हम उनको सलाह देते हैं कि बाहरी जगहों पर एक्सपोजर कम रखें और जब भी संभव हो वैक्सीन जरूर लें।